अमित मालवीय का दावा- सलमान खुर्शीद ने हिंदुत्व की तुलना ISIS और बोको हरम से की; पी चिदंबरम बोले- जैसे जेसिका को किसी ने नहीं मारा उसी तरह बाबरी मस्जिद को भी किसी ने नहीं गिराया

चिदंबरम ने कहा कि 6 दिसंबर 1992 को जो कुछ भी हुआ, वह बेहद गलत था। इसने हमारे संविधान को बदनाम किया।

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बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने खुर्शीद की नई किताब को लेकर बयान दिया है। फोटो सोर्स- अमित मालवीय (बाएं)- ट्विटर/@amitmalviya, चिदंबरम(दाएं)- फाइल फोटो

कांग्रेस के सीनियर नेता सलमान खुर्शीद की अयोध्या फैसले पर लिखी गई किताब ‘सनराइज ओवर अयोध्या’ विवादों में आ गई है। बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने इस किताब को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सलमान खुर्शीद ने अपनी नई किताब में लिखा है कि हिंदुत्व आईएसआईएस और बोको हरम जैसे जिहादी इस्लामी समूहों के समान है।

उन्होंने कहा कि हम उस व्यक्ति से और क्या उम्मीद कर सकते हैं जिसकी पार्टी ने सिर्फ इस्लामिक जिहाद के साथ समानता लाने के लिए और मुस्लिम वोट पाने के लिए भगवा आतंकवाद शब्द गढ़ा।

वहीं कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने इस किताब की लॉन्चिंग के मौके पर अयोध्या फैसले पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह जेसिका को किसी ने नहीं मारा, उसी तरह बाबरी मस्जिद को भी किसी ने नहीं गिराया।

चिदंबरम ने कहा कि 6 दिसंबर 1992 को जो कुछ भी हुआ, वह बेहद गलत था। इसने हमारे संविधान को बदनाम किया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, चीजों ने एक अनुमानित आकार लिया और एक साल के भीतर सभी को बरी कर दिया गया। इसलिए जैसे किसी ने जेसिका को नहीं मारा, वैसे किसी ने बाबरी मस्जिद को नहीं गिराया।

चिदंबरम ने कहा कि यह निष्कर्ष हमें हमेशा परेशान करेगा कि जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी, एपीजे अब्दुल कलाम के इस देश में और आजादी के 75 साल बाद भी हमें यह कहते हुए शर्म नहीं आती कि किसी ने बाबरी मस्जिद को नहीं तोड़ा।

उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने अयोध्या के फैसले को स्वीकार कर लिया और यह सही फैसला बन गया। हालांकि यह सही फैसला नहीं है जिसे दोनों पक्षों ने स्वीकार किया है।

चिदंबरम से पहले, कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा था कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि हिंदुत्व और हिंदू धर्म पर्यायवाची बन गए हैं। सावरकर धार्मिक नहीं थे।

उन्होंने यहां तक ​​पूछ डाला कि कि गाय को माता क्यों माना जाता है, जबकि उन्हें गोमांस खाने में कोई समस्या नहीं थी। उन्होंने केवल हिंदू पहचान स्थापित करने के लिए ‘हिंदुत्व’ शब्द को सामने लाया, जिससे लोगों में भ्रम पैदा हुआ।

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