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‘क्वॉड’ समूह की कवायद: क्या सफल हो पाएगी चीन की घेरेबंदी

हाल में अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच ‘क्वॉड’ समूह को लेकर बात हुई है। चीन ने भारत को घेरने के लिए ‘स्ट्रिंग आफ पर्ल’ (पड़ोसी मुल्कों में निवेश की कूटनीतिक कवायद) बनाया है। ‘क्वॉड’ समूह को इसके सदस्य देश ‘एशियाई नाटो’ का रूप देने की तैयारी में हैं। जानकारों का मानना है कि क्वॉड के जरिए चीन की नस दबाई जा सकती है।

मालाबार संयुक्त सैन्य अभ्यास (फाइल फोटो)

चीन के साथ सीमा पर तनाव के बीच भारत उसे कूटनीतिक, सामरिक और आर्थिक मोर्चे पर लगातार घेर रहा है। चीन पर कैसे काबू किया जाए, इसको लेकर ‘क्वॉडिलेटेरल सिक्योरिटी डॉयलॉग’ (क्वॉड) समूह सक्रिय हुआ है। इस समूह के जरिए चीन पर दबाव बनाने की कवायद चल रही है। हाल में अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच ‘क्वॉड’ समूह को लेकर बात हुई है। चीन ने भारत को घेरने के लिए ‘स्ट्रिंग आफ पर्ल’ (पड़ोसी मुल्कों में निवेश की कूटनीतिक कवायद) बनाया है। ‘क्वॉड’ समूह को इसके सदस्य देश ‘एशियाई नाटो’ का रूप देने की तैयारी में हैं। जानकारों का मानना है कि क्वॉड के जरिए चीन की नस दबाई जा सकती है।

भारत की रणनीतिक साझेदारी
इस समूह के देशों के साथ भारत ने रणनीतिक साझेदारी कर रखी है। अमेरिका ने भारत को अपना रक्षा सहभागी (डिफेंस पार्टनर) घोषित कर रखा है। दोनों देशों में जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे से सैन्य खुफिया सूचनाएं साझा करने एवं रक्षा सहयोग का करार है। भारत-आॅस्ट्रेलिया के बीच रक्षा संबंध वर्षों पुराने हैं। विश्व युद्ध में भारतीय और आॅस्ट्रेलियाई सैनिक साथ लड़े थे। 1962 में जब भारत-चीन के बीच युद्ध हुआ, उस समय भी आॅस्ट्रेलिया ने भारत को सैन्य सहायता दी थी। हर दो साल में दोनों देशों की नौसेनाएं हिंद महासागर में अभ्यास करती हैं। आॅस्ट्रेलिया ने अरुणाचल प्रदेश के मुद्दे पर चीन के दावे को नकारा है। तीसरे देश जापान के साथ भारत ने 2008 में सुरक्षा समझौता किया। दोनों देश एशिया-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री डकैती जैसी घटनाओं को रोकने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। भारत, जापान और अमेरिका की नौसेनाएं मालाबार में एक साथ सैन्य अभ्यास भी करती हैं। क्वॉड से इतर दो देश इजराइल और फ्रांस भी चीन के मुद्दे पर भारत के साथ दिख रहे हैं।

चीन के साथ कौन-कौन
‘क्वॉड’ समूह के जवाब में चीन के साथ पाकिस्तान, उत्तर कोरिया दिख रहे हैं। पाकिस्तान ने 2008 से 2017 के बीच चीन से छह अरब डॉलर के हथियार खरीदे हैं। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, अगर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव बढ़ा, तो भारत को चीन के अलावा पाकिस्तान और नेपाल की सेनाओं का दबाव भी झेलना पड़ेगा। पाकिस्तान इसलिए भी चीन का साथ देगा, क्योंकि अब वो पूरी तरह से उस पर निर्भर है। 2008 से 2017 के बीच पाकिस्तान ने चीन से छह अरब डॉलर (आज के हिसाब से 45 हजार 600 करोड़ रुपए) के रक्षा उपकरण और हथियार खरीदे हैं। पाकिस्तान में चीन ने निवेश भी कर रखा है। दूसरी ओर, चीन और उत्तर कोरिया में समझौता है कि हमला हुआ तो साथ देंगे। 1961 की इस संधि में सैन्य सहयोग भी शामिल है। चीन उत्तर कोरिया में किम जोंग-उन का समर्थन भी करता है।

