अन्नामलाई ने दो प्रमुख द्रविड़ दलों के प्रभुत्व वाले कठिन राजनीतिक परिदृश्य में भाजपा की छवि और प्रभाव को बढ़ाया, लेकिन अंतत: पार्टी ने उन्हें साइडलाइन कर दिया क्योंकि भाजपा को उनकी इच्छा के विरुद्ध जाकर एआईएडीएमके के साथ हाथ मिलाना पड़ा।
सोमवार को तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अन्नामलाई दिल्ली पहुंचे और अपने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को धन्यवाद देते हुए उन्हें सूचना दी कि वे पार्टी से अलग हो रहे हैं।
आईपीएस रह चुके हैं अन्नामलाई
कर्नाटक पुलिस के अपने बेबाक और निडर रवैये के लिए मशहूर पूर्व आईपीएस अधिकारी उड्डपी एसपी के रूप में उनके तबादले के समय लोगों ने उनके फैसले का विरोध किया था। राजनीति में आने की अपनी महत्वकांक्षा को पूरा करने के लिए अन्नामलाई ने इस्तीफा दे दिया। अपने दोस्तों और शुभचिंतकों को लिखे पत्र में 2011 बैच के अधिकारी अन्नामलाई ने कहा कि उन्होंने सेवा से इस्तीफा देने का फैसला करने से पहले बहुत सोच-विचार किया।
पश्चिमी तमिलनाडु के करुरु में प्रभावशाली गौंडर समुदाय से ताल्लुक रखने वाले अन्नामलाई इस्तीफे के बाद कुछ समय तक गुमनाम रहे। उन्होंने गैर सरकारी संगठन वी द लीडर फाउंडेशन के माध्यम से राज्य के विभिन्न हिस्सों में सामाजिक कल्याण का काम किया, कृषि कार्य किया और एक किताब पर भी काम किया।
2020 में की घोषणा
मई 2020 में, एक फेसबुक लाइव सेशन के दौरान अन्नामलाई ने राजनीति में उतरने की योजना की घोषणा की, उन्होंने कहा, मैं तमिलनाडु की राजनीति में प्रवेश करने की योजना बना रहा हूं और तमिलनाडु में अगामी विधानसभा चुनाव लडूंगा। राजनीति में प्रवेश करके मैं व्यवस्था में बदलाव लाना चाहता हूं।
फिर ज्वॉइन की भाजपा
शुरुआत में यह साफ नहीं था कि अन्नामलाई किस पार्टी को ज्वाइन करेंगे, लेकिन उन्होंने कहा था कि वे रजनीकांत की योजनाओं की घोषणा का इंतजार कर रहे और अगर रजनीकांत कोई पार्टी बनाते हैं तो वे उनके साथ जुड़ने पर विचार करेंगे। हालांकि रजनीकांत द्वारा अपनी योजनाओं पर आगे न बढ़ने के कारण तीन माह बाद उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर ली। भाजपा के लिए भी अन्नामलाई जैसे नेता पर दांव लगाना एक जोखिम भरा कदम था।
उस दौरान उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा था, “समय बीतने के साथ, मुझे यह महसूस होने लगा कि देश को सामाजिक बदलाव के साथ-साथ राजनीतिक परिवर्तन की भी उतनी ही जरूरत है। मुझे लगा कि भाजपा मेरे लिए स्वाभाविक रूप से उपयुक्त है क्योंकि मेरे सिद्धांत उनसे मेल खाते हैं। वे योग्यता के आधार पर नेताओं को मंच प्रदान करते हैं। यह एक राष्ट्रवादी पार्टी है जिसका देश के लिए एक व्यापक दृषिकोण है, इसलिए मैं उनसे जुड़ गया हूं।”
उन्होंने कहा, द्रविड़ की पार्टियां यह भूल चुकी है कि वह क्यों बनाई गई थीं और कई पार्टियां पारिवारिक विचारों को आगे बढ़ाने में जुट गई है। उन्होंने कहा, “मैं खुद को ऐसी पार्टी में कतार में खड़े होकर शीर्ष नेता से आशीर्वाद की उम्मीद करते नहीं देख सकता।”
2021 में संभाली थी पार्टी की कमान
2021 के विधानसभा चुनावों के बाद, जिसमें स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सत्ता में आई, तो अन्नामलाई ने एल मुरुगन से राज्य भाजपा की कमान संभाली, क्योंकि एल मुरुगन केंद्रीय मंत्री बन गए थे। हालांकि वे अरवाकुरूची निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव हार गए लेकिन पश्चिमी क्षेत्र में दो सीटें जीतने में मदद की। इसने पार्टी में उन्हें अहम स्थान दिलाया।
भाजपा के महासचिव (संगठन) बीएल संतोष के करीबी अन्नामलाई ने राज्य में पार्टी की छवि को मजबूत करने और द्रविड़ दलों के एकाधिकार को तोड़ने के लिए तुरंत काम शुरू कर दिया। द्रविड़ दलों पर हमला करने वाले उनके जोशीले भाषणों ने सबका ध्यान खींचा और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता में बढ़ोतरी हुई।
क्या रहीं अन्नामलाई की बाधाएं?
