AMU Vice Chancellor Stand on His Comment For Girls ban Library - Jansatta
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एएमयू कुलपति अपनी टिप्पणी पर कायम, ‘गलत समझने’ वालों से खेद जताया

नई दिल्ली। हंगामे के बावजूद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) कुलपति जमीरउद्दीन शाह स्नातक छात्राओं के विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में प्रवेश को लेकर की गई अपनी विवादास्पद टिप्पणी पर आज भी कायम रहे जबकि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने मुख्य पुस्तकालय में लड़कियों को प्रवेश से रोकने वाले नियमों के बारे में उनसे और जानकारी मांगी। […]

Author November 13, 2014 1:11 AM
सामाजिक न्‍याय और सशक्तिकरण मंत्री थावरचंद गहलोत के मानव संसाधन मंत्री स्‍मृति ईरानी को लिखे खत से पता चलता है कि एचआरडी मंत्रालय ने एएमयू और जामिया से अल्‍पसंख्‍यक संस्‍थान का दर्जा हटाने के लिए कारण तैयार कर लिए हैं।

नई दिल्ली। हंगामे के बावजूद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) कुलपति जमीरउद्दीन शाह स्नातक छात्राओं के विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में प्रवेश को लेकर की गई अपनी विवादास्पद टिप्पणी पर आज भी कायम रहे जबकि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने मुख्य पुस्तकालय में लड़कियों को प्रवेश से रोकने वाले नियमों के बारे में उनसे और जानकारी मांगी।

सूत्रों ने बताया कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय को आज सुबह शाह से एक रिपोर्ट प्राप्त हुई। इसके बाद मंत्रालय ने शाह से इस बारे में विस्तृत जानकारी मांगी कि ये नियम कब बने थे और इसे विश्वविद्यालय के किस निकाय ने बनाया था।

शाह ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि नियम स्थापना के समय से ही लागू हैं जबकि स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की लड़कियों को पुस्तकें जारी करने को लेकर अबाधित पहुंच प्राप्त है।

सूत्रों ने कहा कि यद्यपि पुस्तकालय की क्षमता बढ़ाने पर आम सहमति है ताकि सभी छात्रों को समायोजित किया जा सके।

इस बीच शाह ने मीडिया पर मुद्दे को बढ़ा चढ़ाकर पेश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने जो कुछ कहा है उसका कोई और नहीं बल्कि वही ‘‘तात्पर्य’’ था और वह अपनी टिप्पणी पर कायम है।

शाह ने टेलीविजन चैनलों से कहा, ‘‘मैं अपने बयान से पीछे नहीं हटूंगा, मैं यह काफी स्पष्ट कह रहा हूं। मेरा आशय लड़कियों को अपमानित करने का नहीं था। उनके लिए आवाज उठाने वाले लोगों ने यदि मुझे गलत समझा है तो मैं उनसे खेद जताता हूं, मैं केवल इतना ही कहना चाहता हूं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं आपसे कहना चाहता हूं कि मेरी छात्राएं मुझसे मजाक करने की अपेक्षा नहीं करती। मैं उनके मामले में स्वतंत्रता नहीं लेता। मैंने जो कहा उसका तात्पर्य वही था। यदि लोगों ने मुझे गलत समझा तो मैं उनसे खेद जताता हूं।’’

शाह की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने बयान की निंदा की और इसे ‘‘बेटियों का अपमान’’ करार दिया। कुलपति ने स्पष्ट किया कि परिसर के बाहर स्थित महिला कॉलेजों में पढ़ने वाली स्नातक छात्राओं को मौलाना आजाद पुस्तकालय में प्रवेश की सुविधा नहीं है। ऐसा उसके 1960 में स्थापना के समय से ही है तथा ‘‘कोई नया प्रतिबंध नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि 24 घंटे के भीतर ऐसी पुस्तक मुहैया कराने की व्यवस्था है जो मुख्य पुस्तकालय में उपलब्ध हो और जो महिला कॉलेज पुस्तकालय में ना हो।

इस बीच एएमयू महिला कालेज छात्र संघ और एएमयू छात्र संघ ने इस मुद्दे पर ‘‘पक्षपातपूर्ण मीडिया रिपोर्टिंग’’ का आरोप लगाते हुए एक संयुक्त प्रदर्शन किया।

एएमयू महिला कॉलेज छात्र संघ की नवनिर्वाचित अध्यक्ष गुलिफ्जा खान ने कहा, ‘‘जिस तरीके से मीडिया ने मौलाना आजाद पुस्तकालय में प्रवेश की हमारी मांग को तोड़ मरोड़ कर एवं अत्यंत पक्षपातपूर्ण तरीके से पेश किया है उससे हम बहुत व्यथित हैं।’’
इस बीच राष्ट्रीय महिला आयोग ने एएमयू के कुलपति को उनकी उस टिप्पणी के लिए आड़े हाथ लिया कि पुस्तकालय में लड़कियों के प्रवेश देने से वहां अधिक लड़के आएंगे।

इस बीच शाह ने कहा कि इस घटना के बाद उनकी छवि पर कम से कम विश्वविद्यालय में ‘‘नुकसान नहीं पहुंचा है’’ क्योंकि उनके छात्रों को पता है कि वह उनकी भलाई के लिए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘यद्यपि मेरी और एएमयू की छवि को धूमिल करने के लिए मीडिया की ओर से हमले किये गए। इसे (छवि) को एमएयू में निश्चित तौर पर कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।’’

यह पूछे जाने पर कि क्या वह मानते हैं कि मीडिया ने विश्वविद्यालय और और उन्हें निशाना बनाया, उन्होंने कहा, ‘‘यह ऐसा कोई मामला नहीं था जिसे सभी समाचार चैनल दिखाते। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की आलोचना करने के मीडिया के प्रयासों से मैं भली भांति अवगत हूं। यदि ऐसी चीजें और कहीं होती हैं तो उसे नजरंदाज कर दिया जाता है। एएमयू को वह मिलता है जिसकी अपेक्षा नहीं की जाती।’’

यह पूछे जाने पर कि उनका कहने का तात्पर्य यह है कि विश्वविद्यालय को निशाना इसलिए बनाया जा रहा है क्योंकि उसके साथ ‘मुस्लिम’ शब्द जुड़ा हुआ है, उन्होंने कहा, ‘‘बिल्कुल भी नहीं। यह एक धर्मनिरपेक्ष विश्वविद्यालय है, इसे उस लिए निशाना नहीं बनाया जा रहा।’’
इस बारे में और पूछे जाने पर उन्हें क्या लगता है कि एएमयू को क्यों निशाना बनाया जा रहा है, उन्होंने कहा, ‘‘यह केवल मीडिया ही बता सकता है।’’

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