बिहार में एक बार फिर पुल गिरने की घटना सामने आई है। वैशाली जिले में गुरुवार को निर्माणाधीन पुल का एक हिस्सा गिरने से सात मजदूर घायल हो गए। यह हादसा उस समय हुआ जब पुल निर्माण के दौरान गर्डर लॉन्चर की मदद से सामान लोड किया जा रहा था। शुरुआती जानकारी में हादसे की वजह तकनीकी खराबी बताई जा रही है।

घटना के बाद मौके पर राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों में से तीन को सदर अस्पताल ले जाया गया है। पुलिस के मुताबिक, फिलहाल किसी की मौत की सूचना नहीं है, जबकि चार लोगों को मामूली चोटें आई हैं। इस मामले पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का भी बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने ऐसी घटनाओं को लेकर चिंता जताई है।

चिराग पासवान ने कहा कि इस तरह के हादसों से सरकार चिंतित होती है और निर्माण की गुणवत्ता पर कई सवाल उठते हैं। उन्होंने दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है। साथ ही, पुराने पुल-पुलिया और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर की समय-समय पर जांच कराने की जरूरत पर भी जोर दिया है।

गर्डर लॉन्चर में तकनीकी खराबी की आशंका

पुलिस के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान गर्डर लॉन्चर से कुछ सामान लोड किया जा रहा था। इसी दौरान इसमें तकनीकी खराबी आने की आशंका है, जिसके बाद हादसा हुआ। हादसे में एक मजदूर का पैर दब गया था, जिसे बचाव दल ने मशीन की मदद से बाहर निकाला।

वैशाली के पुलिस अधीक्षक शुभांक मिश्रा ने बताया कि घायलों में तीन लोगों को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे की सही वजह और घटनाक्रम का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।

भारतमाला प्रोजेक्ट का हिस्सा है पुल

यह पुल भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बनाया जा रहा है। हादसे के बाद निर्माण कार्य और सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, पुलिस ने अभी तक हादसे के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया है।

तेजस्वी यादव ने सरकार पर साधा निशाना

हादसे को लेकर बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि घटिया निर्माण सामग्री, खराब गुणवत्ता, मानकों की अनदेखी जांच में अनियमितता और भ्रष्टाचार ऐसे हादसों के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार अब मामले को दबाने की कोशिश करेगी।

चिराग पासवान बोले- ऐसी घटनाओं से सरकार चिंतित होती है

वैशाली में पुल लॉन्चर गिरने की घटना पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि ऐसी घटनाएं सरकार को चिंतित करती हैं और इनसे निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े होते हैं। इस घटना पर चिराग पासवान ने चिंता जताते हुए कहा कि ऐसे हादसों से सरकार भी चिंतित होती है और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते हैं।

उन्होंने कहा कि अगर ऐसी घटनाएं हो रही हैं तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह मुख्यमंत्री से बातचीत कर यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि राज्य में बने इंफ्रास्ट्रक्चर की समय-समय पर गुणवत्ता जांच होती रहे।

उन्होंने दिल्ली में बिल्डिंग गिरने के बाद हुई कार्रवाई का उदाहरण देते हुए कहा कि पुराने और खतरनाक पुल-पुलिया व इमारतों की भी पहले से जांच होनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर उनकी मरम्मत या उन्हें हटाने की कार्रवाई की जानी चाहिए।

पहले भी गिर चुके हैं बिहार में कई पुल

बिहार में पुलों के गिरने का मुद्दा पहले भी सुर्खियों में रहा है। चार महीने पहले 4 मई को गंगा नदी पर बने विक्रमशिला पुल का एक हिस्सा गिर गया था। यह पुल भागलपुर और मिर्जाचिया के साथ-साथ सीमांचल और कोसी क्षेत्र को जोड़ता है।

वहीं, 2024 में बिहार में करीब दो हफ्ते के भीतर 10 पुल गिर गए थे। इसके बाद सरकार ने कथित लापरवाही के मामले में जल संसाधन और ग्रामीण कार्य विभाग के 15 इंजीनियरों को निलंबित किया था।

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