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महिला आयोग बलात्कारियों को नपुंसक बनाने के पक्ष में

आंध्रप्रदेश एवं तेलंगाना महिला आयोग ने मद्रास हाई कोर्ट के बलात्कारियों को नपुंसक बनाए जाने के सुझाव का स्वागत करते हुए कहा कि बलात्कारियों के सिलसिले में सबसे अच्छा हल है।

Author हैदराबाद | October 29, 2015 1:36 AM
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा, बच्चों से रेप करने वालों को बना दो नपुंसक

मद्रास हाई कोर्ट के हाल के इस सुझाव का स्वागत करते हुए कि बच्चों से बलात्कार करने वालों को नपुंसक बना दिए जाने को सजा का एक अतिरिक्त तरीका समझा जाना चाहिए, का स्वागत करते हुए राज्य (आंध्रप्रदेश एवं तेलंगाना) महिला आयोग ने बुधवार को कहा कि ‘यह बलात्कारियों के सिलसिले में सबसे अच्छा हल है।’

आयोग की अध्यक्ष त्रिपूर्णा वेंकटरत्नम ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘मैं बहुत खुश हूं कि मद्रास हाई कोर्ट के विद्वान न्यायाधीशों में से एक ने कहा है कि नपुंसक बना दिया जाना नाबालिग लड़कियों से बलात्कार करने वालों के मामले में सबसे अच्छा हल है। मैंने अभी क्या, करीब पंद्रह साल पहले ही बैठकों में यह राय व्यक्त की थी।’

उन्होंने कहा, ‘कुछ लोग (ऐसे अपराधों के अपराधियों के लिए) मानवाधिकार जैसी बातें कहते हैं लेकिन महिलाओं और नाबालिगों के भी मानवाधिकार हैं। इस प्रकार के तरीके प्रतिरोधक दंड है। इसलिए नपुंसक बना दिया जाना बलात्कारियों के संदर्भ में सबसे अच्छा हल है।’

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह सरकार द्वारा नपुंसक बनाने को सजा के अतिरिक्त उपाय के रूप में मान्यता मिलने के प्रति आशान्वित हैं तो उन्होंने कहा, ‘मुझे शक है। चूंकि आप जानते हैं कि ये मानवाधिकारवादी कार्यकर्ता ‘नहीं’ कहते हैं और हम जैसे लोग हां कहते हैं। इसलिए हमेशा संघर्ष होगा। देखिए और इंतजार कीजिए।’

मद्रास हाई कोर्ट के न्यायाधीश एन किर्बूकरण ने हाल ही एक आदेश में कहा था कि बच्चों से बलात्कार करने वालों को नपुंसक बनाने की सजा का इस अपराध को रोकने की दिशा में चमत्कारिक असर होगा। अदालत का कहना था कि पूरे भारत में बच्चों के साथ सामूहिक बलात्कार होने की खबरें आ रही हैं।

अदालत ने हाल ही में एक ब्रिटिश नागरिक की याचिका को खारिज करते हुए यह व्यवस्था दी जिसने अपने खिलाफ निचली अदालत में चल रही यौन उत्पीड़न मामले में कार्रवाई रद्द करने की मांग की थी। तब न्यायाधीश ने कहा था ‘बंध्याकरण का सुझाव क्रूर लग सकता है लेकिन क्रूर अपराधियों के लिए क्रूर सजा की जरूरत है। सजा का विचार अपराधियों को अपराध करने से रोकने का होना चाहिए।’

न्यायाधीश ने कहा ‘मानवाधिकार उल्लंघनों की आड़ में कुछ कार्यकर्ता पहले पीड़ितों के प्रति सहानुभूति जताते हैं और बाद में अपराधी का भी समर्थन करते हैं। वे गलत जगह पर सहानुभूति दर्शाते हैं।

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