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ऑडिटर ने दिया इस्तीफा, कहा- अनिल अंबानी की दो कंपनियों के खातों में गड़बड़, बताने पर भी ठोस कार्रवाई नहीं

रिलायंस कैपिटल ने ऑडिटर के उस दावे को भी नकार दिया, जिसमें ऑडिटर ने कथित गड़बड़ियों पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने को अपनी जिम्मेदारी से हटने की वजह बताया था।

Author नई दिल्ली | June 13, 2019 2:46 PM
अनिल अंबानी के नेतृत्व वाला रिलायंस ग्रुप PwC के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी कर सकता है। (FILE PIC)

अनिल अंबानी की कंपनियों रिलायंस कैपिटल (RCap) और रिलायंस होम फाइनेंस के ऑडिटर की जिम्मेदारी निभाने वाली प्राइसवाटरहाउस एंड कंपनी (PwC) ने खुद को अब इस जिम्मेदारी से हटा लिया  है। प्राइसवाटरहाउस एंड कंपनी ने इसकी जानकारी मिनिस्टरी ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स को भी दे दी है। इकॉनोमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्राइसवाटरहाउस एंड कंपनी ने कथित तौर पर बताया है कि रिलायंस कैपिटल और रिलायंस होम फाइनेंस के खातों में कुछ गड़बड़ियां हैं, जिसमें दोनों फर्मों और रिलायंस ग्रुप की अन्य कंपनियों के बीच हुआ लेन-देन पर सवाल उठ रहे हैं। प्राइसवाटरहाउस एंड कंपनी का कहना है कि उन्होंने दोनों कंपनियों को खातों की इन गड़बड़ियों को सुधारने का निर्देश दिया था, लेकिन उस दिशा में कुछ खास प्रगति नहीं हुई। जिसके चलते ही प्राइसवाटरहाउस एंड कंपनी ने ऑडिटर का पद छोड़ने का फैसला किया।

प्राइसवाटरहाउस एंड कंपनी ने बीती 11 जून को खुद को रिलायंस ग्रुप की इन कंपनियों से दूर कर लिया। बुधवार को अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस कैपिटल ने स्टॉक एक्सचेंज को इसकी जानकारी दी। रिलायंस कैपिटल ने ऑडिटर के उस दावे को भी नकार दिया, जिसमें ऑडिटर ने कथित गड़बड़ियों पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने को अपने फैसले की वजह बताया था। रिलायंस कैपिटल ने कहा कि PwC ने जिम्मेदारी से हटने के लिए जो वजह बतायी है, वह उससे सहमत नहीं हैं। कंपनी ने दावा किया कि PwC द्वारा जो भी जानकारी मांगी थी वह सब उसे दी गई, जिसमें प्रमाण पत्र देना और सभी लेन-देन की पुष्टि करना शामिल है।

वहीं PwC का इस मामले में कहना है कि उसके द्वारा 24 अप्रैल, 2019 को कंपनी एक्ट के तहत एक पत्र भेजा गया था, जिस पर कंपनी ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इसके बाद PwC द्वारा 14 मई, 2019 को फिर से पिछले पत्र के संबंध में एक नया पत्र भेजा, लेकिन कंपनी ने तय समय में ऑडिट कमेटी की बैठक का भी आयोजन नहीं किया। PwC का कहना है कि कंपनी उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी कर सकती थी। पीडब्लूसी के अनुसार, ऐसे हालात उनकी फर्म को अपने कर्तव्यों का ठीक तरह से निर्वहन करने से रोक रहे थे। जिसके चलते कंपनी ने खुद को ऑडिटर की जिम्मेदारी से हटा लिया।

PwC के इस दावे पर रिलायंस का कहना है कि कंपनी ने ऑडिटर के पत्रों और संशयों पर अपना जवाब दिया था। साथ ही कंपनी ने 14 मई, 2019 के पत्र के जवाब में 12 जून, 2019 को ऑडिट कमेटी की बैठक भी बुलायी थी। रिलायंस ने ये भी कहा कि कंपनी उम्मीद करती है कि PwC ऑडिट कमेटी की बैठक में शामिल होगी और अपने पद से इस्तीफा नहीं देगी। वहीं कानूनी कार्रवाई की बात करें तो कंपनी ने साफ कहा है कि वह कानूनी सलाह पर ही कोई कार्रवाई करेगी और यदि जरुरी हुआ तो शेयरधारकों के हित को ध्यान में रखते हुए ही कोई फैसला किया जाएगा।

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