केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को नक्सलवाद के अंत के बाद ड्रग्स के खिलाफ देश की सबसे बड़ी राष्ट्रीय लड़ाई बताया। शाह ने नशे के खिलाफ तीन साल का रोडमैप और विजन डॉक्यूमेंट जारी किया। इसका लक्ष्य 2029 तक “नशामुक्त भारत” बनाना है।
रविवार दोपहर गोवा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमित शाह ने कहा, “हमने 2029 तक भारत को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल करने के लिए एक रोडमैप तैयार किया है। नशीले पदार्थों की तस्करी एक ऐसा अपराध है जो आने वाली पीढ़ियों को बर्बाद कर देता है और इस तरह से जुटाया गया ‘काला धन’ आतंकवाद को वित्त पोषित करने में भी इस्तेमाल किया जाता है। कई देशों में नार्को-आतंकवादी मॉड्यूल पनप चुके हैं और पूरी दुनिया इस समस्या से जूझ रही है।”
अमित शाह ने कहा कि 2019 से सरकार ने मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। जिनके माध्यम से नेटवर्क को ध्वस्त किया गया है और वित्तीय श्रृंखलाओं को तोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले, जब कांग्रेस सरकार सत्ता में थी, तब मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई टुकड़ों-टुकड़ों में और अलग-थलग तरीके से की जाती थी और यह केवल छोटी-मोटी ज़ब्ती तक सीमित थी।
शाह ने कहा, “2019 में हमने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए प्राथमिकता वाला मुद्दा बनाया। चार-स्तरीय NCORD (नार्को कोऑर्डिनेशन सेंटर) तंत्र बनाया गया और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में समर्पित एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स गठित कर स्थानीय पुलिस को राष्ट्रीय रणनीति से जोड़ा गया।”
उन्होंने कहा, “हमने कार्रवाई को सिर्फ ड्रग्स की जब्ती तक सीमित रखने के बजाय पूरे नेटवर्क को निशाना बनाने वाली रणनीति में बदल दिया। अब नीचे से ऊपर और ऊपर से नीचे तक जांच के जरिए ड्रग्स के सरगनाओं, उनके सहयोगियों, वितरकों और सप्लायरों तक पहुंच बनाई जा रही है।”
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई फाइलों और विभिन्न एजेंसियों द्वारा की जाने वाली अलग-थलग कार्रवाइयों से हटकर एक राष्ट्रीय, समन्वित और निरंतर अभियान में परिवर्तित हो जाए।
‘जब्त की गई दवाओं की मात्रा में वृद्धि’
अमित शाह ने कहा कि 2014 में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से जब्त की गई ड्रग्स की मात्रा में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। 2004 से 2014 तक 26 लाख किलोग्राम मादक और मनोरोगी पदार्थ जब्त किए गए, जबकि 2014 से 2026 (जुलाई तक) तक 1.19 करोड़ किलोग्राम से ज्यादा मादक और मनोरोगी पदार्थ जब्त किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि नक्सलवाद को समाप्त करने के बाद ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई देश की सबसे बड़ी राष्ट्रीय लड़ाई है। उन्होंने कहा, “हम 2026-29 को मिशन-आधारित अवधि बनाएंगे। प्रत्येक लक्ष्य के लिए एक समयसीमा, एक जिम्मेदार मंत्रालय, मापने योग्य परिणाम, त्रैमासिक समीक्षा और परिणाम-आधारित जवाबदेही होगी। इस रणनीति के तीन मुख्य लक्ष्य होंगे- आपूर्ति में कमी, मांग में कमी और नुकसान में कमी।”
शाह ने कहा कि लक्ष्य हासिल करने के लिए ‘चार स्तंभों’ वाला एक रोडमैप विजन दस्तावेज तैयार किया गया है। इन स्तंभों में खुफिया जानकारी और अभियान आधारित प्रवर्तन, पूर्वनिर्धारित और कृत्रिम दवाओं पर नियंत्रण, मांग और नुकसान में कमी, और क्षमता निर्माण और समन्वय शामिल हैं।
दोपहर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अमित शाह पणजी के पास चिंबेल की ओर रवाना हुए। जहां उन्हें गोवा में भाजपा के नए राज्य मुख्यालय का उद्घाटन करना था। हालांकि, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने बताया कि दिल्ली में इमारत गिरने की घटना के कारण कार्यक्रम को छोटा कर दिया गया। सावंत ने मीडिया से कहा कि दिल्ली में हुए हादसे की वजह से हमने कार्यक्रम को स्थगित करने का निर्णय लिया है।
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भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू के सांबा जिले में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को सुरक्षा के लिहाज से ‘संवेदनशील’ माना है और इसीलिए इस संस्थान में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की सशस्त्र टुकड़ी तैनात की जाएगी। यह जानकारी रविवार को अधिकारियों ने दी है। पढ़ें पूरी खबर।
