तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष के अन्नामलाई ने मंगलवार को केंद्र सरकार से मौजूदा शैक्षणिक वर्ष में तीन-भाषा नीति लागू करने के अपने फैसले को वापस लेने का आग्रह किया। उन्होंने सीबीएसई से तीन साल बाद इस नीति को जरूरी बनाने को कहा, जैसा कि पहले ही घोषणा की गई थी। सीबीएसई ने 15 मई 2026 को सभी विद्यालयों को एक नया सर्कुलर भेजा था। इसमें बोर्ड ने वर्तमान शैक्षणिक वर्ष से ही कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीसरी भाषा को अनिवार्य कर दिया है।

अन्नामलाई ने क्या कहा?

X पर एक पोस्ट में अन्नामलाई ने कहा कि सीबीएसई की अचानक घोषणा से अभिभावकों, विशेषकर तमिलनाडु के छात्रों के अभिभावकों को गहरा सदमा लगा है। उन्होंने कहा, “अप्रैल 2026 में जब सीबीएसई बोर्ड ने घोषणा की कि कक्षा 6 से आगे के छात्रों के लिए तीन भाषाएं अनिवार्य होंगी और उनमें से दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए, तो मैंने भी इस निर्णय का स्वागत किया था, क्योंकि इससे बच्चों को कम उम्र से ही भारत की विविध साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को समझने में मदद मिलेगी। अप्रैल 2026 में जारी अधिसूचना में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि कक्षा 9 के सीबीएसई छात्रों के लिए तीसरी भाषा को अनिवार्य बनाना तीन साल बाद, 2029-30 शैक्षणिक वर्ष से ही लागू किया जाएगा।”

अन्नामलाई ने कहा, “इसके जरिए सीबीएसई बोर्ड ने अपने पहले के उस घोषणा का खंडन किया है जिसमें उसने कहा था कि यह नियम 2029-30 शैक्षणिक वर्ष से ही लागू होगा। सीबीएसई की इस अचानक घोषणा से अभिभावकों, विशेषकर तमिलनाडु के छात्रों के अभिभावकों को गहरा सदमा लगा है। इसका कारण यह है कि उनके बच्चों ने कक्षा 6 में ही अपनी पसंद की भाषा चुन ली थी, लेकिन नई अधिसूचना के अनुसार, कक्षा 9 के छात्रों को अब अनिवार्य रूप से तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए और यह नियम 1 जुलाई, 2026 से ही लागू हो जाएगा।”

‘बच्चों के लिए अनावश्यक मानसिक तनाव पैदा करेगा’

अन्नामलाई ने आगे कहा कि छात्रों से इतने कम समय में एक नई भाषा सीखने की अपेक्षा करना बच्चों के लिए अनावश्यक मानसिक तनाव पैदा करेगा और उनके शैक्षणिक प्रदर्शन को भी प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा, “इसलिए मैं केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से अनुरोध करता हूं कि वह इस नई अधिसूचना को तुरंत वापस ले और कक्षा 9 में तीन भाषाओं को अनिवार्य बनाने की योजना को, जिसमें दो भारतीय भाषाएं शामिल हों, तीन साल बाद, 2029-30 शैक्षणिक वर्ष से ही लागू करे, जैसा कि मूल रूप से घोषित किया गया था।”

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीआई) के हालिया आदेश ने माध्यमिक स्तर पर तीसरी भाषा को अनिवार्य कर दिया है, जिससे अभिभावकों, छात्रों और विद्यालय प्रशासकों में चिंता पैदा हो गई है। विशेष रूप से सत्र के बीच में इसके लागू होने और उन छात्रों पर इसके प्रभाव को लेकर चिंता है जो विदेशी भाषा को अपनी दूसरी भाषा के रूप में पढ़ रहे हैं। संशोधित नीति के अनुसार छात्रों को माध्यमिक स्तर पर तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए, जिनमें हिंदी और संस्कृत जैसे विकल्प शामिल हैं। परिवारों का कहना है कि इस बदलाव से पाठ्यक्रम का बोझ बढ़ जाता है और कई बच्चों को वर्षों तक विदेशी भाषा सीखने के बाद अपना पाठ्यक्रम बदलना पड़ता है।

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