Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु की राजनीति में बीजेपी को बड़ा झटका लगने के संकेत मिल रहे हैं। कई वरिष्ठ सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया है कि राज्य में पार्टी के प्रमुख चेहरे के. अन्नामलाई ने बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने वाले हैं। इस बात की जानकारी वे दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को भी देने वाले हैं।

के. अन्नामलाई सोमवार की रात दिल्ली पहुंचेंगे। वे मंगलवार को बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात करेंगे, जिसके बाद औपचारिक तौर पर अपने पार्टी छोड़ने का ऐलान करेंगे। बीजेपी के विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि उन्होंने अपना मन बना लिया है और दिल्ली की यह यात्रा केवल एक राजनीतिक बैठक नहीं बल्कि उस पार्टी के प्रति आभार व्यक्त करने का भी एक तरीका है जिसके साथ उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन के पिछले छह साल बिताए हैं।

अन्नामलाई करेंगे बड़ा उलटफेर

इस पूरे घटनाक्रम से परिचित एक व्यक्ति ने बताया, “वह आईपीएस से इस्तीफा देने के बाद बीजेपी द्वारा दिए गए राजनीतिक अवसरों, अनुभवों और राजनीतिक यात्रा के लिए नेतृत्व को धन्यवाद देना चाहते हैं।” अगर के. अन्नामलाई औपचारिक तौर पर बीजेपी छोड़ देते हैं, तो तमिलनाडु की सियासत में अभिनेता से राजनेता बने सी जोसेफ विजय की चुनावी जीत के बाद यह एक बड़ा सियासी उलटफेर होगा।

लंबे समय से जारी हैं अटकलें

कई हफ्तों से अन्नामलाई के भविष्य को लेकर अटकलें चेन्नई और दिल्ली दोनों जगह राजनीतिक चर्चाओं पर हावी थीं । राष्ट्रीय टेलीविजन चैनलों पर बहस चल रही थी कि क्या वे कोई नया राजनीतिक दल बनाने की तैयारी कर रहे हैं, और सोशल मीडिया पर हर दिन तरह-तरह के थ्योरी चल रही थीं। हालांकि, अफवाहें बढ़ती जा रही थीं, अन्नामलाई ने आमतौर पर इन अटकलों को शांत करने के लिए दिए जाने वाले स्पष्ट खंडन से परहेज किया।

बीजेपी के अंदरूनी हलकों में पहले चर्चा ये थी कि क्या अन्नामलाई नाराज हैं, या नहीं। वहीं अब चर्चा ये हैं कि आखिर वे चाहते क्या हैं? पार्टी के आंतरिक मामलों से परिचित कई नेताओं ने बताया कि अन्नामलाई ने पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व को जो संदेश दिया था, वह संक्षेप में दो विकल्पों तक सीमित हो गया था। इसमें एक ये कि या तो उन्हें ऐसा पद दिया जाए कि जहां वे कम से कम सात वर्षों के लिए दीर्घकालिक स्वायत्तता और अधिकार के साथ तमिलनाडु में बीजेपी को लीड करें। इसके अलावा या तो उन्हें अलग राजनीतिक मार्ग अपनाने की अनुमति दी जाए।

पिछले 5 साल से अन्नामलाई को तमिलनाडु में बीजेपी का भविष्य माना जा रहा था। उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा से इस्तीफा दिया, अपेक्षाकृत कम उम्र में राजनीति में प्रवेश किया और जल्दी ही पार्टी के सबसे प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे। आलोचकों ने भी उनकी ऊर्जा, संगठनात्मक क्षमता और राजनीतिक चर्चाओं पर हावी होने की काबिलियत को स्वीकार किया। फिर भी उनकी राजनीतिक पहचान अक्सर बीजेपी के पारंपरिक ढांचे में सहज रूप से फिट नहीं बैठती थी।

अन्नामलाई का हिंदुत्व

अन्नामलाई ने शायद ही कभी खुले तौर पर सांप्रदायिक बयानबाजी के इर्द-गिर्द अपनी राजनीति गढ़ी हो। उनके भाषण अक्सर तमिल पहचान, शासन, भ्रष्टाचार, विकास और प्रशासनिक सुधार जैसे विषयों पर आधारित होते थे। ऐसा लगता था मानो वे बीजेपी के ऐसे स्वरूप की तलाश में थे जो स्पष्ट रूप से तमिल राजनीतिक भाषा में बात कर सके।

