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अमेठी में मनरेगा के नाम पर घपलेबाजी, 27 करोड़ फर्जी तरीके से निकाले

अमेठी में मनरेगा की राशि से रोजगार और विकास के नाम पर फर्जी तरीके से 27 करोड़ रुपए हड़प लिए गए हैं। जबकि विकास के नाम पर फावडेÞ नहीं उठे हैं।

अमेठी में मनरेगा की राशि से रोजगार और विकास के नाम पर फर्जी तरीके से 27 करोड़ रुपए हड़प लिए गए हैं। जबकि विकास के नाम पर फावडे नहीं उठे हैं।

अमेठी में मनरेगा की राशि से रोजगार और विकास के नाम पर फर्जी तरीके से 27 करोड़ रुपए हड़प लिए गए हैं। जबकि विकास के नाम पर फावडे नहीं उठे हैं। सरकारी कागजों में ग्राम पंचायतें स्मार्ट सिटी बन चुकी हैं। इस घपले की पोल खुलने के बाद प्रमुख सचिव (ग्राम विकास) ने यहां के अफसरों से सरकारी धन का लेखा-जोखा तलब किया है।

सरकारी जवाब तलब के बाद विकास विभाग के अफसरों की नींद उड़ गई है। जिलाधिकारी जगतराज ने कहा कि सरकारी धन की हेराफेरी में कई बीडीओ जेल जाएंगे। इसमें जामो, सिंहपुर, मुसाफिरखाना, अमेठी, संग्रामपुर,और भादर के बीडीओ शामिल हैं। अमेठी के 13 विकासखंडों में 586 ग्राम पंचायतें हैं।

मनरेगा ने इन ग्राम पंचायतों में विकास के लिए खजाने का दरवाजा खुला छोड़ दिया है लेकिन विकास विभाग के अफसर और पंचायतों के प्रतिनिधि जनता का विकास करने के बजाय खुद का विकास करने में जुटे हैं। जिससे ग्राम पंचायतें टका की मोहताज हैं। जबकि पंचायतों में विकास के नाम पर तीन महीने में 27 करोड़ रुपए फर्जी तरीके से निकाल लिए गए हैं। लेकिन पंचायतों में फावडेÞ नहीं उठे है।

मनरेगा में सबसे बड़ा घपला जामो का है। इसके बाद सिंहपुर, जगदीशपुर, अमेठी, भादर, शाहगढ़, संग्रामपुर और भेटुआ की ग्राम पंचायतें हैं। मनरेगा में अप्रैल से जुलाई के बीच जामों में करोड़ 37 लाख 82 हजार रुपए खर्च किए गए है। जबकि इतनी बड़ी राशि तीन महीने में खर्च करना संभव नहीं है। इसके बाद सिंहपुर में तीन करोड़ 25 लाख नौ हजार रुपए, जगदीशपुर में एक करोड़ 99 लाख 38 हजार रूपए खर्च किए है। मनरेगा की राशि से ग्राम पंचायतों ने समानों की खरीदारी भी खूब की है। समानों की खरीदारी में पांच करोड़ 37 लाख 6 हजार रुपए निकाले गए हैं जबकि पंचायतों में सामानों का कुछ अता-पता नहीं है।

पंचायतों में समानों की खरीदारी केवल बिल और वाउचर पर की गई है। अमेठी ब्लाक में दो महीने के अंदर 55 लाख रुपए के काम कराए गए हैं लेकिन जमीन पर कहीं फावडेÞ नहीं चले हैं। इस पर अमेठी के खंड विकास अधिकारी राम आषीश ने कई ग्राम पंचायतों की जमीनी पड़ताल कर चुके हैं। लेकिन उन्हें भी कहीं मजदूर नजर नहीं आए। जबकि कागज के लेखा जोखा में अमेठी की 44 ग्राम पंचायतों में मनरेगा में रोज काम कराए जा रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि मनरेगा का काम केवल अफसरों के कागज पर विकास कर रहा है।

इस घपले में क्षेत्र पंचायतें भी पीछे नहीं हैं। इस योजना में 139.48 करोड़ रुपए निकाले गए हैं। मनरेगा के आंकड़ों में 18416 काम लगातार जारी है। इस काम में 27068 परिवार के 40251 लोग काम पर ड्यूटी बजा रहे हैं। यह अलग बात है कि मनरेगा के मजदूर भले ही दिल्ली, मुंबई, और कोलकाता में बसे हैं लेकिन उनके नाम पर यहां काम चल रहा है। मनरेगा में 1017 परिवार 100 दिन का रोजगार पा चुके हैं। इसमें सबसे ज्यादा 897 मजदूर जामों के हैं जिसके बाद सिंहपुर में 72, जगदीशपुर में 21,भादर में 16 और शाहगढ़ में 11 हैं। बाकी अमेठी, बहादुरपुर, भेटुआ, गौरीगंज,मुसाफिरखाना, संग्रामपुर, बाजारशुकुल और तिलोई में 100 दिन का रोजगार पाने वाले मजदूरों की संख्या शून्य है।

अमेठी में 200745 जॉब कार्ड बने हैं। तीन महीने में 42165 मजदूर रोजगार की मांग कर चुके हैं लेकिन 27068 मजदूरों को काम दिया गया है। जबकि इन तीन महीनों के बीच 27 करोड़ रुपए रोजगार और मजदूरों के नाम पर हड़पे गए हैं।
मनरेगा में इसके पहले भी कई अरब का घोटाला हो चुका है। मनरेगा में घपले का खेल 2006 से अब तक जारी है। मनरेगा घपले की जांच सीबीआइ के पास है, लेकिन सीबीआइ की जांच टीम अब तक अमेठी नहीं पहुंची है। जिससे घपलों का खुला खेल जारी है। इस पर सपा से जुडे उदयराज यादव के मुताबिक अमेठी में सीबीआइ की जांच आने के बाद यहां जेल जाने वालों की संख्या सैकड़ों में होगी।

जिलाधिकारी जगतराज ने कहा कि मनरेगा के सरकारी धन से जिन लोगों ने कोठियां खड़ी की हैं, उन्हें जेल जाने से कोई बचा नहीं पाएगा। अगले महीने पंचायत चुनाव होने वाले हैं इसलिए पंचायत प्रतिनिधि और विकास विभाग के अफसर सरकारी धन हड़पने में जुटे हैं। मनरेगा की राशि से कई विकास अधिकारी और बीडीओ, महंगी गाड़ियां भी खरीद चुके हैं। विकास विभाग के बाबू भी इस खेल में पीछे नहीं हैं। कांग्रेस सांसद डा संजय सिंह ने कहा कि वे मनरेगा के घपलों का मामला राज्यसभा में उठा चुके हैं। लेकिन घपले रुकने के बजाय और बढ़ गए है। जबकि सूबे के खननमंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति ने कहा कि उनकी सरकार में सरकारी धन की हेराफेरी करने वालों के खिलाफ जांच करा रही है। रिपोर्ट आने के बाद मनरेगा का धन हडपने वाले जेल में होंगे।

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