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दिल्ली: ठंड का बढ़ता असर, एम्स के बाहर इलाज के इंतजार में मरीज

एक मरीज के परिजन राजीव ने बताया कि वे उत्तर प्रदेश से इलाज के लिए आए कई दिन से एम्स में रोज लाइन लगा रहे हैं, पर कार्ड नहीं बन रहा है। यहां कहा जाता है कि पहले आनलाइन समय लो फिर परचा बनेगा। हम आनलाइन का कोई काम नहीं जानते।

Cold waveदिल्ली में ठंड के बीच एम्स के बाहर इलाज के इंतजार में फुटपाथ पर बैठे मरीज।

जहां दिल्ली में ठंड ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। वहीं दिल्ली एम्स के सामने खुले में फुटपाथ पर जीवन बसर कर इलाज का इंतजार कर रहे लोगों की कोई सुध लेने वाला नहीं है। कोरोना महामारी के बीच दिल्ली में एम्स के बाहर बड़ी संख्या में मरीज व उनके परिजन इलाज के इंतजार में फुटपाथ पर जीवन गुजार रहे हैं। इनकी कोई सुध लेने वाला नहीं है। खाने व रहने का ठिकाना न होने से इन मरीजों की मुश्किलें कई गुणा बढ़ गई हैं। उनमें से कई का न तो अभी तक एम्स में इलाज शुरू हो पाया है न ही उनके ठहरने का कोई प्रबंध।

इनमें से एक मरीज के परिजन राजीव ने बताया कि वे उत्तर प्रदेश से इलाज के लिए आए कई दिन से एम्स में रोज लाइन लगा रहे हैं, पर कार्ड नहीं बन रहा है। यहां कहा जाता है कि पहले आनलाइन समय लो फिर परचा बनेगा। हम आनलाइन का कोई काम नहीं जानते। ऐसे में कहां से व कैसे समय लें, जबकि अपने बच्चे के दिल में सुराग का इलाज कराने आए मनीष ने बताया कि उनको कई अस्पतालों में चक्कर लगाने के बावजूद इलाज का कोई इंतजाम नहीं हो सका।

वे बताते हैं कि उनके यहां कहीं ठहरने का कोई संसाधन नहीं है। वे बताते हैं कि कोरोना काल में उनकी नौकरी भी छूट गई। रहने खाने का सामान जुटाना मुश्किल है ऐसे में कहां से मास्क खरीदें कहां से सैनिटाइजर। वहीं एम्स के सुरक्षाकर्मी एम्स परिसर में रुकने नहीं देते। हार कर कपड़े की ओट बना कर हम इस फुटपाथ पर रुके हैं। यहीं खून में खराबी का इलाज कराने आए रोशनी के भाई ने बताया कि उनको कई दिन से कोशिश के बावजूद दिखाने के लिए समय नहीं मिल पाया। एक दिन दिखाने के बावजूद आपातकाल में कहा कि जाओ ओपीडी में दिखाओ।

चालान काटने वाले भी नहीं देख रहे बेबसी
एम्स के पूर्व आरडीए अध्यक्ष विजय ने कहा है कि लोगों का बात बात पर चालान काटने वाली मशीनरी को भी इनकी बेबसी नहीं दिखाई पड़ रही है। इनके कम से कम ठंड व कोरोना से बचाव का तो उपाय किया ही जाना चाहिए। एम्स के सुरक्षाकर्मी भी उनको परिसर से बाहर खदेड़ कर सुकून पाते हैं। इनकी ओर नीति निर्माताओं का ध्यान नहीं है। यह दुखद है। डॉ विजय ने आलाकमान का भी ट्विटर के माध्यम से ध्यान खींचा है।

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