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अण्णा ने पूछा: ‘अच्छे दिन कहां आए’

केंद्र की भाजपानीत सरकार के कामकाज से असंतुष्ट अण्णा हजारे ने दो टूक शब्दों में पूछा है कि अच्छे दिन कहां आए हैं? उन्होंने कहा कि केंद्र में सरकार बदलने के बाद लगा था कि बदलाव आएगा। सरकार को काम करने के लिए समय दिया जाना जरूरी था। हमने केंद्र सरकार को इसके लिए समय […]

Author January 30, 2015 9:34 AM
अण्णा हजारे ने दो टूक शब्दों में पूछा है कि अच्छे दिन कहां आए हैं?

केंद्र की भाजपानीत सरकार के कामकाज से असंतुष्ट अण्णा हजारे ने दो टूक शब्दों में पूछा है कि अच्छे दिन कहां आए हैं? उन्होंने कहा कि केंद्र में सरकार बदलने के बाद लगा था कि बदलाव आएगा। सरकार को काम करने के लिए समय दिया जाना जरूरी था। हमने केंद्र सरकार को इसके लिए समय दिया। मगर सरकार ने भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने के मामले में निराश किया है। अण्णा ने कहा कि आने वाले 15 दिनों में दिल्ली में होने वाली बैठक में वह अपने आंदोलन का विषय, उसकी रूपरेखा और स्थान तय करेंगे।

रालेगणसिद्धि में बुधवार पत्रकारों और टीवी चैनलों से बातचीत के दौरान अण्णा हजारे ने केंद्र की मोदी सरकार के कामकाज से असंतोष जताया। अण्णा ने मोदी सरकार के कामकाज को लेकर कहा कि सशक्त लोकपाल बनाने, भ्रष्टाचार हटाने, विदेश से काला पैसा वापस लाने और किसानों के हित के कानून बनाने को लेकर सरकार गंभीर नजर नहीं आती है।

अण्णा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को इन कामों के लिए उन्होंने दो बार याद दिलाई, उन्हें समय दिया गया मगर सरकार ने लोगों को निराश किया इसलिए लोकपाल सहित अन्य सामाजिक मुद्दों को लेकर एक बार फिर से आंदोलन करना पड़ेगा। अण्णा ने सरकार को उसके आश्वासन याद दिलाए। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार ने चुनाव के दौरान कई आश्वासन दिए थे। ऐसा लग रहा था कि सरकार ठोस काम करेगी और जनहित के निर्णय लेगी। इसलिए सरकार को काम करने के लिए समय दिया गया और इस दौरान कोई आंदोलन नहीं चलाया गया। पिछली कांग्रेस सरकार ने जनता के साथ धोखा किया था, इसलिए जनता बदलाव चाहती थी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार से जनता को बहुत उम्मीदें थीं कि वह भ्रष्टाचार हटाएगी।

अण्णा ने पत्रकारों को बताया कि सरकार के कामकाज को देख कर ऐसा नहीं लग रहा है कि यह सरकार भ्रष्टाचार हटाने को लेकर गंभीर है। प्रचार के दौरान भाजपा ने कहा था कि विदेश में जमा काला धन देश में लाएगी जिससे सभी के खाते में 15 लाख रुपए जमा किए जा सकेंगे। मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ है। अण्णा ने पत्रकारों से कहा कि सरकार ने लोकपाल को लेकर कोई भूमिका तय नहीं की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का अब तक का कामकाज संतोषजनक नहीं है। सरकार ने जो भूमि अधिग्रहण कानून बनाया है, वह भी किसानों के हित में नहीं है।

अण्णा ने पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए कहा कि पखवाड़े भर में वह दिल्ली में देश भर के प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक में ही तय किया जाएगा कि आंदोलन का विषय क्या होगा। उसका स्वरूप कैसा रहेगा और वह कहां किया जाएगा। अण्णा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी का रास्ता अलग हो चुका है। इसलिए वह उनके बारे में कुछ नहीं बोलेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार से निराश होने के कारण जनता मेरे साथ है और मेरी लड़ाई जनता के लिए है।

 

 

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