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डिबेट में कांग्रेस प्रवक्ता पर गर्म हो गए एंकर, कहा- चाय से ज्यादा केतली गर्म हो रही, सुन तो लो पहले

किसान नेता चौधरी पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि लालकिला हिंसा में हमारा कोई भी व्यक्ति शामिल नहीं था। भाजपा ने अपने लोगों को भेज कर ही तोड़ फोड़ करवाया।

Farmers Protest, BJP, rakesh tikaitकेंद्र सरकार के द्वारा लाए गए तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शनस्थल पर बैठे आंदोलनकारी। (फोटोः PTI)

पिछले 100 दिनों से देशभर से आए किसान दिल्ली से सटे सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच 12 दौर से ज्यादा की बातचीत होने पर भी कोई समाधान नहीं निकल पाया है। इसी मुद्दे पर टीवी डिबेट के दौरान एंकर पैनल में मौजूद किसान नेता से कुछ सवाल पूछ रहे थे लेकिन कांग्रेस प्रवक्ता ने बीच में ही बोलने का इशारा कर दिया। जिसपर एंकर बोल उठे कि चाय से ज्यादा केतली गर्म हो रही, इसलिए पहले सुन तो लीजिए।  

दरअसल आज तक चैनल पर एक कार्यक्रम के दौरान किसान नेता चौधरी पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि लालकिला हिंसा में हमारा कोई भी व्यक्ति शामिल नहीं था। भाजपा ने अपने लोगों को भेज कर ही तोड़ फोड़ करवाई। इसपर एंकर रोहित सरदाना ने कहा कि आप इस बात से पल्ला नहीं झाड़ सकते हैं। लालकिले पर जाने का बयान आपके नेताओं ने ही दिया था इसलिए आप अपना पीछा नहीं छुड़ा सकते हैं। रोहित सरदाना के इतना बोलते ही डिबेट में मौजूद कांग्रेस प्रवक्ता अभय दुबे ने बोलने का इशारा करते हुए अपने हाथ खड़े कर दिए। 

इसपर रोहित सरदाना ने कहा कि अभय दुबे जी, चाय से ज्यादा तो केतली गर्म हो रही है। किसान नेता बोल रहे हैं लेकिन आपको चिंता हो रही है कि पहले मैं बोल लूं। उनको सुन तो लीजिए। हालांकि पुष्पेंद्र सिंह ने भी रोहित सरदाना की बात का समर्थन करते कहा कि अभय जी ऐसे मत कीजिए। तरीके से ही अपनी बात रखिए। आगे पुष्पेंद्र सिंह ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह निष्ठुर सरकार है, यह असंवेदनशील सरकार है, 250 से ज्यादा किसान मर चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। डेढ़ महीने से कोई वार्ता भी नहीं हुई है। 

इसके अलावा पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने डेढ़ साल तक कानून पर रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है। इसका मतलब है कि दोबारा से कानून को लागू किया जा सकता है। इसलिए जब तक हम इन तीनों कानूनों को वापस नहीं करवा लेते हैं तब तक हम यहां से नहीं हटेंगे। साथ ही पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने के अलावा किसानों को एमएसपी की क़ानूनी गारंटी भी चाहिए।

बता दूं किसान आंदोलन के 100 दिन पूरे होने पर किसान संगठनों ने शनिवार को केएमपी एक्सप्रेसवे को बंद करवा दिया था। किसान संगठनों ने शाम सात बजे तक एक्सप्रेसवे को बंद करने का आह्वान किया था।

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