लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के द्वारा लाये गये अविश्वास प्रस्ताव को बुधवार को ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया है। विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया था कि स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही चलाते समय पक्षपातपूर्ण ढंग से काम किया। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर हमला बोला था।
बजट सत्र के पहले चरण में 118 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर के साथ बिरला को पद से हटाए जाने के लिए नोटिस दिया गया था।
अमित शाह ने कहा, “लोकसभा स्पीकर के सामने जो अविश्वास प्रस्ताव आया है इस पर मेरे विचार व्यक्त करने के लिए मैं खड़ा हुआ हूं। ये घटना कोई सामान्य घटना नहीं है। करीब 4 दशक बात एक बाद फिर से लोकसभा अध्यक्ष के सामने अविश्वास प्रस्ताव आया है। संसदीय राजनीति और ये सदन दोनों के लिए ये अफसोसजनक घटना है। स्पीकर किसी दल के नहीं होते हैं सदन के होते हैं। एक प्रकार से सदन के सभी सदस्यों के अधिकार के वे संरक्षक भी होते हैं।”
अमित शाह ने कहा, “सदन आपसी विश्वास से चलता है। पक्ष-विपक्ष दोनों के लिए सदन के स्पीकर कस्टोडियन होते हैं, उन्हें लोकसभा कैसे चलानी है, इसके लिए इसी लोकसभा ने कुछ नियम बनाए हैं… सदन के अंदर सदन के नियमों के अनुसार बोलना होता है। सदन के नियम जिसकी अनुमति नहीं देते हैं उस हिसाब से किसी को बोलने का अधिकार नहीं है, चाहे वह कोई भी हो। जब आप नियमों को नजरअंदाज करेंगे तो स्पीकर का पवित्र दायित्व है कि उसे रोके, टोके और निकाल कर बाहर करें। यह नियम हमने नहीं बनाए, यह नेहरू जी के समय से चले आ रहे हैं।”
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, “विपक्ष में रहते हुए भाजपा-एनडीए कभी भी लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाये। हमने रचनात्मक विपक्ष के रूप में काम किया। हमने अध्यक्ष पद की गरिमा को बनाए रखा।”
तीन बार लाया जा चुका है स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव
इतिहास में आजादी के बाद से कम से कम तीन बार ऐसा हुआ है जब लोकसभा स्पीकर को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। पहला ऐसा प्रस्ताव 1954 में प्रथम लोकसभा स्पीकर जी.वी. मावलंकर के खिलाफ लाया गया था, जब सांसद विग्नेश्वर मिश्रा ने आरोप लगाया था कि स्पीकर निष्पक्ष नहीं हैं।
क्या है लोकसभा स्पीकर को हटाने के नियम?
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान स्पीकर को अपना बचाव करने का अधिकार है। संविधान के आर्टिकल 96(2) कहता है कि जब ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन हो, तो स्पीकर को कार्यवाही में बोलने और हिस्सा लेने का अधिकार है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
