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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, वेस्ट बंगाल समेत इन राज्यों को थमाया नोटिस, 2 हफ्ते बाद सुनवाई

जस्टिस एसए बोबड़े की नेतृत्व वाली तीन जजों की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस देते हुए दो सप्ताह के लिए सुनवाई टाल दी है।

Supreme Court, India, Ayushman Bharatसुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, वेस्ट बंगाल, तेलंगाना को नोटिस थमाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिक पर सुनवाई के दौरान ओडिशा, तेलंगाना, दिल्ली और पश्चिम बंगाल को नोटिस भेजा है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि इन सूबों में आयुषमान भारत योजना सही से लागू नहीं की गई है।

जस्टिस एसए बोबड़े की नेतृत्व वाली तीन जजों की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस देते हुए दो सप्ताह के लिए सुनवाई टाल दी है। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा है कि देश के इन चार राज्यों में स्वास्थ्य से जुड़ी इस योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है।

पेरला शेखर राव की तरफ से वकील हितेंद्र नाथ रथ और श्रवण कुमार द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि भारत में 6,400 करोड़ के वार्षिक बजट के साथ देश के 50 करोड़ लोगों के लिए आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना लागू की जा रही है। याचिकाकर्ता ने कहा, “इस योजना के तहत गरीब लोग कोविड​​-19 महामारी के लिए परीक्षण और उपचार सहित विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के लिए उपचार का लाभ उठाने के हकदार हैं।”

याचिकाकर्ता ने आगे कहा कि तेलंगाना, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के अलावा अन्य राज्यों में इस योजना को लागू किया जा रहा है। जबकि इन राज्यों में स्वास्थ्य सुविधाएं ना होने के चलते लोगों को कोरोना महामारी के चलते निजी अस्पतालों में बड़ी रकम चुकानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाएं ना मिलने और योजना का पालन नहीं करने के चलते लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। यह संविधा के अनुच्छेद 14 और 21 के खिलाफ है।

बता दें कि आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अब तक देश के 10.74 करोड़ गरीब परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये के मुफ्त इलाज की गारंटी का लक्ष्य तय किया गया है। इसके तहत मरीजों को कैशलेस और पेपरलेस इलाज मुहैया कराया जाता है। इस स्कीम के लाभार्थियों के इलाज के लिए देश भर के तहत 20,761 निजी और सरकारी अस्पतालों को पैनल में शामिल किया गया है।

नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के मुताबिक इस स्कीम के तहत अब तक 88 लाख केस अस्पताल पहुंचे हैं, जिनमें से सभी का इलाज किया गया है। स्कीम के तहत इस इलाज पर 12,169 करोड़ रुपये का खर्च आया है। इस स्कीम को लागू करने के लिए नेशनल हेल्थ अथॉरिटी को ही नोडल एजेंसी बनाया गया है।

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