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कभी टिकरी बॉर्डर गए हो? डिबेट में एंकर ने भाजपा प्रवक्ता से पूछा, जवाब ना दे पाए सुधांशु त्रिवेदी

सुधांशु ने कहा कि सरकार अपनी तरफ से जो भी अधिकतम कर सकती है वह करने को तैयार है। सरकार ने किसानों के सामने इन कानूनों को डेढ़ साल तक रोकने का प्रस्ताव भी रखा है।

farmer protest. farm laws , singhu borderदिल्ली के सिंघु बार्डर पर किसान आंदोलन के समर्थन में नारे लगाते बुजुर्ग। (फोटो-पीटीआई)

पिछले 100 दिनों से देशभर से आए किसान केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए तीनों कृषि कानून के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलनकारी किसान तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। किसान मुख्यतः टिकरी बॉर्डर, सिंघु बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर जब एक टीवी डिबेट में एंकर ने भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी से सवाल पूछा कि क्या आप कभी टिकरी बॉर्डर गए हैं तो वे जवाब नहीं दे पाए।

दरअसल आज तक चैनल पर आयोजित एक कार्यक्रम में एंकर रोहित सरदाना ने भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी से सवाल पूछते हुए कहा कि क्या आप कभी टिकरी बॉर्डर गए हैं। इसपर सुधांशु त्रिवेदी जवाब ना दे सके और कहने लगे कि मैंने जो प्रश्न पूछे हैं वो किसी से भी पूछ लीजिए। कोई भी इस सवाल का जवाब नहीं दे सकता है। आगे जब रोहित ने पूछा कि अगर तीनों बॉर्डर पर लाखों किसान बैठे हुए हैं तो उन लोगों को घर भेजने की जिम्मेदारी किसकी है। इसके जवाब में सुधांशु ने कहा कि सरकार ने इस आंदोलन को खत्म करने के लिए कोई भी कसर नहीं छोड़ी है। 

आगे सुधांशु ने कहा कि सरकार अपनी तरफ से जो भी अधिकतम कर सकती है वह करने को तैयार है। सरकार ने किसानों के सामने इन कानूनों को डेढ़ साल तक रोकने का प्रस्ताव भी रखा है। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने तो यहां तक कह दिया है कि वे किसानों से सिर्फ एक फ़ोन कॉल की दूरी पर हैं। यहां तक कि सरकार किसान नेताओं के साथ बातचीत करने को तैयार है और उनका इंतजार भी कर रही है। लेकिन इसके बावजूद भी लोग मानने को तैयार नहीं हैं।

वहीं कार्यक्रम में मौजूद रहे किसान नेता चौधरी पुष्पेंद्र सिंह ने भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी की बात का जवाब देते हुए कहा कि आप लोगों को 303 सीटें मिलने का दंभ है। आपको हम लोगों ने वोट देकर सरकार में बिठा रखा है। आप लोग किराएदार हैं और हम मकान मालिक हैं। अगर आप हमारी बात नहीं मानेंगे तो आपके मकान को खाली करवा दिया जाएगा। 

आपको बता दूं कि किसान आंदोलन को 100 दिन पूरे हो चुके हैं। हालांकि किसानों का आंदोलन सितंबर महीने से ही पंजाब और हरियाणा के अलग अलग इलाकों में चल रहा था। किसान केंद्र सरकार के द्वारा पारित किए गए तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने के अलावा एमएसपी की भी क़ानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा किसान नेताओं ने यह ऐलान किया है कि वे लोग सभी चुनावी राज्यों में जाएंगे और लोगों से भाजपा को वोट न देने की अपील करेंगे।

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