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इजराइल-फलस्तीन संघर्षः ‘बरसे रॉकेट, दहलीं इमारतें’, गाजा पट्टी के पास अपनों को खोने वाले भारतीयों की उड़ी रातों की नींद

भारतीय नर्स मारिया के मुताबिक, केरल से कई नर्सें गाजा के करीबी इलाकों में काम कर रही हैं। यहां वे किसी तरह सुरक्षित महसूस करना चाहती हैं।

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र येरुशलम | Updated: May 15, 2021 9:51 AM
इजराइल-फलस्तीन में जारी संघर्ष के बीच गाजा पट्टी से भागने को मजबूर हैं परिवार। (फोटो- Reuters)

इजराइल और फलस्तीन के बीच संघर्ष की स्थिति और गंभीर होती जा रही है। जहां फलस्तीन में छिपा आतंकी संगठन- हमास लगातार इजराइल पर हमले कर रहा है, वहीं इजराइल भी गाजा पट्टी पर जबरदस्त रॉकेट बरसा रहा है। बीते कुछ दिनों में इन संघर्ष के चलते जहां फलस्तीन में करीब 150 लोग जान गंवा चुके हैं, वहीं इजराइल में भी दर्जनभर जानें गई हैं। इस बीच इजराइल में रहने वाले भारतीय समुदाय की परेशानियां भी इस टकराव के कारण बढ़ चुकी हैं। हर वक्त बमबारी और डर के इस माहौल से उनकी आजीविका से लेकर उनकी जिंदगी तक पर खतरा पैदा हो गया है।

बता दें कि मंगलवार को इजराइल-फलस्तीन के इसी संघर्ष के बीच इजराइली शहर एश्केलॉन में हमास का एक रॉकेट गिरा था, जिसमें एक भारतीय नर्स की जान चली गई थी। इस घटना के बाद से ही इजराइल में रहने वाले कई भारतीय नर्सिंग प्रोफेशनलों में डर फैला है। जैसे-जैसे इजराइल की सेना गाजा पट्टी पर आगे बढ़ कर टैंक इकट्ठा करती जा रही है यहां रहने वाले लोगों के सामने संकट खड़ा हो गया है।

गाजा पट्टी से 38 किमी दूर इजराइल के एश्दोद शहर की रहने वाली एक भारतीय नर्स मारिया जोसेफ (33) ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि दोनों देशों के इसी संघर्ष की वजह से वे चार दिन से सो नहीं पाई हैं। मारिया ने बताया- “एक रात पहले ही हमारे क्षेत्र में रॉकेट गिर रहे थे। वहां बिल्डिंग हिल रही थीं और हम अपने ग्रुप्स में मैसेज कर पूछ रहे थे कि सभी सुरक्षित हैं या नहीं।” मारिया के मुताबिक, भारत के केरल से कई नर्सें गाजा के करीबी इलाकों में काम कर रही हैं। यहां वे किसी तरह सुरक्षित महसूस करना चाहती हैं।

मारिया पिछले करीब ढाई साल से एश्दोद में हैं और वे यहां 88 साल की एक महिला की केयरटेकिंग कर रही हैं। उनका कहना है कि जिस घर में वे रह रही हैं उसमें बम शेल्टर भी नहीं है। ऐसे में वे मरीज को छोड़कर कहीं और भी नहीं जा सकतीं।

इजराइल में मौजूद भारतीय दूतावास के 2019 तक के मौजूद डेटा के मतुाबिक, देश में 14 हजार भारतीय हैं। इनमें 13 हजार से ज्यादा केयरगिवर्स के तौर पर काम कर रहे हैं। दरअसल, इजराइल में केयरगिवर्स के लिए आव्रजन प्रक्रिया आसान है। केरल सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ नॉन-रेजिडेंट केरलाइट अफेयर्स के रिक्रूटमेंट मैनेजर अजीत कोलासेरी के मुताबिक, केरल में इजराइली वीजा की काफी मांग है। इजराइल एक ECNR देश है यानी यहां 10वीं के बाद की पढ़ाई कर चुके लोगों को इमिग्रेशन पर जांच नहीं करानी पड़ती, इसलिए कोई भी यहां काम कर सकता है।

भारत लाया जा रहा इजराइल में मारी गई केरल की नर्स का शव: इजराइल में गाजा से फलस्तीनी उग्रवादियों के रॉकेट हमले में मारी गई भारतीय महिला सौम्या संतोष के शव को शुक्रवार शाम में भारत भेजा गया। 30 वर्षीय सौम्या के शव को लेकर विमान बेन गुरियन हवाई अड्डे से रवाना हुआ। इससे पहले विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने ट्वीट करके जानकारी दी कि सौम्या के शव को इजराइल से नई दिल्ली होते हुए केरल लाया जा रहा है।

इजराइल में 11 मई को फलस्तीन की ओर से किए गए रॉकेट हमले में सौम्या की मौत हो गयी थी। मुरलीधरन ने टि्वटर पर लिखा, ‘‘गाजा से दागे गए रॉकेट के हमले में मारी गयी श्रीमती सौम्या संतोष के पार्थिव शरीर को इजराइल से नयी दिल्ली होते हुए केरल लाया जा रहा है। सौम्या के पार्थिव शरीर को कल ही उनके पैतृक स्थान पहुंचाया जाएगा। मैं व्यक्तिगत तौर पर नयी दिल्ली में मौजूद रहूंगा। उनकी आत्मा को शांति मिले।’’

केरल के इदुक्की जिले की रहने वाली 30 साल की सौम्या भी इजराइल में एक वृद्ध महिला की देखभाल का काम कर रही थी। एश्केलोन शहर में रहने वाली सौम्या मंगलवार को वीडियो कॉल के जरिए अपने पति संतोष से बात कर रहीं थीं कि तभी उनके घर पर एक रॉकेट गिरा। सौम्या का एक नौ साल का बेटा भी है।

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