ताज़ा खबर
 

CAA और NRC पर सरकार की सफाई- जो 1987 से पहले जन्‍मे या ज‍िनके माता-पिता 1987 से पहले पैदा हुए, वे सभी भारतीय हैं

गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि किसी भी भारतीय को उसके माता-पिता या दादा-दादी के 1971 से पहले के जन्म प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज दिखाकर नागरिकता साबित करने के लिए नहीं कहा जाएगा।

संशोधित नागरिकता कानून और एनआरसी को लेकर देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने सफाई पेश की है।(फाइल फोटो)

संशोधित नागरिकता कानून और एनआरसी को लेकर देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने सफाई पेश की है। एक आधिकारिक सूत्र के मुताबिक 1987 से पहले भारत में पैदा हुआ कोई भी व्यक्ति या जिसके माता-पिता 1987 से पहले पैदा हुए हों, कानून के अनुसार एक भारतीय नागरिक होंगे। संशोधित नागरिकता कानून या देश में लागू हो रही एनआरसी से किसी को डरने की जरूरत नहीं है।

नागरिकता अधिनियम संशोधन 2004 के मुताबिक असम को छोड़कर शेष देश में अगर किसी के माता-पिता में कोई भी एक भारत का नागरिक है और अवैध अप्रवासी नहीं है तो ऐसे बच्‍चों को भारतीय नागरिक माना जाएगा। अधिकारी के मुतबिक धिकारी ने कहा कि जो कोई भी व्यक्ति भारत में 1987 से पहले जन्मा है, कानून के मुताबिक उसे स्वत: ही भारत का नागरिक माना जाएगा। असम के मामले में कट ऑफ डेट 1971 है।नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और हाल में बने कानून के बारे में सोशल मीडिया पर कई संस्करण प्रसारित किए जाने के बीच यह स्पष्टीकरण आया है । अधिकारी ने कहा कि जिनका जन्म 1987 के पहले भारत में हुआ हो या जिनके माता-पिता का जन्म उस साल के पहले हुआ है, उन्हें कानून के तहत भारतीय माना जाएगा । असम के मामले में भारतीय नागरिक होने की पहचान के लिए 1971 को आधार वर्ष बनाया गया है ।

नागरिकता साबित करने को नहीं मांगे जाएंगे पुराने दस्तावेज- गृह मंत्रालयः गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि किसी भी भारतीय को उसके माता-पिता या दादा-दादी के 1971 से पहले के जन्म प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज दिखाकर नागरिकता साबित करने के लिए नहीं कहा जाएगा। गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘ भारत की नागरिकता जन्मतिथि या जन्मस्थान या दोनों से संबंधित कोई दस्तावेज पेश कर साबित की जा सकती है। ऐसी सूची में ढेर सारे आम दस्तावेज होने की संभावना है ताकि कोई भी भारतीय नाहक परेशान न हो या वह मुश्किलों में नहीं आए।’’ प्रवक्ता ने कहा, ‘‘ भारतीय नागरिकों को 1971 से पहले का अपने माता-पिता/दादा-दादी के पहचान पत्र, जन्मप्रमाणपत्र जैसे दस्तावेजों को पेश कर अपने पुरखों को साबित नहीं करना होगा।’

 

क्रियान्वयन से इनकार नहीं कर सकते राज्य: अधिकारी – केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकारों को संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को खारिज करने की कोई शक्ति प्राप्त नहीं है क्योंकि इसे संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची के तहत लाया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) को भी लागू करने से इनकार नहीं कर सकतीं जो अगले साल लाया जाना है।उनका बयान पश्चिम बंगाल, पंजाब, केरल, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों की उस घोषणा के बाद आया जिसमें उन्होंने सीएए को ‘‘असंवैधानिक’’ करार दिया और कहा कि उनके राज्यों में इसके लिए कोई जगह नहीं है।अधिकारी ने कहा, ‘‘राज्यों को केंद्रीय कानून को खारिज करने की शक्ति प्राप्त नहीं है जो संघ सूची में शामिल है।’’ संविधानी की सातवीं अनुसूची की संघ सूची में रक्षा, विदेश मामले, रेलवे, नागरिकता, किसी विदेशी को देश की नागरिकता देना जैसी 97 चीजें शामिल हैं।

Next Stories
1 ममता बनर्जी के ‘जनमत संग्रह’ पर भड़की BJP, कहा- दीदी बना रही खुद को हंसी का पात्र, स्मृति ईरानी ने यूं साधा निशाना
2 CAA को लेकर यूपी में हिंसा, 6 की मौत; कानपुर में 8 को लगी गोली
3 VIDEO: भूकंप के तेज झटकों से कांप उठी धरती, दिल्ली- NCR समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में मचा हड़कंप
ये पढ़ा क्या ?
X