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अमरिंदर सिंह बोले- कश्‍मीर में आतंकियों से सीज किए गए हथियार बदल रहे हैं सैनिक

अमरिंदर सिंह ने कहा कि 'हमारे समय में (यूपीए सरकार) भी कोई बड़ी डिफेंस डील नहीं हुई थी। वायुसेना नए एयरक्राफ्ट मांग रही है, नौसेना आधुनिकीकरण की मांग कर रही है। आपके पास मिसाइल नहीं है, हथियार नहीं है। आप प्रैक्टिस हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं, ये बेतुका है।

पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह ने कहा कि हमारे समय में (यूपीए सरकार) भी कोई बड़ी डिफेंस डील नहीं हुई थी। (file photo)

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक कार्यक्रम के दौरान देश की रक्षा तैयारियों की पोल खोलकर रख दी। सेना के हथियारों की दयनीय हालात पर बात करते हुए अमरिंदर सिंह ने कहा है कि सुरक्षा बल कश्मीर में आतंकियों से जब्त हथियारों को अपने हथियारों के साथ बदल रहे हैं। अमरिंदर सिंह ने कहा कि मैंने जिस रेजीमेंट को अपनी सेवाएं दी, वह अब कश्मीर में तैनात है और वह आतंकियों से जब्त हथियारों से अपने हथियार बदल रहे हैं, उन्हें लगता है कि वह बेहतर हैं। अमरिंदर सिंह ने आगे बोलते हुए कहा कि अगर एक सिपाही को अपने हथियार में ही विश्वास नहीं होगा तो वह कैसे लड़ सकता है?

पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह ने कहा कि ‘हमारे समय में (यूपीए सरकार) भी कोई बड़ी डिफेंस डील नहीं हुई थी। वायुसेना नए एयरक्राफ्ट मांग रही है, नौसेना आधुनिकीकरण की मांग कर रही है। आपके पास मिसाइल नहीं है, हथियार नहीं है। आप प्रैक्टिस हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं, ये बेतुका है।’ अमरिंदर सिंह का बयान ऐसे वक्त आया है, जब सुरक्षा बल भी बजट में रक्षा तैयारियों के लिए हुए आवंटन से खुश नहीं हैं और आधुनिकीकरण के लिए जरुरी बजट की कमी से जूझ रहे हैं।

हाल ही में वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल शरत चंद ने रक्षा बजट को ‘सेना की उम्मीदें तोड़ने वाला’ बताया था। चंद ने कहा कि फंड की कमी से मेक इन इंडिया के तहत चल रहे 25 रक्षा प्रोजेक्ट भी बीच में ही बंद हो सकते हैं। हथियारों की स्थिति पर बात करते हुए वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ ने कहा कि सेना के पास मौजूदा हथियारों में से 68 प्रतिशत विंटेज हालत के हैं, वहीं 24 प्रतिशत वर्तमान और सिर्फ 8 प्रतिशत अत्याधुनिक हैं। लेफ्टिनेंट जनरल शरत चंद ने कहा था कि सेना के आधुनिकीकरण के लिए 21,338 करोड़ रुपए आवंटित हुए है, जबकि जरुरत 29,033 करोड़ रुपए की है। आर्मी जनरल ने कहा कि रणनीतिक रुप से अहम चीन बॉर्डर समेत कई जगहों पर बन रही सड़कों का काम भी फंड की कमी से प्रभावित हो सकता है। चंद ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट के लिए करीब 900 करोड़ रुपए की कमी पड़ रही है।

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