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संघ ने बचाई अमित शाह की कुर्सी, पर भारी पड़ रहे भाजपाई सीएम, टीम में नहीं रखवाने दे रहे मनपसंद लोग

बिहार चुनाव में मिली हार के बाद अमित शाह को राज्‍य स्‍तरीय संगठनों में अपनी पसंद के नेताओं को जगह देने के फैसले से मुख्‍यमंत्रियों के दबाव में पीछे हटना पड़ा है।

Author नई दिल्‍ली | January 14, 2016 6:02 PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पार्टी अध्‍यक्ष अमित शाह।

भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह इस महीने के अंत तक अपनी टीम में कुछ नए चेहरों को जगह दे सकते हैं और इसके तहत एक केन्‍द्रीय मंत्री को भी शामिल किया जा सकता है। अमित शाह का दूसरी बार भाजपा अध्‍यक्ष बनना लगभग तय है और आगामी दिनों में जिन राज्‍यों में चुनाव होने हैं वहां के नेताओं को संगठन में जगह दे सकते हैं। हालांकि बिहार चुनाव में मिली हार के बाद अमित शाह को राज्‍य स्‍तरीय संगठनों में अपनी पसंद के नेताओं को जगह देने के फैसले से मुख्‍यमंत्रियों के दबाव में पीछे हटना पड़ा है। राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष के चुनाव से पहले लगभग आधे से ज्‍यादा राज्‍यों में नए संगठन का चुनाव होना है। एक वरिष्‍ठ पार्टी नेता के अनुसार इनमें से आधे राज्‍यों में नए अध्‍यक्ष और नई टीम होगी।

इसी बीच पहले अटकलें थी कि आरएसएस भाजपा के नेतृत्‍व में बदलाव चाहता है लेकिन सूत्रों का कहना है कि हाल ही में इंदौर में विश्‍व संघ शिविर के दौरान संघ नेतृत्‍व ने अमित शाह के भाजपा अध्‍यक्ष बने रहने पर सहमति जताई। अमित शाह दोबारा चुने जाने के बाद अपनी पूर्ववर्ती टीम में बदलाव करेंगे और बताया जाता है कि कुछ नए चेहरों को इसमें जगह मिलेगी। इसके तहत पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्‍द्र प्रधान को संगठन में जगह दी जा सकती है। संगठन में बदलाव के बाद केन्‍द्रीय मंत्रीमंडल में भी फेरबदल संभव है। पार्टी उत्‍तर प्रदेश में लक्ष्‍मीकांत वाजपेयी की जगह अन्‍य पिछड़ा वर्ग से आने वाले किसी शख्‍स को अध्‍यक्ष बनाना चाहती है। वहीं यूपी भाजपा के प्रमुख चेहरे स्‍वतंत्र देव सिंह को भी बड़ी जिम्‍मेदारी दी जा सकती है।

इसके साथ ही यूपी से आने वाले श्रीकांत शर्मा को प्रमोट कर राष्‍ट्रीय सचिव से महासचिव बनाया जा सकता है। शर्मा यूपी से आते हैं और उनके जरिए पार्टी ब्राह्मण मतों को अपनी ओर खिंचना चाहती है। हालांकि बिहार की पराजय के बाद अमित शाह को मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान और छत्‍तीसगढ़ में मुख्‍यमंत्रियों के दबाव के आगे झुकना पड़ा। मध्‍य प्रदेश में नंदकुमार सिंह को ही दोबारा चुना गया है जबकि वसुंधरा राजे के विश्‍वस्‍त अशोक परनामी को राजस्‍थान भाजपा का अध्‍यक्ष फिर से बनाया गया है। छत्‍तीसगढ़ में भी वर्तमान अध्‍यक्ष धरमलाल कौशिक को ही दोबारा चुना गया। हालांकि केरल और पश्चिम बंगाल में अध्‍यक्ष के चयन में आरएसएस का प्रभाव नजर आया। केरल में हिंदुत्‍ववादी कुमानम राजशेखरन और पश्चिम बंगाल में दिलीप घोष को अध्‍यक्ष बनाया गया। यह दोनों एक साल पहले ही आरएसएस से भाजपा में आए थे।

केरल और पश्चिम बंगाल में इस साल के अंत तक चुनाव हो सकते हैं और यहां पर भाजपा बड़ी ताकत बनकर उभरना चाहती है। एक वरिष्‍ठ भाजपा नेता का कहना है कि अगर भाजपा ने बिहार जीत लिया होता तो अध्‍यक्षजी की पसंद चलती। बिहार से सबसे बड़ी शिकायत आई कि केन्‍द्रीय नेतृत्‍व ने अपने निर्णय राज्‍य इकाई पर थोपे।

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