धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बड़ा बयान सामने आया है। अमित शाह ने पहली बार देर रात धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफे वाला पोस्ट शेयर करते हुए अपनी बात रखी। शाह ने कहा कि भाजपा कार्यकर्तीओं के लिए पद से कहीं ज्यादा देश महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही शाह ने मोदी सरकार की तारीफ भी की। वहीं, इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर अमित शाह पर निशाना साधा।
अमित शाह ने क्या कहा?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “भाजपा के कार्यकर्ताओं के लिए पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण देश, हमारी युवा पीढ़ी और विद्यार्थी हैं। आज केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र का अपने पद से इस्तीफा इसी को दर्शाता है।”
अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार देश के युवाओं की भावनाओं का सम्मान करती है और पेपर लीक के विरुद्ध आवश्यक सुधारों के लिए कटिबद्ध है। पेपर लीक के दोषियों को कठोर दंड मिले, इसके लिए मोदी जी द्वारा लिए गए निर्णय सराहनीय हैं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि इन कदमों से NEET परीक्षा में सफल हुए विद्यार्थियों के साथ पूरा न्याय होगा।
शाह ने आगे कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने अपने कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन, मातृभाषाओं में परीक्षाओं की व्यवस्था, पीएम श्री विद्यालयों के विस्तार, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने, कौशल विकास एवं उद्योग-अकादमिक समन्वय को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। परीक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में भी उनके प्रयास उल्लेखनीय रहे हैं। उनका कार्यकाल भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के प्रति उनके समर्पण का परिचायक है।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
वहीं, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर राहुल गांधी ने कहा, “आज छात्रों को बहुत बड़ी जीत मिली है।”
राहुल गांधी ने कहा कि याद रहे, प्रदर्शन में जिन छात्रों पर घातक हमले हुए – किसी का हाथ टूटा, किसी का पैर, किसी की पसली, पेलेट गन जैसे जानलेवा हथियार का इस्तेमाल किया गया, तो कई चोट खा कर critical हो गए – इन सबके सीधे ज़िम्मेदार गृह मंत्री अमित शाह हैं।
गांधी ने आगे कहा कि मांग साफ है, इस हमले के organisers से लेकर implementors तक, सभी की जवाबदेही तय हो और उनपर ऐसी कार्रवाई हो जो छात्रों को दिखे- तब जा कर होगा इंसाफ़। अमित शाह जी, आपको जवाब तो देना ही पड़ेगा।”
बता दें, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले महीने से दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के समर्थकों द्वारा प्रदर्शन किया जा रहा था।धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सीजेपी के समर्थकों और जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने जमकर जश्न मनाया। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगुचक ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को युवाओं की जीत बताया है।
धर्मेंद्र प्रधान ने एक पत्र जारी कर अपने इस्तीफे की जानकारी दी है। उन्होंने पत्र में कहा है कि वह पिछले 4 दशक से भी अधिक वक्त से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं। प्रधान ने कहा कि वह देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी अपेक्षाओं का सम्मान करते हैं और भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हम सभी के सामाजिक एवं सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा है। वहीं, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
ओडिशा से आने वाले धर्मेंद्र प्रधान, राष्ट्रीय राजनीति में अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहे हैं। 26 जून, 1969 को एक राजनीतिक परिवार में जन्मे प्रधान बचपन से ही आरएसएस की सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में गहराई से जुड़े रहे। उनके पिता देबेंद्र प्रधान एक डॉक्टर थे। वे ओडिशा में भाजपा के एक प्रमुख नेता थे और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री बने थे। पढ़ें पूरी खबर।
