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जब बात धंधे की आई तो कैसे बार-बार अपनी ही बातों से पलटते गए रामदेव, मजेदार विडियो शेयर कर याद दिला रहे लोग

विरोध करने वालों का कहना है कि बाबा रामदेव कथित रूप से व्यापारी हैं और बाबा के वेश में लोगों से योग और पुरातनपंथी की आड़ में अपने धंधे की बातें करते हैं। कहा कि जब बात व्यापार की आती है तो वे बार-बार अपनी ही बातों से पलटने लगते हैं।

योगगुरु रामदेव की कंपनी है पतंजलि (Photo-Reuters)

अभी हाल ही में योग गुरु बाबा रामदेव ने एलोपैथी चिकित्सा पद्धति को लेकर एक बयान दिया था, जिस पर देश भर में विवाद शुरू हो गया था। एलोपैथी डॉक्टरों ने रामदेव के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सरकार से उन पर कार्रवाई करने और उनकी पतंजलि योगपीठ पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। बाद में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन के कहने पर वे अपनी बात वापस भी लेते हैं, लेकिन विवाद थमा नहीं। डॉक्टरों की नाराजगी जारी है। हालांकि कई लोग बाबा रामदेव के समर्थन में भी खड़े हो गए थे।

विरोध करने वालों का कहना है कि बाबा रामदेव कथित रूप से व्यापारी हैं और बाबा के वेश में लोगों से योग और पुरातनपंथी की आड़ में अपने धंधे की बातें करते हैं। कहा कि जब बात व्यापार की आती है तो वे बार-बार अपनी ही बातों से पलटने लगते हैं। कई लोगों ने बाबा रामदेव के पुराने वीडियो शेयर कर उनको याद दिलाया कि कैसे वे अपनी ही बातों पर पलटी मारने लगे थे। लोगों का कहना है कि कभी रामदेव जींस का विरोध करते थे, वे कहा करते थे कि “जींस पहनने से खुजली होती है। टाइट जींस पहनने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। शरीर में पसीने होते हैं। वे पूछते थे कि इतनी गर्मी में उसको पहनने का मतलब क्या है?”  लेकिन बाद में बाबा रामदेव खुद पतंजलि की जींस मार्केट में ले आते हैं। इतना ही नहीं कटी हुई डिजाइन वाली जींस (shredded jeans), जिसका वे मजाक उड़ाते थे, उसे भी अपनी कंपनी का ले आते हैं। लोग ऐसे मजेदार वीडियो शेयर कर उन पर सवाल उठा रहे हैं।

हालांकि कई लोग कह रहे हैं कि बाबा जो कर रहे हैं करें, लेकिन अपना नाम “बाबा रामदेव के बजाए लाला रामदेव” कर लें। दूसरी तरफ राम देव का समर्थन करने वालों का कहना है कि विदेशी कंपनियां अपने सामान यहां बेचकर हमारे अरबों रुपए अपने देश ले जा रही हैं, संकट के समय वे कुछ मदद भी नहीं करती हैं, लेकिन बाबा रामदेव अगर कुछ बेच भी रहे हैं तो वह इसी देश में रहते हैं। इस देश का पैसा इसी देश में लग रहा है, विदेश नहीं जा रहा है। इसमें बुरा क्या है।

इससे पहले रामदेव ने कहा था, “एलोपैथी ऐसी बेकार साइंस है कि पहले इनकी हाईड्रोऑक्सीक्लोरोक्विन फेल हो गई, फिर रेमडेसिविर फेल हो गई। फिर एंटीबायोटिक्स इनके फेल हो गए, स्टेरॉयड फेल हो गए। प्लाज्मा थेरेपी के ऊपर भी बैन लग गया। आइवरमेक्टिन भी फेल हो गई। बुखार के लिए फैबिफ्लू दे रहे हैं, वो भी फेल है।”

रामदेव ने आगे कहा था, “लोग कह रहे हैं कि यह क्या तमाशा हो रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि आप बॉडी का तापमान उतार देते हो, लेकिन शरीर के अंदर उस वायरस को खत्म नहीं कर रहे हो। जिस कारण बुखार हो रहा है उसका तो निवारण तुम्हारे पास है नहीं। इसलिए मैं जो बात कह रहा हूं, उस पर हो सकता है कि कुछ लोग इस पर बड़ा विवाद करें। लाखों लोगों की मौत एलोपैथी की दवा खाने से हुई है। जितने लोगों की मौत हॉस्पिटल न जाने और ऑक्सीजन न मिलने से हुई है, उससे ज्यादा मौतें एलोपैथी की वजह से हुई है। स्टेरॉयड की वजह से हुई है।”

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