केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी-एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड या समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के ऐलान को लेकर एनडीए के भीतर दरार साफ दिख रही है। एनडीए गठबंधन के ज्यादातर सहयोगियों ने शाह के बयान को लेकर सावधानी भरा रुख अपनाया, जबकि जेडीयू ने साफ कर दिया कि वह बिहार में ऐसे किसी कदम का समर्थन नहीं करेगी।
आंध्र प्रदेश में सरकार की अगुवाई कर रही और एनडीए के सहयोगी दल तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के अलावा एकनाथ शिंदे की शिवसेना और बिहार के हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेकुलर) अमित शाह के बयान के समर्थन में उतरे।
लोकसभा में टीडीपी के नेता लावू कृष्ण देवरायालु ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा, “हम इसका समर्थन करेंगे।” देवरायालु ने कहा, “अभी तो कोई चर्चा नहीं हो रही है। लेकिन जब भी जरूरत महसूस होगी, हम इस पर विचार करेंगे। इसे (समान नागरिक संहिता को) अपनाने से पहले हम निश्चित रूप से अलग-अलग पक्षों से बातचीत करेंगे।”
नरम पड़ा टीडीपी का रुख
टीडीपी और जेडीयू को आंध्र प्रदेश और बिहार में मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन हासिल है। इन दोनों ही दलों ने पहले बिना किसी बातचीत के ऐसे किसी कानून का विरोध किया था लेकिन अब यह साफ दिखाई दे रहा है कि टीडीपी का रुख नरम हो गया है।
टीडीपी के एक नेता ने कहा, “भारत जैसे देश में, जहां अलग-अलग धर्म और संस्कृतियां हैं, इसकी (यूसीसी) बहुत जरूरत है।”
2024 के लोकसभा चुनाव से पहले टीडीपी प्रमुख और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा था कि जब यूसीसी की बात आएगी, तो उनकी पार्टी मुस्लिम समुदाय के साथ खड़ी रहेगी। टीडीपी 2024 के चुनाव के बाद एनडीए में शामिल हो गई थी। इस चुनाव में बीजेपी की सीटें 2019 में मिलीं 303 से घटकर 240 रह गई थीं।
2011 की जनगणना के अनुसार, आंध्र प्रदेश की कुल 8,45,80,777 आबादी में हिंदुओं की संख्या 7,48,24,149 (यानी 88% से ज़्यादा) थी, जबकि मुसलमानों की संख्या 80,82,412 (यानी लगभग 10%) थी।
जेडीयू नेता श्याम रजक का बयान
पटना में जेडीयू नेता और राज्य के पूर्व मंत्री श्याम रजक ने सोमवार को फिर कहा कि पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर तो यूसीसी के बिल का समर्थन करती है लेकिन बिहार में वह ऐसा नहीं करेगी। जेडीयू के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मामले में कहा था कि इसे लागू करने से पहले इस मुद्दे पर व्यापक राष्ट्रीय सहमति जरूरी है।
श्याम रजक ने पत्रकारों से कहा, “जब यह बिल संसद में आया था तो हमारे नेता (नीतीश कुमार) का रुख साफ था- हम इसका समर्थन करते हैं लेकिन इसे अपने राज्य (बिहार) में लागू नहीं होने देंगे। हम अपनी इस बात पर कायम हैं।”
हम गृह मंत्री से चर्चा करेंगे- संजय झा
यूसीसी को लेकर जेडीयू का क्या रुख है, इस बारे में पूछे जाने पर राज्यसभा सांसद संजय झा ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे पर बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व से बात करेगी। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया, “हम इस पर गृह मंत्री से चर्चा करेंगे।”
लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) का क्या कहना है?
बिहार में बीजेपी की एक और सहयोगी पार्टी- लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) का हमेशा से यही रुख है कि जब इस मुद्दे पर कोई ब्लूप्रिंट या ड्राफ्ट बिल उसके सामने पेश किया जाएगा, तभी वह इसके संभावित असर और कानूनी फ्रेमवर्क का आकलन करेगी।
हम यूसीसी लाने जा रहे हैं- सामिक भट्टाचार्य
पश्चिम बंगाल में टीएमसी ने समान नागरिक संहिता का जोरदार विरोध किया था। तीन महीने पहले हुए पश्चिम बंगाल के चुनाव में बीजेपी को जीत मिली थी। पश्चिम बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने कहा था कि राज्य की बीजेपी सरकार जल्द से जल्द इस कानून को पास कराने और लागू करने की प्रक्रिया शुरू करेगी।
भट्टाचार्य ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया, “हम यूसीसी लाने जा रहे हैं, यह हमारे लिए कोई छिपा हुआ एजेंडा नहीं है। यह शुरू से ही बीजेपी की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है और अब इसे पूरा करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। राज्य की आबादी का एक बड़ा हिस्सा भी चाहता है कि यहां यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू हो।”
एनसीपीआई ने क्या कहा?
पश्चिम बंगाल में बीजेपी की नई सहयोगी पार्टी- नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) ने कहा कि वह इस मुद्दे पर विचार-विमर्श करेगी। पार्टी नेता और सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा, “हमने सुना है कि एनडीए शासित राज्य इसे लागू करने जा रहे हैं। यह एक गंभीर मुद्दा है जिस पर बहुत सोच-विचार की जरूरत है। प्रस्ताव आने पर हम ऐसा करेंगे। कोई भी रुख अपनाने से पहले हम चर्चा करेंगे।”
तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए बागी सांसद एनसीपीआई में शामिल हो गए थे। लोकसभा में एनसीपीआई के पास 20 सांसद हैं।
2011 की जनगणना के अनुसार, पश्चिम बंगाल की कुल आबादी 9,12,76,115 है, जिसमें हिंदुओं की संख्या 6,43,85,546 (70% से ज्यादा) और मुसलमानों की संख्या 2,46,54,825 (27% से ज्यादा) है।
शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे क्या बोले?
एनडीए के अन्य सहयोगी दलों- शिवसेना और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेकुलर) ने यूसीसी के लिए समर्थन दोहराया है। शिवसेना नेता और सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा, “यूसीसी समानता, न्याय और राष्ट्रीय एकता के सिद्धांतों पर आधारित है। यह हमारे संस्थापक ‘हिंदू हृदय सम्राट’ बालासाहेब ठाकरे का लंबे समय से चला आ रहा वैचारिक रुख भी रहा है। एक वैचारिक सहयोगी के तौर पर, भारत की जनता से किए गए वादों को पूरा करने में सरकार के साथ मजबूती से खड़े रहना हमारा कर्तव्य है। हमारे नेता एकनाथ शिंदे यूसीसी को लागू करने और एक मजबूत, एकजुट और प्रगतिशील भारत के विजन को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”
हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेकुलर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन ने यूसीसी पर शाह के बयान का तहे दिल से स्वागत किया और इसे समर्थन दिया।
किसके पास कितने सांसद हैं?
लोकसभा में टीडीपी के 16 सांसद हैं, उसके बाद शिवसेना के 13, जेडीयू के 12 और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के पांच सांसद हैं।
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समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने प्रतिक्रिया दी है। राउत ने महाराष्ट्र के ठाणे में सोमवार को पत्रकारों के सवाल के जवाब में कहा, “नहीं, देखिए, उनका एजेंडा है। लेकिन गोवा में क्या होगा? क्या वे गोवा में लागू कर पाएंगे? क्या वे नॉर्थ-ईस्ट में लागू कर पाएंगे?।” यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
