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BSP में बड़ा फेरबदल, दानिश अली दोबारा बनाए गए संसदीय दल के नेता, Article 370 पर अलग राय के कारण गिरी थी गाज

आर्टिकल 370 के तहत जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा छिनने के बाद पार्टी लाइन से अलग राय देने के कारण दानिश अली को संसदीय दल के नेता पद से हटा दिया गया था।

बीएसपी प्रमुख मायावती के साथ सांसद दानिश अली, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने अमरोहा के सांसद दानिश अली को दोबारा लोकसभा में संसदीय दल का नेता बना दिया है। यह जानकारी सूत्रों ने बुधवार (6 नवंबर) को दी। बता दें कि दानिश अली को करीब 3 महीने पहले इसी पद से बेदखल कर दिया गया था। गौरतलब है कि लोकसभा में बीएसपी के 10 सांसद हैं। दानिश अली उत्तर प्रदेश के अमरोहा संसदीय क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं। दानिश पूर्व प्रधानमंत्री व जनता दल (सेक्युलर) के नेता एचडी देवगौड़ा के सहयोगी रह चुके हैं। वह लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान मार्च में बीएसपी में शामिल हुए थे।

इस वजह से मायावती ने छीना था पद: बता दें कि संविधान के आर्टिकल 370 के तहत जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा छिनने के बाद दानिश अली की राय पार्टी लाइन से अलग थी। ऐसे में मायावती ने उन्हें लोकसभा में संसदीय दल के नेता पद से हटा दिया था। उस दौरान बीएसपी नेता सतीश मिश्रा ने राज्यसभा में मोदी सरकार का समर्थन किया था और दानिश लोकसभा में ऐसा करने से हिचक रहे थे।

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दानिश ने दिया था यह तर्क: सूत्रों के मुताबिक, उस दौरान उन्होंने पार्टी हलकों में तर्क दिया था कि बीएसपी को राज्यसभा में इस मुद्दे पर चर्चा करनी चाहिए। ऐसे में पार्टी ने फैसला किया था कि चर्चा के दौरान उन्हें सदन में नहीं भेजा जाएगा। गौरतलब है कि दानिश अली ने ट्रिपल तलाक बिल का भी विरोध किया था।

श्याम सिंह को मिली थी जिम्मेदारी: बता दें कि मायावती ने उस वक्त दानिश अली की जगह श्याम सिंह यादव को संसदीय दल का नेता बनाया था। वह जौनपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद हैं। हालांकि, बीएसपी सुप्रीमो ने अपने फैसले में एक बार फिर बदलाव करते हुए दानिश अली को संसदीय दल के नेता की जिम्मेदारी सौंप दी है।

उपचुनाव में हार के बाद लिया फैसला: जानकारी के मुताबिक, मायावती ने यूपी उपचुनाव में पार्टी की हार के बाद नेताओं की एक मीटिंग बुलाई थी। इसमें 2022 के विधानसभा चुनाव को लेकर रूपरेखा तैयार की गई। बीजेपी और एसपी पर बीएसपी के मनोबल को तोड़ने का काम करने का आरोप लगाते हुए मायावती ने कहा, ‘यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बीएसपी का विश्वास कमजोर करने के लिए बीजेपी और एसपी मिलकर काम कर रहे हैं। इन दोनों दलों ने गुप्त रूप से हाथ मिलाया और बीएसपी को उपचुनावों में एक भी सीट नहीं जीतने दी।’

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