हालांकि उन्हें पार्टी के एक शक्तिशाली बाह्मण समूह और आरएसएस से लगातार चुनौती मिलती रही। राजनीति के प्रति उनके आक्रामक रवैये ने भाजपा को फेमस किया, लेकिन साथ ही पार्टी और एआईएडीएमके के कई नेताओं को नाराज कर दिया। एआईएडीएमके पर उनके लगातार हमलों और उसके नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पाडी के पलानीस्वामी के साथ उनकी व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता के कारण सितंबर 2023 में, 2024 के लोकसभा चुनावों से कुछ महीने पहले, दोनों पार्टियों का गठबंधन टूट गया।
इसके बाद भाजपा के दिल्ली हाईकमान ने संसदीय चुनावों में मिली हार के बाद अपनी रणनीति में बदलाव किया। अन्नामलाई ने ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में कई महीने अवकाश पर बिताए और वापस लौटने पर उनका रुख नरम दिखाई दिया, लेकिन पार्टी तब तक एक अलग दिशा में आगे बढ़ चुकी थी। अप्रैल 2025 में, विधानसभा चुनावों के मद्देनजर, पार्टी ने एआईएडीएमके के साथ दोबारा गठबंधन किया। साथ ही पार्टी ने अन्नामलाई को साइडलाइन कर उनकी जगह नैनार नागेंद्रन को सामने किया, जो एआईएडीएमके के प्रति अधिक उदारवादी नेता थे।
विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी ने की थी मनाने की कोशिश
इसके बाद अन्नामलाई लगातार हाशिए पर रहे और पार्टी ने उन्हें विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए काफी मनाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने चुनाव न लड़ने का फैसला किया, जिससे पार्टी से उनकी बढ़ती दूरी साफ झलकती है। जोसेफ विजय के उदय ने एक तरह से उनकी इस बात की पुष्टि है कि भाजपा नेतृत्व को उनका यह कहना सही था कि भाजपा को एआईएडीएमके के साथ गठबंधन के बजाय अपने दम पर चुनाव लड़ना चाहिए। अन्नामलाई भाजपा को द्रविड़ पार्टियों के विकल्प के रूप में स्थापित करना चाहते थे, जो टीवीके ने इस चुनाव में करके दिखाया।
अगर अन्नामलाई को अधिक तवज्जो दी होती तो तमिलनाडु में होने वाले बदलाव चाहने वाले वोटरों के लिए विजय एकमात्र विकल्प न होते, भाजपा को भी इसका लाभ मिल सकता था। हालांकि, अब जब तमिलनाडु में भाजपा का भविष्य माने जाने वाले अन्नामलाई पार्टी छोड़ने की तैयारी में तो भाजपा का भविष्य अंधकार में न होता।
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तमिलनाडु की राजनीति में बीजेपी को बड़ा झटका लगने के संकेत मिल रहे हैं। कई वरिष्ठ सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया है कि राज्य में पार्टी के प्रमुख चेहरे के. अन्नामलाई ने बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने वाले हैं। इस बात की जानकारी वे दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को भी देने वाले हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
