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विवादास्पद बयान देने वाले अपने नेताओं को अमित शाह की फटकार

पिछले कई गोमास को लेकर एक के बाद एक नेताओं के विवादित बयानों पर इन दिनों राजनीति चल रही है। इन सभी चर्चाओं से पीएम मोदी भी इन दिनों काफी अपसेट चल रहे हैं।

Author नई दिल्ली | October 18, 2015 7:31 PM
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह (पीटीआई फाइल फोटो)

दादरी घटना और गोमांस विवाद पर अपने नेताओं के विवादास्पद बयानों के कारण बाहरी आलोचनाओं और पार्टी में बढ़ती बेचैनी के बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने ऐसे नेताओं को तलब कर ऐसे बयान देने पर फटकार लगाई। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे बयानों पर ‘गहरी अप्रसन्नता’ व्यक्त कर चुके हैं।

पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि शाह ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय मंत्री संजीव बलियान, सांसद साक्षी महाराज और विधायक संगीत सोम को कार्यालय में तलब किया और उन्हें फटकार लगाई और ऐसे बयानों के प्रति चेतावनी दी जिससे मोदी सरकार के विकास के सकारात्मक एजेंडे के पटरी से उतरने का खतरा है।

उन्होंने कहा, ‘‘खट्टर, बलियान, साक्षी महाराज, सोम को अमित शाह ने अपने कार्यालय में तलब किया और उनके विवादास्पद बयानों के लिए उन्हें फटकार लगाई क्योंकि इसके कारण मोदी सरकार का रोजगार सृजित करने, गरीबी उन्मूलन और विकास का सकारात्मक एजेंडा कुछ हद तक पटरी से उतर गया है।’’

भाजपा पदाधिकारी ने कहा कि संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री महेश शर्मा से टेलीफोन पर इस विषय पर नाशुखी व्यक्त की गई। उन्होंने कहा, ‘‘इसके साथ ही पूरी पार्टी में नेताओं को यह संदेश देने का प्रयास भी किया गया है कि अनावश्यक विवाद पैदा करने वाले बयान देने से बचें। ऐसे बयान देने वालों को पार्टी की नाखुशी भी व्यक्त की गई।

यह पहल ऐसे समय में हुई है जब भाजपा के सबसे पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल ने दादरी में मुस्लिम समुदाय के एक व्यक्ति की हत्या को देश के लिए शर्मनाक करार देते हुए कहा था कि इससे सबसे अधिक प्रधानमंत्री की छवि प्रभावित हो रही हैं।

अकाली दल के सांसद नरेश गुजराल ने कहा था, ‘‘उत्तरप्रदेश में दादरी में एक व्यक्ति की पीट पीट कर हुई हत्या के बाद जो कुछ हुआ उससे राजग, भाजपा की छवि को नुकसान हो रहा है और सबसे अधिक प्रधानमंत्री को नुकसान हो रहा है।’’

उन्होंने इस बात की आलोचना की कि ऐसे बयान देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी नहीं सुन रहे हैं और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही हैं।

विवादास्पद बयान देने वाले अपने कुछ नेताओं को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह द्वारा तलब करने और चेतावनी देने को कांग्रेस ने महज औपचारिकता, दिखावा और हथकंडा बताते हुए खारिज कर दिया। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ‘‘अब पछताये क्या होत है, जब चिड़िया चुग गयी खेत। 18 महीने तक विभाजनकारी और उकसाऊ बयान और कार्य नियमित रूप से किये जा रहे थे। अब 18 महीने के बाद अमित शाह को सांसदों और मंत्रियों को दंडित करने का समय मिला।’’

उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट रूप से खोखली औपचारिकता है। मोदी को अभी भी समय नहीं मिला है और उनका चुप्पी साधे रखना जारी है। यह मुद्दों के समाधान की बजाए महज हथकंडा है जो दोष स्वीकार करने जैसा है।

घटनाक्रम से जुड़े एक सूत्र ने बताया, ‘‘पार्टी अध्यक्ष ने ऐसे बयान देने के खिलाफ चेतावनी दी। ऐसे विवाद पार्टी और मोदी सरकार के विकास के एजेंडे को पटरी से उतार सकते हैं।’’

शाह ने उन्हें बताया कि गोमांस खाने और रखने की अफवाह को लेकर दादरी में एक व्यक्ति की पीट पीट कर हत्या राज्य सरकार की कानून एवं व्यवस्था बनाये रखने की विफलता है और भाजपा का इससे कुछ भी लेना देना नहीं है।

सूत्रों ने बताया कि उनके विवादास्पद बयानों से समाजवादी पार्टी सरकार पर से ध्यान हटता है और कटघरे में भाजपा आती है। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इस मुद्दे पर तब सक्रिय हुआ जब प्रधानमंत्री मोदी ने इन नेताओं के बयानों से उत्पन्न विवाद को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की। इन नेताओं पर अंकुश लगाने के लिए पर्याप्त कदम न उठाने को लेकर मोदी की आलोचना हुई है। नेता ने कहा, ‘‘मोदीजी इन विवादों से काफी क्षुब्ध हैं।’’

खबरों के अनुसार, खट्टर ने हाल ही में कहा था कि मुस्लिम भारत में रह सकते हैं लेकिन उन्हें गोमांस का सेवन छोड़ना होगा। हालांकि इस पर तीव्र प्रतिक्रिया के बाद उन्हें बयान वापस लेना पड़ा था। दादरी में गोमांस के सेवन संबंधी अफवाह के चलते एक व्यक्ति की पीट पीट कर हत्या के बाद शर्मा और सोम दादरी के उस गांव गए थे। शर्मा ने हत्या को एक ‘दुर्घटना’ बताया था और सोम ने आरोप लगाया था कि पुलिस निर्दोष लोगों को फंसा रही है और मुजफ्फरनगर जैसी प्रतिक्रिया की चेतावनी भी दी थी। हिंदुत्ववादी नेता साक्षी महाराज भी अपने दक्षिणपंथी बयानों को लेकर विवादों में रहे हैं।

यह पूछे जाने पर कि क्या शाह ने गोमांस के मुद्दे पर उन्हें कोई चेतावनी दी, केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं हुआ जबकि सांसद साक्षी महाराज ने कहा कि उनसे कोई स्पष्टीकरण नहीं मांगा गया।
साक्षी महाराज ने दावा किया कि उनकी शाह से मुलाकात उत्तरप्रदेश में अपने क्षेत्र उन्नाव से जुड़े मुद्दों को लेकर हुई। ‘‘मुझसे कोई स्पष्टीकरण नहीं मांगा गया और न मैंने कोई दिया।’’

दादारी में गोमांस की अफवाह पर एक व्यक्ति को पीट पीट कर हत्या करने के मामले पर उनकी टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर महाराज ने कहा कि उन्होंने उस घटना को कभी उचित नहीं ठहराया और हत्या, हत्या होती है। उन्होंने कहा कि मैं अपने क्षेत्र के मुद्दे पर चर्चा करने आया था क्योंकि बिहार के बाद उत्तरप्रदेश में चुनाव होने हैं।

संगीत सोम ने कहा कि हम पार्टी के कार्यकर्ता हैं और अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलने आए थे और पार्टी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।

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