पड़ोसियों से चीन के संबंध
चीन एशिया में बड़ी ताकत बनकर उभरना चाहता है और काफी हद तक कामयाब दिख रहा है। लेकिन उसके पड़ोसियों से उसके संबंध खराब भी हुए हैं। भारत के अलावा उसका रूस के साथ भी सीमा विवाद था। हालांकि, उसे 2000 में सुलझा लिया गया था। लेकिन ताइवान और हांगकांग में चीन के तेवरों को चुनौती मिल ही रही है। दोनों भारत के साथ अच्छे संबंध रखते हैं। दक्षिणी चीन सागर में चीन के बढ़ते दबदबे से भी सब परेशान हैं। यहां के नटूना आइलैंड को लेकर वर्षों से चीन और इंडोनेशिया के बीच विवाद है। पार्सेल और स्पार्टी आइलैंड को लेकर चीन-वियतनाम आमने-सामने हैं। दक्षिणी चीन सागर में ही जेम्स शेल पर चीन और मलेशिया- दोनों दावा करते हैं।

हो गई घेरेबंदी की शुरुआत
दक्षिण चीन सागर को लेकर मची खींचतान के बीच चीन की दादागीरी के खिलाफ कवायद शुरू हो गई है। अमेरिका ने अपने सबसे बड़े युद्धपोत यूएसएस निमित्ज को अंडमान सागर में उतार दिया है। इस युद्धपोत पर घातक मिसाइलें हैं। 90 लड़ाकू जेट, 3000 नौसैनिकों के साथ मलक्का की खाड़ी के रास्ते अंडमान-निकोबार के पास पहुंचा है। यह पोत युद्धाभ्यास के लिए लाया गया है, जिसमें भारतीय सेना भी शामिल होगी। लेकिन इस कदम को चीन के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है। जिस मलक्का स्ट्रेट यह पोत अंडमान निकोबार द्वीप समूह लाया गया है, उस रास्ते से चीन का सबसे अधिक समुद्री व्यापार होता है। इसे चीन के लिए चेतावनी माना जा रहा है कि उसने कोई भी हरकत करने की कोशिश की तो अमेरिका-भारत मिलकर चीन को मलक्का स्ट्रेट में घेर सकते हैं।

क्या कहते हैं जानकार

क्वॉड देशों की खुफिया एजंसियां एक-दूसरे से सूचनाएं साझा कर रही हैं। भारतीय-प्रशांत क्षेत्र में चीन अब अलग-थलग पड़ रहा है। क्वॉड देशों ने कूटनीतिक, आर्थिक और रक्षा कवायद तेज हुई है, जो पहले कभी नहीं दिखी।
– रियर एडमिरल (सेवानिवृत्त) सुदर्शन श्रीखंडे, नौसैन्य खुफिया इकाई के पूर्व प्रमुख

दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में चीन की गतिविधियां चिंताजनक हैं। हिंद महासागरीय क्षेत्र में उसकी पैठ की कोशिश अवैध हैं और उन्हें सफल नहीं होने दिया जाएगा। जल्द ही क्वॉड में कई नए दोस्त जुड़ेंगे, जो चीन को अलग-थलग करेंगे।
– बेरी ओ फरेल, भारत में आस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त

क्या है ‘क्वॉड’ समूह
2007 में जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने द ‘क्वॉडिलेटेरल सिक्योरिटी डॉयलॉग’ (क्वॉड) का प्रस्ताव रखा था, जिसे भारत, अमेरिका और आॅस्ट्रेलिया ने समर्थन दिया था। ये चारों सदस्य देश हैं। 10 साल तक यह निष्क्रिय ही रहा, लेकिन 2017 के बाद से इसकी लगातार बैठकें हो रही हैं। मार्च में कोरोना संक्रमण के हालात को लेकर इस समूह की बैठक हुई थी, जिसमें पहली बार न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया और वियतनाम भी शामिल हुए थे। ये देश मालाबार नाम से संयुक्त सैन्य अभ्यास भी करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एशिया में चीन की बढ़ती आर्थिक और सैन्य विस्तारवाद पर लगाम लगाने के लिए इस समूह का गठन किया गया है।

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