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भारत-अमेरिका के बीच तीन स्तरों पर हो रही रक्षा सहयोग, इंटेलिजेंस और डेटा एक्सचेंज पर बात, महीने में विदेश मंत्रियों ने दो बार की चर्चा, चीन में हड़कंप

बीते सोमवार को भारत ने अमेरिकी नौसेना के साथ अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के नजदीक युद्धाभ्यास किया। इस युद्धाभ्यास में दक्षिण चीन सागर से लौट रहे अमेरिकी विमानवाहक युद्धपोत यूएसएस निमित्ज ने भी हिस्सा लिया।

Translated By Ikram नई दिल्ली | Updated: July 22, 2020 3:23 PM
अमेरिकी विदेश मंत्री माइकल आर पोम्पियो और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर।

भारत-चीन सीमा विवाद के बीच नई दिल्ली और वाशिंगटन डीसी के बीच सैन्य, इंटेलिजेंस और डेटा एक्सचेंज के स्तर पर बातचीत आगे बढ़ने पर ड्रैगन की मुसीबतें बढ़ गई हैं। पिछले एक महीने में दोनों देशों ने एक अभूतपूर्व स्तर पर खुफिया और सैन्य सहयोग को काफी तेज कर दिया है। दोनों देश लद्दाख में एलएसी के पास भारतीय और चीनी सैनिकों में तनावपूर्ण सैन्य गतिरोध के बीच खुफिया सूचना साझा कर रहे हैं। भारत-चीन सीमा विवाद को अब 11 सप्ताह हो गए हैं।

अमेरिकी विदेश मंत्री माइकल आर पोम्पियो ने जून के तीसरे सप्ताह में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से बात की और इस सहयोग के लिए दोनों देशों के बीच कम से कम दो बार फोन पर उच्च-स्तरीय बातचीत भी हुई। द इंडियन एक्सप्रेस को पता चला है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अपने अमेरिकी समकक्ष रॉबर्ट सी ओ ब्रायन से बात की है। इसके अलावा संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ जनरल मार्क मिले और सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने पिछले कुछ हफ्तों में बातचीत की है। इन बातचीतों ने दोनों देशों की सुरक्षा, सैन्य और खुफिया ब्रांचों के बीच सूचना साझा करने को सुगम बनाया है।

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इधर बीते सोमवार को भारत ने अमेरिकी नौसेना के साथ अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के नजदीक युद्धाभ्यास किया। इस युद्धाभ्यास में दक्षिण चीन सागर से लौट रहे अमेरिकी विमानवाहक युद्धपोत यूएसएस निमित्ज ने भी हिस्सा लिया। यूएसएस निमित्ज को दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा घातक हथियारों से लैस विमानवाहक युद्धपोत माना जाता है। इस पर परमाणु हथियारों के साथ ही अत्याधुनिक सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमानों की भी तैनाती है। अमेरिकी नौसेना ने कहा बताया कि निमित्ज कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, अभी भारत-प्रशांत के समर्थन में हिंद महासागर में तैनात है।

सूत्रों ने बताया कि पोम्पियो और जयशंकर के बीच फोन पर बातचीत ने ये मंच तैयार किया और पहले से मौजूद सुरक्षा सहयोग तंत्र को और आगे बढ़ाया। इसके अलावा रक्षा सचिव मार्क टी ऐजेल ने जुलाई के दूसरे सप्ताह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को फोन किया था।

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