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Coronavirus: भारतीय दूतावास न हमारा फोन उठा रहा है ना ईमेल का जवाब दे रहा है, फिलीपींस में रहने वाले सैकड़ों भारतीय छात्र मलेशिया में फंसे

बेंगलुरू के रहने वाले छात्र कोटिरेड्डी ने यह भी कहा कि यहां स्थिति अचानक ऐसी हो गई। बाजार बंद हो गए। यहां तक कि हमारी कैंटीन भी बंद हो गई।

Edited By Anil Kumar नई दिल्ली | March 18, 2020 9:01 PM
करीब 200 से अधिक छात्र हैं जो भारत की तरफ से यात्रा प्रतिबंध लगने से पहले मनीला छोड़ चुके हैं। (फोटोः एल. कोटिरेड्डी)

Naman Shah

कोरोनावायरस के कारण फिलीपींस में सैकड़ों भारतीय छात्र ट्रांजिट में फंसे हुए हैं। कोरोनावायरस के खतरे को देखते हुए कई प्रभावित देशों ने लॉकडाउन और शटडाउन कर रखा है। इस वजह से विदेश में रहने वाले भारतीय लोगों खासकर छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फिलीपींस में कई भारतीय छात्र फंसे हुए हैं।

इनमें से अधिकतर वो छात्र हैं जो यहां एमबीबीएस की पढ़ाई करने आए हुए हैं। मालूम हो कि मेडिकल की पढ़ाई को लेकर फिलीपींस भारतीयों के पसंदीदा देशों में शामिल है। कोरोनावायरस के मामले सामने आने के बाद से राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते ने इसे आपदा घोषित कर दिया है। इतना ही नहीं सरकार 19 मार्च के बाद विदेश यात्रा पर रोक भी लगाने जा रही है।

फिलीपींस सरकार के इस फैसले के बाद से यहां रहने वाले भारतीय छात्र मुश्किलों में फंस गए हैं। यहां साइकोलॉजी की पढ़ाई करने वाले छात्र एल. कोटिरेड्डी ने फोन पर बताया कि 16 मार्च को यह खबर मिली की उनलोगों के पास फिलीपींस छोड़ने के लिए सिर्फ 72 घंटे हैं। इसके बाद खतरे के लिए वह खुद जिम्मेदार होंगे।

बेंगलुरू के रहने वाले कोट्टिरेड्डी ने यह भी कहा कि यहां स्थिति अचानक ऐसी हो गई। बाजार बंद हो गए। यहां तक कि हमारी कैंटीन भी बंद हो गई। हमें यह इस बारे में आश्वस्त नहीं है कि हम खाना खा पाएंगे या नहीं। ऐसे में हमनें अगले ही दिन भारत के लिए फ्लाइट बुक कर ली। वहीं, 17 मार्च को भारत ने अचानक अफगानिस्तान, फिलीपींस और मलेशिया से यात्रियों के आने पर रोक लगा दी।

कोटिरेड्डी ने कहा कि हम इमिग्रेशन क्लियर कर चुके हैं लेकिन भारत सरकार के निर्देश के बाद हम यहां फंस गए हैं। कोटिरेड्डी ने बताया कि एक छात्र को विमान में सवार होने के बाद उतार दिया गया। भारत आने के लिए छात्रों को कुआलालंपुर में ट्रांजिट करना होता है। भारत की तरफ से यात्रा पर प्रतिबंध लगने के बाद से हमने कहा गया कि कम से कम कुआलालंपुर पहुंच जाएं लेकिन इससे भी इनकार कर दिया गया। मलेशिया की तरफ से यात्रा प्रतिबंध लगा दिया गया है।

ऐसे में करीब 200 से अधिक छात्र हैं जो भारत की तरफ से यात्रा प्रतिबंध लगने से पहले मनीला छोड़ चुके हैं। ये छात्र अब कुआलालंपुर में फंस गए हैं। इन छात्रों ने सोशल मीडिया पर खुद को यहां से निकालने की गुहार लगाई है। दिल्ली की रहने वाला छात्रा गरिमा कालरा ने कहा कि वे लोग हमारे कॉल और ई-मेल का जवाब भी नहीं दे रहे हैं।

तेलंगाना के एक छात्र ने कहा कि हमें पहले आश्वासन मिला था कि हमारी फ्लाइट सुबह बुधवार 10 बजे रवाना होगी लेकिन बाद में उसे शाम के लिए टाल दिया गया। अभी तक हमें किसी तरह का कन्फर्मेशन नहीं मिला है। छात्र मनीला में लगातार भारतीय दूतावास के संपर्क में हैं लेकिन उन्हें वहां से किसी भी तरह का संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है।

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