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गायत्री मंत्र से ठीक होगा कोरोना? मरीजों पर ट्रायल शुरू, विज्ञान-प्रौद्योगिकी मंत्रालय कर रहा रिसर्च की फंडिंग, जानें पूरा मामला

स्टडी में शामिल मरीजों के दो समूह बनाए गए हैं। एक ग्रुप को सुबह और शाम प्राणायाम के एक घंटे के सत्र के अलावा गायत्री मंत्र का जाप करने के लिए कहा गया है, जबकि दूसरे ग्रुप को कोरोना का स्टैंडर्ड इलाज दिया जा रहा है।

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: May 8, 2021 8:27 AM
दिल्ली के एक अस्पताल में कोरोना मरीजों को योगा कराते स्वास्थ्यकर्मी। (फाइल फोटो- PTI)

भारत में कोरोनावायरस का घातक असर देखा जा रहा है। हर दिन हो रही रिकॉर्ड मौतों के बीच सरकार लगातार जीवनरक्षक दवाओं और ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने में जुटी है। हालांकि, दूसरी तरफ सरकारी विभाग कोरोना के इलाज की तकनीक खोजने में भी जुटे हैं। इसी कड़ी में भारत का विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय कोरोना को रोकने के लिए मरीजों पर गायत्री मंत्र के जाप का क्लिनिकल ट्रायल कर रहा है।

क्या है सरकार की तैयारी?: बताया गया है कि केंद्र सरकार ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के साथ मिलकर अस्पताल में भर्ती कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज के लिए गायत्री मंत्र पर रिसर्च कर रही है। इसके लिए तकरीबन 20 मरीजों को स्टडी में शामिल किया गया है। इसके ट्रायल में शामिल डॉक्टरों ने 10-10 मरीजों के दो ग्रुप बनाए हैं। इनमें एक ग्रुप को सुबह और शाम को प्राणायाम के एक घंटे के सत्र के अलावा गायत्री मंत्र का जाप करने के लिए कहा गया है, जबकि दूसरे ग्रुप को कोरोना का स्टैंडर्ड इलाज दिया जा रहा है।

डॉक्टरों ने इस ट्रायल को मरीजों पर गायत्री मंत्र और प्राणायम के प्रभाव देखने के लिए किया है। इस रिसर्च में शामिल एम्स की फेफड़ा रोग विशेषज्ञ रुचि दुआ का कहना है कि कोरोना से संक्रमित लोगों को पहले ही सांस लेने वाली एक्सरसाइज करने की सलाह दी जाती है। इसलिए हमें लगा कि मरीजों पर गायत्री मंत्र और प्राणायाम के असर को भी देखना चाहिए। इसके कुछ फायदे मानसिक प्रभाव के रूप में भी दिख सकते हैं।

सरकारी की तरफ से दी गई फंडिंग: एक रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय विज्ञान-प्रोद्योगिकी विभाग ने इस स्टडी के लिए तीन लाख रुपए की ग्रांट दी है। हालांकि, इस स्टडी से दूर रहने वाले कुछ रिसर्चरों का कहना है कि वे सरकार के फैसले से बिल्कुल भी नहीं चौंके हैं, क्योंकि कुछ वैज्ञानिक पहले ही इसे प्राचीन भारत की परंपरा से जुड़े प्रोजेक्ट्स की तरफ झुकाव के तौर पर देख चुके हैं। इस रिसर्च के बाद रिपोर्ट प्रकाशित करने के बारे में निर्णय लिया जाएगा।

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