पहलगाम आतंकी हमले को आज एक साल हो गए। दर्दनाक घटना की बरसी की पूर्व संध्या पर जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बताया कि बीते एक साल में कैसे राज्य की सरकार ने केंद्र के साथ मिलकर काम किया है, ताकि पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने बताया कि कैसे सभी पर्यटन स्थलों को भी खोल दिया गया, क्योंकि लोगों के मन से डर निकालने का यही एकमात्र तरीका था।

आतंकी हमले के बाद एक धारणा बन गई थी कि कुछ टूरिस्ट स्पॉट बंद कर दिए गए हैं। ऐसे में एक बार फिर से पर्यटकों को कश्मीर की ओर आकर्षित करने के संबंध में मुख्यमंत्री ने बताया कि बहुत सारी चीजें थी। सबके अहम सुरक्षा थी। ऐसे में टूरिस्ट स्पॉट को फिर से खोलने से पहले सुरक्षा ऑडिट किए गए। साथ ही हमने लोकल स्टेक होल्डर और टूरिस्म उद्योग के साथ मिलकर काम किया।

उन्होंने कहा कि ऐसा करने के पीछे का मकसद यह था कि हम देखना चाहते थे कि हम कितना बेहतर कर सकते हैं, क्योंकि हम असंवेदनशील नहीं दिखना चाहते थे। ऐसी त्रासदी की पृष्ठभूमि में हम संवेदनशील नजर आना चाहते थे। इसलिए इसे बेहद सावधानी और संतुलित तरीके से करना जरूरी था।

सरकारी अधिकारी लोगों को आश्वस्त करने के लिए अन्य राज्यों में भी गए। क्या इसका फायदा हुआ? इस सवाल के जवाब में सीएम अब्दुल्लाह ने कहा कि हम उन राज्यों में गए जो जम्मू-कश्मीर के प्रति सकारात्मक रुख रखते हैं और जहां से हमें सबसे ज्यादा पर्यटक मिलते हैं। जैसे गुजरात, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र आदि। इस सीजन की शुरुआत के साथ हमने देखा है कि इन जगहों से पर्यटकों की अच्छी संख्या आ रही है।

क्या आप स्थानीय लोगों के इस आकलन से सहमत हैं कि जहां अभी भी पाबंदियां हैं, वे डर की भावना को बढ़ा रही हैं? इसके जवाब में सीएम ने कहा कि मैं पूरी तरह से इस आकलन से सहमत हूं कि जब तक कुछ जगहें बंद रहेंगी, तब तक यह धारणा खत्म नहीं होगी कि जम्मू-कश्मीर या केवल कश्मीर असुरक्षित है। यही वजह है कि हमने केंद्र सरकार के साथ मिलकर सीजन शुरू होने से पहले अधिकतर महत्वपूर्ण जगहों को खोलने की कोशिश की। पहलगाम, गुलमर्ग, दूधपथरी जैसे इलाकों को खोला गया। ट्यूलिप गार्डन भी इसी सूची में था, जिसे सीजन से पहले खोल दिया गया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि हमले के बाद जब केंद्रीय गृह मंत्री जम्मू आए और स्थिति की समीक्षा की, तब हमने जोर देकर कहा कि इस पर पुनर्विचार जरूरी है और उन्होंने सहमति जताई। इसके बाद कुछ और जगहों को खोलने का निर्णय लिया गया। गृह मंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि राज्यों में चुनाव खत्म होने के बाद जो सुरक्षा बल हटाए गए हैं, उन्हें वापस लाया जाएगा, जिससे बाकी स्थानों को भी खोला जा सकेगा।

सबसे खराब दौर में भी हमने पर्यटन स्थलों को बंद नहीं किया था। इसलिए यह कहना गलत नहीं है कि जब सुरक्षा कारणों से जगहें बंद होती हैं, तो लोगों में यह धारणा बनती है कि यहां आना सुरक्षित नहीं है। जबकि आज की स्थिति 8-10 साल पहले से ज्यादा खराब नहीं है, तो फिर ऐसी धारणा क्यों बनाई जाए?

क्या सरकार को पर्यटक स्थलों को खोलने का जोखिम उठाना पड़ेगा? इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें कुछ हद तक जोखिम उठाना होगा और हम इसके लिए तैयार हैं। गृह मंत्री ने कहा कि उन स्थानों को प्राथमिकता दी जाए जहां सबसे ज्यादा पर्यटक आते हैं और हमने वही किया है। धीरे-धीरे बाकी बंद स्थान भी खोले जाएंगे।

क्या सुरक्षा पाबंदियों के बीच सरकार के आश्वासन काम करेंगे?

मुख्यमंत्री ने कहा, “पिछले साल हम सीमित परिस्थितियों में लोगों को जम्मू-कश्मीर आने के लिए प्रेरित कर रहे थे। हम लोगों से कह रहे थे कि आएं, लेकिन वे सभी जगहों पर नहीं जा सकते थे, जैसे गुलमर्ग में गोंडोला से आगे नहीं जा सकते, पहलगाम में आरू या चंदनवाड़ी नहीं जा सकते या डोडापथरी नहीं जा सकते थे। यह मुश्किल था, लेकिन धीरे-धीरे हालात सुधरे हैं, जो सकारात्मक है।

इस सीजन की शुरुआत में पहलगाम की घटना का थोड़ा असर जरूर है, लेकिन पर्यटकों की संख्या पर इसका बड़ा असर नहीं दिख रहा। असल में, इस साल वैश्विक हालात, खासकर ईरान के आसपास की स्थिति का असर ज्यादा पड़ा है।

क्या पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों की चिंताओं को दूर करने के प्रयास हो रहे हैं?

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ने से ही संभव है। फिलहाल संख्या पिछले साल से कम है, लेकिन धीरे-धीरे बढ़ रही है। जमीनी स्तर पर टैक्सियां चल रही हैं, टूरिस्ट बसें वापस आ गई हैं और होटलों में बुकिंग हो रही है। इस साल वैश्विक परिस्थितियों और लॉकडाउन या ईंधन संकट की आशंकाओं से थोड़ा असर पड़ा था, लेकिन जैसे-जैसे ये डर कम हुआ, पर्यटकों की संख्या फिर बढ़ने लगी है।

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जम्मू-कश्मीर में हुए पहलगाम आतंकी हमले को गुरुवार को एक साल पूरे हो गए हैं। इस आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की दर्दनाक मौत हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमले की बरसी पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। पूरी खबर पढ़ें…