वीडी सतीशन के मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह में एक भावुक दृश्य देखने को मिला। समारोह के दौरान अम्मालू अम्मा मंच पर पहुंचीं, जिससे माहौल और खास बन गया। इसी दौरान मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने अम्मालू अम्मा की मुलाकात राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से भी करवाई।
केरल में 2018 में आई भयानक बाढ़ के दौरान अपने घर खोने वाले और राहत शिविरों में रहने को मजबूर लोगों की मदद करते समय वीडी सतीशन सबसे पहले बुज़ुर्ग महिला सीता लक्ष्मी अम्मालू से मिले थे। अम्माल के लिए वो वक्त बहुत मुश्किल वाला था लेकिन सतीशन की मदद ने उनके मन में कुछ अच्छी यादें छोड़ दी।
सतीशन मेरे बेटे जैसे-अम्मालू
अम्मालू के अनुसार, सतीशन उनके बेटे जैसे नहीं हैं, बल्कि उनके बेटे ही हैं और वह बस एक बार फिर से उनके करीब रहना चाहती थीं। उनकी इच्छा पूरी हुई जब सतीशन आज उन्हें मंच पर ले गए। इससे पहले, अम्माल ने यहां सेंट्रल स्टेडियम में शपथ ग्रहण स्थल पर एक टीवी चैनल को बताया कि सतीशन उन्हें ‘अम्मालू अम्मा’ कहते हैं और वह उनसे पहली बार 2018 की बाढ़ के दौरान परावुर में एक पुनर्वास शिविर में मिली थीं।
राहुल गांधी को भी लगाया गले
अम्मालू ने कहा, ”उन्होंने मुझसे कहा कि जब तक वह जिंदा हैं, चिंता नहीं करें। उन्होंने कहा कि सभी को कपड़े, खाना, पानी और दूसरी सुविधाएं दिलाई जाएंगी। सतीशन बेटे जैसे नहीं हैं, वह मेरे बेटे हैं। उनके लिए, मैं एक मां जैसी हूं।” उन्होंने कहा, ”सतीशन के चुनाव प्रचार के दौरान, मैंने उनसे कहा था कि अगर वह भगवान में विश्वास करते हैं, तो उन्हें ताकत के साथ आगे बढ़ना चाहिए और वह मुख्यमंत्री बनेंगे।” उन्होंने मंच पर राहुल और सतीशन दोनों को गले लगाया और फिर वह मंच से नीचे उतरीं।
यूडीएफ सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा की
बता दें कि यूडीएफ सरकार ने सोमवार को कई कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा की। इनमें 15 जून से केरल राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए मानदेय में बढ़ोतरी और वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक समर्पित विभाग का गठन शामिल है।
मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने कैबिनेट की पहली बैठक में लिए गए निर्णयों की घोषणा करते हुए कहा कि महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा योजना के दिशानिर्देश बाद में जारी किए जाएंगे। मंत्रिमंडल ने बुजुर्ग व्यक्तियों के लिए एक अलग विभाग गठित करने का भी निर्णय लिया, जिसे मुख्यमंत्री ने देश में इस तरह की पहली पहल बताया। उन्होंने कहा, ”किसी समाज का मूल्यांकन इस बात से होता है कि वह अपने बुजुर्ग नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करता है। वरिष्ठ नागरिकों की सम्मानजनक देखभाल सुनिश्चित करके केरल को एक आदर्श सभ्य समाज बनना चाहिए।”
केरल विधानसभा के उस एक बयान ने कैसे बदल दी सतीशन की तकदीर
केरल की राजनीति में मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने का रास्ता कभी सीधा नहीं रहा। यहां नेता सिर्फ चुनाव जीत कर मुख्यमंत्री नहीं बनते, उन्हें विचारधारा, संगठन, गुटबाजी, चर्च, समुदायों, छात्र राजनीति और सार्वजनिक बहसों की लंबी सुरंग से गुजरना पड़ता है। वी.डी. सतीशन भी इसी रास्ते से होकर निकले हैं। फर्क बस इतना है कि उन्होंने यह यात्रा बिना ज्यादा शोर, बिना नाटकीय नारों और बिना खुद को “भविष्य का मुख्यमंत्री” घोषित किए पूरी की। यहां क्लिक कर पढे़ं पूरी खबर…
