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एंकर ने पूछा कानून काले थे तो दिल्ली में क्यों लागू किए, बोले संजय सिंह- आप बिके हो, अडानी के सामने रगड़ते हो नाक

संजय सिंह के साथ चल रहे बहस में एंकर ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान कृषि के क्षेत्र में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट करने का वादा किया था।

sanjay singh, up government, farmer protest, Aam Aadmi partyआप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह (फोटो/@AamAadmiParty)

केंद्र सरकार की तरफ से लाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं। इस बीच राजनीतिक दलों की तरफ से भी पक्ष और विपक्ष में लगातार तर्क दिए जा रहे हैं। एबीपी न्यूज के एक शो में एंकर रुबिका लियाकत और आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह के बीच गर्मागर्म बहस हो गयी। एक सवाल के जवाब में संजय सिंह ने रुबिका लियाकत को बिका हुआ बता दिया।

रुबिका लियाकत ने संजय सिंह से पूछा कि अगर कृषि कानून में इतनी कमी थी, अगर ये काला कानून था तो आपने दिल्ली में क्यों लागू कर दिया? उनके सवालों को सुनकर संजय सिंह ने कहा कि आप अडानी की गुलामी कर रही हैं। आप बिके हुए हो। संजय सिंह द्वारा गुलाम बताए जाने पर रुबिका लियाकत भड़क गयी। उन्होंने कहा कि आप जिसकी गुलामी कर रहे हैं उसपर बात कीजिए। मैं देश की गुलामी कर रही हूं। मैं सवाल पूछ रही हूं आपकी सरकार ने इस कानून को क्यों नोटिफाइ किया?

संजय सिंह के साथ चल रहे बहस में रुबिका लियाक़त ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान कृषि के क्षेत्र में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट करने का वादा किया था। उन्होंने उससे जुड़े ट्वीट भी अपने फोन में खोल कर दिखा दिया। ट्वीट में लिखा था कि पंजाब आप दे नाल खेती को और दक्ष बनाने के लिए प्राइवेट इन्वेस्टमेंट। उन्होंने सवाल किया कि ये क्या है संजय सिंह जी?

इस दौरान दोनों के ही बीच काफी गर्मागर्म बहस हो गयी। एंकर रूबिका लियाकत ने कहा कि संजय सिंह आप तमीज के दायरे में रहकर बात कीजिए। मैं चैलेंज करती हूं आपको, आप मेरे सारे अकाउंट्स खंगालिए। आपको मुझसे माफी मांगनी पड़ेगी। संजय सिंह ने कहा कि मैं गुलामों से माफी नहीं मांगूंगा। आप गुलाम हो अडानी के।

बताते चलें कि किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। पिछले लगभग 135 दिनों से किसान दिल्ली बॉर्डर पर बैठे हुए हैं। सरकार के साथ 11 दौर की वार्ता के बाद भी दोनों पक्ष के बीच कोई फैसला नहीं हो पाया। जिसके बाद से सरकार और किसानों के बीच डेडलॉक जारी है। दोनों ही पक्षों के बीच अंतिम बार वार्ता 22 जनवरी को हुई थी।

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