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महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का पक्ष लेने वाले बीजेपी सांसद को अमित शाह ने दिया बड़ा पद, पढ़िए कटील का प्रोफाइल

मई में कटील ने एक ट्वीट कर कहा था कि 'गोडसे ने एक को मारा, कसाब ने 72 को मारा...मगर राजीव गांधी ने 17 हजार लोगों को मारा। आप खुद तय करें कि ज्यादा क्रूर कौन है।'

Author नई दिल्ली | Updated: August 21, 2019 12:25 PM
Nalin Kumar Kateelदक्षिण कन्नड़ के सांसद नलिन कुमार कतील की आरएसएस में मजबूत जड़े हैं।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का समर्थन करने नलीन कुमार कटील को कर्नाटक में बड़ा पद दिया है। मंगलवार (20 अगस्त, 2019) को भाजपा की तरफ से जारी विज्ञप्ति के अनुसार पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने कटील को भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया। मई में कटील ने एक ट्वीट कर कहा था कि ‘गोडसे ने एक को मारा, कसाब ने 72 को मारा…मगर राजीव गांधी ने 17 हजार लोगों को मारा। आप खुद तय करें कि ज्यादा क्रूर कौन है।’ विवाद के बाद यह ट्वीट डिलीट कर दिया गया। तब पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि मामला अनुशासनात्मक समिति के समक्ष भेजा गया है।

बता दें कि कर्नाटक की दक्षिण कन्नड सीट से मौजूदा सांसद नलीन कुमार कटील के कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बनने की जानकारी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह की तरफ से दी गई। नलीन कुमार कटील कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा की जगह लेंगे। बी एस येदियुरप्पा ने जुलाई 2019 को चौथी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी।

नलीन कुमार कटील 18 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक बन गए थे। बाद में वह बीजेपी में शामिल हुए और 2004 में जिले के महासचिव का पद संभाला। इसके बाद 2009, 2014, 2019 का लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने। उन्हें भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय संगठनात्मक सचिव बी एल संतोष का काफी करीबी माना जाता है। कटील को ऐसे समय में प्रदेश पार्टी अध्यक्ष बनाया गया जब भाजपा अध्यक्ष ने सीएम येदियुरप्पा को उनकी कैबिनेट के विस्तार की अनुमति दी गई।

गौरतलब है कि कटील ने साल 2009 में अपना पहला लोकसभा चुनाव बहुत कम अंतर से कांग्रेस के दिग्गज नेता जनार्दन पूजारी को हराकर जीता। भाजपा नेता कटील पूर्व में आरएसएस कार्यकर्ता के साथ छोटे वक्त के लिए व्यापारी भी रहे हैं। हालांकि पिछले पांच सालों में उन्होंने भाजपा और संघ में बड़े नेताओं के बीच अपने मजबूत संबंध स्थापित किए। जिसके चलते स्थानीय आरएसएस के मजबूत कार्यकर्ता प्रभाकर कल्लादका जैसे लोगों का विश्वास खोने के बावजूद इस क्षेत्र में एक प्रमुख राजनीतिक व्यक्ति के रूप में उभरने में कामयाब हुए। तटीय कर्नाटक में कई हिंदू कार्यकर्ताओं की कथित हत्या पर साल 2017 में हुए एक आंदोलन में वह सबसे आगे थे।

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