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आमिर खान का पलटवार- जिस फूहड़ तरीके से लोग मुझ पर चिल्‍ला रहे हैं, उससे मेरी बात सही साबित होती है

देश में कथित तौर पर असहिष्‍णुता बढ़ने को लेकर दिए गए एक बयान पर एक्‍टर आमिर खान ने सफाई दी है।

Author नई दिल्‍ली | May 8, 2017 3:03 PM
आमिर खान ने पिछले साल नवबंर में रामनाथ गोयनका अवॉर्ड में दिया था असहिष्‍णुता पर बयान। उसके बाद से उठा विवाद अभी तक शांत नहीं हुआ है।

देश में कथित तौर पर असहिष्‍णुता बढ़ने को लेकर दिए गए एक बयान पर एक्‍टर आमिर खान ने सफाई दी है। उनका कहना है कि उन्‍हें भारतीय होने पर गर्व है और वे देश नहीं छोड़ने जा रहे। आमिर ने मीडिया में बयान जारी करके अपनी बात कही है।

क्‍या है आमिर का बयान?

सब से पहले मैं एक बात साफ करना चाहूंगा। न मेरा, न मेरी पत्‍नी का कोई इरादा है ये देश छोड़ने का। न हमारा ऐसा कोई इरादा था, न है और न रहेगा। जो  कोई भी ऐसी बात फैलाने की कोशिश कर रहा है, उसने या तो मेरा इंटरव्‍यू नहीं देखा, या जानबूझकर गलतफहमी फैलाना चाह रहा है। भारत मेरा देश है, मैं उससे बेइंतिहा प्‍यार करता हूं और यही मेरी सरजमीं है।

दूसरी बात, इंटरव्‍यू के दौरान जो भी मैंने कहा है, मैं उस पर अटल हूं।

जो लोग मुझे देशद्रोही कह रहे हैं, उनसे मैं कहूंगा, मुझे गर्व है अपने हिंदुस्‍तानी होने पर, और इस सच्‍चाई के लिए मुझे न किसी की इजाजत की जरूरत है, और न ही किसी सर्टिफिकेट की।

जो लोग इस वक्‍त मुझे भद्दी गालियां दे रहे हैं क्‍योंकि मैंने अपने दिल की बात कही है, उनसे मैं कहना चाहूं‍गा कि मुझे बड़ा दुख है कि मेरा कहा वो सच साबित कर रहे हैं।

और, उन सारे लोगों को मैं शुक्रिया अदा करना चाहूंगा जो आज इस वक्‍त मेरे साथ खड़े हैं। हमें हमारे इस खूबसूरत और बेमिसाल देश के खूबसूरत चरित्र को सुरक्षित रखना है। हमें सुरक्षित रखना है इसकी एकता को, इसकी अखंडता को, इसकी विविधता को, इसकी सभ्‍यता और संस्कृति को, इसके इतिहास को, इसके अनेकतावाद के विचार को, इसकी विविध भाषाओं को, इसके प्‍यार को, इसकी संवेदनशीलता को और इसके जज्‍बाती ताकत को।

अंत में मैं रविंद्रनाथ टैगोर की एक कविता दोहराना चाहूंगा। कविता नहीं बल्‍कि ये एक प्रार्थना है

जहां उड़ता फिरे मन बेखौफ,
और सर हो शान से उठा हुआ,
जहां ज्ञान हो सबके लिए बेरोकटोक बिना शर्त रखे हुए,
जहां घर की चौखट सी छोटी सरहदों में न बंटा हो जहां,
जहां सच की गह‍राईयों से निकले हर बयान,
जहां बाजुएं बिना थके लकीरें कुछ मुकम्‍मल तराशें,
जहां सोच को धुंधला न पाए उदास मुर्दा रवायतें,
जहां दिलों दिमाग तलाशें नए ख्‍याल और उन्‍हें अंजाम दे,
ऐसी आजादी के स्‍वर्ग में, ऐ भगवान, मेरे वतन की हो नई सुबह।

जय हिंद

आमिर खान।

क्‍या कहा था आमिर ने? आमिर ने सोमवार शाम रामनाथ गोयनका एक्‍सीलेंस इन जर्नलिज्‍म अवॉर्ड फंक्‍शन में कहा था कि देश में छह-आठ महीने में माहौल ज्‍यादा खराब हुआ है। असुरक्षा का माहौल बढ़ा है। उन्‍होंने कहा कि अपने बच्‍चों की सुरक्षा को लेकर चिंता के मारे उनकी पत्‍नी किरण राव ने एक बार उनके सामने सवाल रखा कि क्‍या हमें भारत छोड़ कर कहीं और बसना चाहिए? आमिर ने असहिष्‍णुता बढ़ने का विरोध करते हुए लेखकों, साहित्‍यकारों, फिल्‍मकारों आदि के द्वारा अवॉर्ड लौटाए जाने को भी सही बताया था।

 

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