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मानहानि का मुकदमा वापस लेंगे अनिल अंबानी

लोकसभा चुनाव में और उससे पहले भी इस मामले को कांग्रेस ने काफी जोरशोर से उठाया था। नेशनल हेरल्ड के वकील पीएस चंपानेरी के मुताबिक, मुकदमे को वापस लेने की औपचारिक प्रक्रिया अदालत की गर्मी की छुट्टियां समाप्त होने के बाद शुरू होंगी।

Author May 22, 2019 3:21 AM
रिलायंस समूह के प्रमुख अनिल अंबानी। (Photo: ANI)

लोकसभा चुनाव खत्म होते ही उद्योगपति अनिल अंबानी ने रफाल सौदे पर एक लेख को लेकर कांग्रेस नेताओं और नेशनल हेराल्ड अखबार के खिलाफ दायर मानहानि के मुकदमे को वापस लेने का फैसला किया है। रिलायंस ग्रुप के वकील राशेष पारिख के मुताबिक, रिलायंस समूह के फैसले के बाबत नेशनल हेराल्ड को जानकारी दे दी गई है। नेशनल हेराल्ड के वकील पीएस चंपानेरी के मुताबिक, उन्हें रिलायंस समूह के वकील ने सूचना दी है कि वे केस वापस ले रहे हैं।

मानहानि का मुकदमा 5000 करोड़ का है और अमदाबाद की अदालत में दर्ज है। इस मुकदमे की सुनवाई सिटी सिविल सेशन जज पीजे तमकुवाला की अदालत में हो रही थी। जिन कांग्रेसी नेताओं के खिलाफ यह मुकदमा था उनमें सुनील जाखड़, रणदीप सिंह सुरजेवाला, ओमान चंडी, अशोक चव्हाण, अभिषेक मनु सिंघवी, संजय निरूपम और शक्तिसिंह गोहिल शामिल हैं। अब इस केस की अगली सुनवाई अदालत की गर्मियों की छुट्टी खत्म होने के बाद होगी।

लोकसभा चुनाव में और उससे पहले भी इस मामले को कांग्रेस ने काफी जोरशोर से उठाया था। नेशनल हेरल्ड के वकील पीएस चंपानेरी के मुताबिक, मुकदमे को वापस लेने की औपचारिक प्रक्रिया अदालत की गर्मी की छुट्टियां समाप्त होने के बाद शुरू होंगी। नेशनल हेरल्ड ने रफाल विमान सौदे को लेकर एक लेख छापा था। इसे विश्वदीपक नाम के पत्रकार ने लिखा था। रिलायंस डिफेंस, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस एअरोस्ट्रक्चर ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड, नेशनल हेराल्ड के प्रकाशक, संपादक जफर आगा और लेख के लेखक विश्वदीपक के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था। यह मुकदमा उनपर पिछले साल 26 अगस्त को दर्ज किया गया था।

रिलायंस ने अदालत में अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि छपा लेख झूठ और अपमानजनक है। यह लेख जनता को गुमराह करने वाला है। याचिका में कहा गया था कि ये लेख रिलायंस समूह की नकारात्मक छवि पेश करती है और अनिल अंबानी की छवि को नुकसान पहुंचाती है। इससे उनकी गुडविल को नुकसान पहुंचा है और उनकी प्रतिष्ठा धूमिल हुई है। इसकी भरपाई के लिए 5000 करोड़ रुपए का हर्जाना दिलाया जाए।

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