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अनिल अंबानी : ऐसे नीलामी तक पहुंच गई रिलायंस कम्यूनिकेशंस, बड़े भाई मुकेश का भी रहा बड़ा हाथ

अनिल अंबानी के नेतृत्व में ग्रुप की कंपनियों की मार्केट वैल्यू पिछले 1 साल के दौरान 68% तक गिर चुकी है। एक अनुमान के मुताबिक ग्रुप पर करीब 47,000 करोड़ रुपए का कर्ज है।

अनिल अंबानी मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के बाहर। (PTI Photo)

रिलायंस ग्रुप का जब बंटवारा हुआ था, उस वक्त पेट्रोलियम और गैस का बिजनेस बड़े भाई मुकेश अंबानी के हिस्से में गया था, वहीं भविष्य का फील्ड माने जाने वाला टेलीकॉम बिजनेस छोटे भाई अनिल अंबानी के खाते में गया था। अब बंटवारे के लगभग 15 साल बाद मुकेश अंबानी जहां ना सिर्फ भारत ब्लकि एशिया के टॉप अमीर बन चुके हैं, वहीं उनके छोटे भाई अनिल अंबानी अर्श से फर्श पर आ चुके हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के अनुसार, अनिल अंबानी के नेतृत्व में ग्रुप की कंपनियों की मार्केट वैल्यू पिछले 1 साल के दौरान 68% तक गिर चुकी है। एक अनुमान के मुताबिक ग्रुप पर करीब 47,000 करोड़ रुपए का कर्ज है। माना जा रहा है कि अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस कम्यूनिकेशंस जल्द ही दिवालिया हो सकती है। कई देनदार अपने कर्ज के लिए अनिल अंबानी के खिलाफ कोर्ट का रुख कर चुके हैं। मुश्किलों से निकलने के लिए अनिल अंबानी की निगाहें रक्षा क्षेत्र की कंपनी रिलायंस डिफेंस पर टिकी थीं, लेकिन राजनैतिक कारणों से यहां भी उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

ये रहे असफलता के कारणः अनिल अंबानी खुद भी टेलीकॉम सेक्टर की सफलता को लेकर आशान्वित थे और यही वजह थी कि उन्होंने इस सेक्टर में खूब निवेश भी किया। लेकिन दिनों-दिन बढ़ते निवेश और दूसरी तरफ टेलीकॉम सेक्टर की गला-काट प्रतिस्पर्धा के माहौल में अनिल अंबानी कदमताल नहीं बनाकर रख सके और उनकी कंपनी कर्ज के बोझ तले डूबती चली गई।

भारी निवेश ने बिगाड़े हालातः टेलीकॉम सेक्टर को भविष्य में सफलता का फील्ड माना जाता है। लेकिन इस फील्ड में मौजूदा समय में खासकर भारत में भारी निवेश की जरुरत है। यही वजह रही कि अनिल अंबानी ने टेलीकॉम सेक्टर में भारी निवेश किया। भारत में 2जी वॉइस सेवाओं से 3जी और 4जी में शिफ्ट करने के लिए रिलायंस कम्यूनिकेशंस ने समुद्र के नीचे केबल बिछाने और स्पेक्ट्रम खरीदने में खासा निवेश किया। इसका नतीजा ये रहा अनिल अंबानी पर काफी कर्ज हो गया। जिससे अनिल अंबानी अभी तक नहीं उबर सके हैं।

प्रतिस्पर्धा से लगा झटकाः भारतीय बाजार में इस समय टेलीकॉम सेक्टर में भारी प्रतिस्पर्धा है। ग्राहकों को अपने साथ जोड़ने के लिए कंपनियां कई तरह की स्कीम और सुविधाएं दे रहीं हैं। वहीं कर्ज के बोझ तले दबी रिलायंस कम्यूनिकेशंस के लिए इस प्रतिस्पर्धा के माहौल में अपने आप को बचाए रखना काफी मुश्किल हो गया।

बड़े भाई से प्रतिस्पर्धा में पिछड़ेः अनिल अंबानी को अपने बड़े भाई मुकेश अंबानी की आक्रामक बिजनेस नीतियों के कारण भी नुकसान उठाना पड़ा। दरअसल साल 2016 में मुकेश अंबानी ने रिलायंस जियो के साथ टेलीकॉम सेक्टर में धमाकेदार एंट्री की और एक ही झटके में भारत के टेलीकॉम सेक्टर पर अपना प्रभाव जमा लिया। रिलायंस जियो की इस आक्रामक बिजनेस नीति से बड़ी-बड़ी टेलीकॉम कंपनियां परेशान हो गईं। ऐसे में निवेश की कमी और कर्ज के बोझ तले दबी अनिल अंबानी की रिलायंस कम्यूनिकेशंस के लिए इसका सामना करना काफी मुश्किल हो गया।

अनिल अंबानी को मुश्किल हालात में रिलायंस जियो के साथ हुई स्पेक्ट्रम डील से भी काफी उम्मीदें थीं। लेकिन यह डील भी नहीं हो सकी। मंगलवार को अनिल अंबानी ने सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार किया कि उनकी यह अहम डील अटक गई है। दरअसल 23000 रुपए की इस डील से अनिल अंबानी को काफी उम्मीदें थीं।

खराब डील्स ने बढ़ायी परेशानीः अनिल अंबानी की असफलता में उनके द्वारा की गई कई डील्स का फेल होना भी एक कारण रहा। इन फेल डील्स में साल 2010 में रिलायंस कम्यूनिकेशंस और GTL Infra के साथ होने वाली 50,000 करोड़ की डील भी शामिल है। इसके अलावा साल 2017 में Aircel का मर्जर करने वाली डील भी कानूनी कारणों से सफल नहीं हो सकी थी। रिलायंस जियो और रिलायंस कम्यूनिकेशंस के बीच होने वाली स्पेक्ट्रम डील को भी इसमें शामिल किया जा सकता है।

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