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एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पूर्वोत्तर से अफ्सपा को वापस लेने की वकालत की

केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा पूर्वोत्तर में केंद्रीय बलों की तैनाती में कमी लाए जाने की संभावना जताने के एक दिन बाद एमनेस्टी इंटरनेशनल ने आज कहा कि उसे पूर्वोत्तर राज्यों में सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) कानून का प्रयोग करने पर पुनर्विचार करना चाहिए। एमनेस्टी इंटरनेशनल की मीडिया अधिकारी हिमांशी मत्ता ने एक बयान जारी कर कहा, […]

Author July 12, 2015 17:41 pm
एमनेस्टी के हालिया आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 में मौत की सजाएं देने के मामले में ईरान दूसरा सबसे बड़ा देश रहा है। इस क्रम में पहले स्थान पर चीन रहा है।

केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा पूर्वोत्तर में केंद्रीय बलों की तैनाती में कमी लाए जाने की संभावना जताने के एक दिन बाद एमनेस्टी इंटरनेशनल ने आज कहा कि उसे पूर्वोत्तर राज्यों में सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) कानून का प्रयोग करने पर पुनर्विचार करना चाहिए।

एमनेस्टी इंटरनेशनल की मीडिया अधिकारी हिमांशी मत्ता ने एक बयान जारी कर कहा, ‘‘11 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में केंद्रीय बलों की तैनाती में कमी किए जाने की संभावना व्यक्त की थी… (और) कहा कि क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति में सुधार आया है।’’

बयान में दावा किया गया, ‘‘चिंता की बात है कि अफ्सपा पर चर्चा नहीं हुई जो पूर्वोत्तर के कई राज्यों में लागू है।’’

एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने कहा, ‘‘यौन हमले के खिलाफ कानूनों की समीक्षा के लिए गठित न्यायमूर्ति वर्मा आयोग ने कहा था कि अफ्सपा यौन हिंसा के लिए छूट को कानूनी रूप देता है।’’

इसने कहा, ‘‘मणिपुर में फर्जी मुठभेड़ मामलों की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय की तरफ से गठित न्यायमूर्ति संतोष हेगड़े आयोग ने कानून को ‘दमन का प्रतीक’ बताया था।’’

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