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बड़ी विसंगतियां हैं 18 से 45 आयुवर्ग के लोगों के वैक्सीनेशन में, 85 प्रतिशत डोज़ सात राज्यों में लग गए

आंकड़े बतातेे हैं कि एक मई से शुरू हुए इस वर्ग के टीकाकरण अभियान में वैक्सीन के 85 प्रतिशत डोज़ सात राज्यों में खपे हैं। कई राज्य जहां वाइरस संक्रमण बहुत ज्यादा है, वहां नाममात्र का ही टीकाकरण हुआ है।

देश के कई राज्यों में वैक्सीन की कमी (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

केंद्र के आश्वासन के बावजूद 18 से 45 आयुवर्ग के वैक्सीनेशन में बड़ी असमानताएं और विषंगतियां उभर कर सामने आ रही हैं। आंकड़े बतातेे हैं कि एक मई से शुरू हुए इस वर्ग के टीकाकरण अभियान में वैक्सीन के 85 प्रतिशत डोज़ सात राज्यों में खपे हैं। कई राज्य जहां वाइरस संक्रमण बहुत ज्यादा है, वहां नाममात्र का ही टीकाकरण हुआ है।

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से वादा किया था कि उसने वैक्सीन बनाने वालों से बात करके यह मामला सुलटा लिया है और सब राज्यों को ज़रूरत के मुताबिक वैक्सीन मिलेंगी।

दरअसल, मामला यह है कि 18-45 आयुवर्ग वालों के वैक्सीनेशन के लिए वैक्सीन की खरीददारी राज्यों को खुद खुले बाज़ार से करनी है। नतीजतन, आवंटन के जो पैमाने 45 से ऊपर वालों के लिए थे, वे लागू ही नहीं होते।

इंडियन एक्सप्रेस द्वारा जुटाए आंकड़े बताते हैं कि एक मई से 12 मई के बीच 18-44 वाले ग्रुप में 34.66 लाख डोज़ लोगों को लगाए गए। इसमें 85 प्रतिशत डोज़ सात राज्यों में लगे। महाराष्ट्र में 6.25 लाख, राजस्थान में 5.49 लाख, दिल्ली 4.71 लाख, गुजरात में 3.86 लाख, हरियाणा में 3.55 लाख, बिहार में 3.02 लाख और उत्तर प्रदेश में 2.65 लाख डोज़ वैक्सीन लगाई गई।

लेकिन, सात अन्य राज्यों में जहां एक लाख से ज्यादा एक्टिव केस हैं, वहां केवल कुल डोज़ का 5.86 प्रतिशत ही गल पाया। ज़रा देखें तो। कर्नाटक जहां देश में सबसे ज्यादा 5.87 एक्टिव केस हैं, वहां वैक्सीन के मात्र 74,015 डोज़ लगे। और, केरल जो एक्टिव केस (4.24 लाख) के लिहाज से देश में तीसरे नम्बर पर है, वहां सिर्फ 771 डोज़। आंध्र मेंं एक्टिव केस 1.95 लाख हैं और कुल डोज लगे 1,133। ऐसे ही तमिलनाडु में (एक्टिव केस 1.62 लाख) 22,326 डोज़, पश्चिम बंगाल (एक्टिव केस 1.27 लाख) में 12,751 डोज़ और छत्तीसगढ़ में (एक्टिव केस 1.21 लाख) महज 1,026 डोज़ लगे।

होता क्या है कि केंद्र सरकार जब हेल्थ केयर वर्कर्स, फ्रंटलाइन वर्कर्स और 45 से ऊपर आयुवर्ग वालों के लिए जब अपना 50 प्रतिशत कोटा राज्यों को देता है तो आवंटन में तीन पैमानों का इस्तेमाल करता है। पहला पैमाना होता है कि राज्य में संक्रमित लोगों की संख्या कितनी है। लेकिन 18-45 ग्रुप के लिए यह पैमाना लागू नहीं होता क्योंकि इनके लिए राज्य सरकारों को खुले बाजार से सीधी खरीददारी करनी होती है।45 से ऊपर वालों के मामले में अन्य पैमाने हैं राज्य कितनी वैक्सीन कितनी जल्दी इस्तेमाल करता है और यह कि वेस्टेज कितना है।

बात समझने के लिए केरल का उदाहरण लेते हैं। 45 से ऊपर वालों के मामले में इस राज्य ने 81.12 लाख डोज़ वैक्सीन किए हैं। लेकिन 18-45 आयुवर्ग में केरल ने सिर्फ 771 डोज़ ही लगाए हैं।

गौरतलब है केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे में कहा था कि उसने वैक्सीन बनाने वालों के साथ बैठ कर राज्यों के लिए यथानुपात दर दी है। राज्य उसी के मुताबिक वैक्सीन खरीदेंगे ताकि कोई विषमता न हो। केंद्र ने यह भी कहा था कि वह राज्यों को लिखित जानकारी दे रही है कि मई माह में वे कितनी वैक्सीन पाएंगे। लेकिन इस लिहाज से भी असमानता देखी जा सकती है। तेलंगाना और असम की लगभग समान आबादी है। तीन करोड़ से कुछ ज्यादा। लेकिन असम ने जहां 1.31 लाख डोज़ लगाए हैं तो तेलंगाना ने सिर्फ 500 डोज़। ऐसे ही एक करोड़ की आबादी वाले उत्तराखंड 50,968 डोज़ खर्च किए लेकिन पंजाब और झारखंड जिनकी आबादी तीन करोड़ के लगभग है उन्होंने क्रमशः 5,469 और 94 डोज़ ही लोगों को लगाए।

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