कई पर्यवेक्षक उनके दृष्टिकोण को शास्त्रीय हिंदुत्व की तुलना में महत्वाकांक्षी द्रविड़ राजनीति के अधिक निकट बताते हैं। यह अंतर आज के समय में महत्वपूर्ण है। समर्थकों का तर्क है कि अन्नामलाई की असली प्रेरणा कभी भी वैचारिक शुद्धता नहीं बल्कि राजनीतिक सक्रियता रही है। उनका कहना है कि वे किसी सिद्धांत का बचाव करने में कम और कुछ नया बनाने के लिए पर्याप्त अवसर प्राप्त करने में अधिक रुचि रखते हैं।

दिल्ली की बीजेपी ने राज्य को गलत आंका

इसके बाद राज्य की सियासत में विजय का आगमन हुआ। टीवीके नेता की व्यापक जीत ने राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया। नए विकल्प की तलाश कर रहे कई मतदाताओं के लिए विजय उन आकांक्षाओं का प्रतीक बन गए जिन्हें अन्नामलाई कभी साकार करना चाहते थे। तमिलनाडु के एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने निजी तौर पर तर्क दिया कि दिल्ली ने चुनाव के दौरान तमिलनाडु को गलत समझा। उनका कहना है कि अगर अन्नामलाई को अधिक स्वायत्तता और प्रमुखता दी गई होती, तो विजय राज्य में राजनीतिक परिवर्तन का निर्विवाद प्रतीक नहीं बन पाते।

अन्नामलाई की दिखी लोकप्रियता

चुनाव से पहले दरकिनार किए जाने और एक ऐसे गठबंधन ढांचे में धकेल दिए जाने के बावजूद अन्नामलाई एनडीए के सबसे लोकप्रिय प्रचारकों में से एक बने रहे। भीड़ जुटाने के मामले में शायद एआईएडीएमके नेता एडप्पाडी के पलानीस्वामी के बाद दूसरे स्थान पर रहे। इससे अन्नामलाई समर्थकों के बीच यह तर्क और मजबूत हो गया है कि उनका व्यक्तिगत राजनीतिक महत्व तमिलनाडु में भाजपा की संगठनात्मक शक्ति से कहीं अधिक है।

सवाल यह भी है कि क्या वे नई पार्टी बनाएंगे, तो बता दें कि एक नई पार्टी शुरू करना जोखिम रहित नहीं होगा। जब अन्नामलाई द्वारा एक नई राजनीतिक पार्टी शुरू करने की अटकलों के बारे में पूछा गया, तो तमिलनाडु में आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने खुद एक सवाल के साथ जवाब दिया,”क्या उनके पास 1,000 करोड़ रुपये हैं? कम से कम 500 करोड़ रुपये? अगर हैं, तो वे इसके बारे में सोच सकते हैं।” विजय के उदय ने विपक्ष के परिदृश्य को मौलिक रूप से बदल दिया है। अन्नामलाई के नेतृत्व में कोई भी नया गठबंधन एक ऐसे प्रतिस्पर्धी मैदान में उतरेगा जहां टीवीके पहले से ही सत्ता-विरोधी खेमे में काफी हद तक अपनी जगह बना चुका है।

फिर भी अगर वे कभी स्वतंत्र मंच शुरू करने का फैसला करते हैं, तो इसकी शुरुआत अधिकांश क्षेत्रीय स्टार्टअप्स से कहीं अधिक मजबूत स्थिति से होगी। यह तुरंत पीएमके, डीएमडीके, वीसीके और सभी वामपंथी दलों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकता है, जबकि पश्चिमी तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में, विशेष रूप से ओबीसी-गौंडर मतदाताओं के बीच, एआईएडीएमके को चुनौती दे सकता है, जिस समुदाय से अन्नामलाई स्वयं आते हैं।

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तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष के अन्नामलाई ने मंगलवार को केंद्र सरकार से मौजूदा शैक्षणिक वर्ष में तीन-भाषा नीति लागू करने के अपने फैसले को वापस लेने का आग्रह किया। उन्होंने सीबीएसई से तीन साल बाद इस नीति को जरूरी बनाने को कहा, जैसा कि पहले ही घोषणा की गई थी। सीबीएसई ने 15 मई 2026 को सभी विद्यालयों को एक नया सर्कुलर भेजा था। इसमें बोर्ड ने वर्तमान शैक्षणिक वर्ष से ही कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीसरी भाषा को अनिवार्य कर दिया है। पढ़िए पूरी खबर…