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जोशीमठ हादसाः ग्लेशियर टूटने के बाद पानी के गुबार ने ले लिया था ‘विकराल’ झील का स्वरूप

उत्तराखंड के हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के जियोलॉजिस्ट का कहना है कि ऋषिगंगा इलाके में आपदा के बाद एक जगह पर झील बन गई है जिससे कि बाढ़ आ सकती है।

उत्तराखंड में आपदा के बाद बचाव और राहत कार्य किया जा रहा है। (PTI)

उत्तराखंड के हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के जियोलॉजिस्ट का कहना है कि ऋषिगंगा इलाके में आपदा के बाद एक जगह पर झील बन गई है जिससे कि बाढ़ आ सकती है। ये जियोलॉजिस्ट ऋषिगंगा इलाके पर सर्वेक्षण कर रहे हैं। बता दें कि बीते रविवार को ऋषिगंगा इलाके में ही बाढ़ आई थी। यह जानकारी ऐसे समय में आई है जब ऋषिगंगा नदी में में गुरुवार से जलस्तर बढ़ा है। आपदा जिस जगह पर आई है वहीं से थोड़ी दूर पर ही ऋषिगंगा नदी भी बह रही है। इसके चलते बचाव कार्य में बाधा पड़ सकती है। मामले में स्थानीय ग्रामीणों और प्रशासन को अलर्ट भी जारी किया गया है।

विश्वविद्यालय के अर्थ साइंस डिपार्टमेंट के प्रोफेसर नरेश राणा ने एक वीडियो शेयर किया है जिससे कि प्रशासन और लोग मामले के प्रति जागरूक हो जाएं। प्रोफेसर नरेश राणा का दावा है कि ऋषिगंगा के पास एक और इलाके में एक झील बन चुकी है जिससे कि बाढ़ आने का खतरा है।

वीडियो में नरेश राणा ने बताया, ”मैं यहां चोटी से ऋषिगंगा और रौंठी नदी को देख सकता हूं। बीते रविवार को जो बाढ़ आई थी वह रौंठी नदी से आई थी। इस आपदा से ऋषिगंगा नदी ब्लॉक हो गई है जिसके चलते एक और आपदा आने का खतरा है।”


नरेश राणा ने कहा कि इस तरह झील बनना खतरनाक है क्योंकि यह रेस्क्यू ऑपरेशन को फिर से प्रभावित कर सकता है। वहीं, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के डायरेक्टर कलाचंद सेन ने भी दावा किया है कि ऋषिगंगा के ऊपर एक झील बनी है। हालांकि उन्होंने इस बात की जानकारी नहीं दी कि यह झील कितनी बड़ी है।

 

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