ताज़ा खबर
 

शोध: चांद पर खनन की तैयारी में जुटा ‘नासा’

शुरुआती परियोजना निजी कंपनियों के जरिए वहां से मिट्टी मंगाने और मिट्टी को खरीदने की है। नासा ने कहा है कि चंद्रमा की चट्टानों और मिट्टी को जमा करना और उसे ‘नासा’ को सौंपना, चंद्रमा पर अंतरिक्ष व्यापार शुरू करने की अवधारणा की दिशा में पहला कदम होगा।

चांद की सतह पर खनिज की खनन के लिए अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने दिखाई सक्रियता।

अमेरिकी अंतरिक्ष संस्थान ‘नासा’ ने एलान किया है कि वह चांद की चट्टानों को निजी कंपनियों से खरीदना चाहता है, ताकि चांद पर खनन के कार्यों को शुरू किया जा सके। अंतरिक्ष एजंसी कंपनियों से प्रस्ताव ले रही है कि वे रोवर्स (चांद की सतह पर चलने वाली गाड़ियां) का उपयोग करके चंद्रमा से मिट्टी और पत्थरों को कैसे एकत्र करेंगे।

नासा ने विभिन्न कंपनियों से चांद पर खनिज खनन योजना को लेकर प्रस्ताव मंगाया है। नासा ने योजना बनाई है कि वह चांद से लाए गए 50 से 500 ग्राम तक के नमूनों को खरीदने के लिए क्रमश: 15 हजार और 25 हजार डॉलर तक की राशि का भुगतान करेगा। नासा ने कहा, चंद्रमा की चट्टानों और मिट्टी को इकट्ठा करना और उसे नासा को सौंपना चंद्रमा पर अंतरिक्ष व्यापार शुरू करने की अवधारणा को साकार करने की दिशा में पहला कदम होगा।

इस पहल से भविष्य में अंतरिक्ष उद्यमियों द्वारा चांद की जमीन पर खनन कार्य का तौर-तरीका विकसित करने में मदद मिलेगी। इस पहल से भविष्य के लिए अंतरिक्ष अभियानों में भी मदद मिलेगी। नासा की योजना है कि 2024 से पहले इस तरह के प्रयोग पूरे कर लिए जाएं। नासा ने 2024 तक मानव को फिर से चांद की सतह पर उतारने की योजना बनाई है।

कंपनियों को चांद की सतह पर चंद्रमा की धूल या चट्टानों को इकट्ठा करना होगा। प्रत्येक कंपनी को उनके द्वारा इकट्ठा किए गए नमूनों की तस्वीरों को नासा को भेजना होगा। इसके अलावा इन नमूनों को कहां से इकट्ठा किया गया और इससे संबंधित डाटा भी अंतरिक्ष संस्थान को सौंपना होगा। शुरुआती योजना के मुताबिक, चांद की धरती से जमा किए गए नमूने को 50 से 500 ग्राम के बीच होना चाहिए और भविष्य के मिशन द्वारा संग्रह के लिए तैयार होना चाहिए।

नासा बाद की तारीखों में संग्रह के तरीकों का निर्धारण करेगी। एक ब्लॉग पोस्ट में नासा के प्रशासक जिम ब्रिडेनस्टाइन ने कहा, ‘हम अपनी नीतियों को खोज के एक नए युग में लाने के लिए लगा रहे हैं, जिससे मानव सभ्यता को खासा लाभ होगा।’

ब्रिडेनस्टाइन ने कहा, ‘वाणिज्यिक भागीदारी का लाभ उठाने से हमारी स्थायी, अभिनव, और कम दर में सुरक्षित रूप से चंद्रमा पर लौटने की क्षमता बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा कि नासा की योजनाएं 1967 की बाहरी अंतरिक्ष संधि का उल्लंघन नहीं करेंगी, जो मानती है कि आकाशीय निकाय और अंतरिक्ष स्वामित्व के राष्ट्रीय दावों से मुक्त हैं।’

नासा की इस योजना की नींव 2015 में अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पारित किए गए कानून में पड़ी। इस कानून को बराक ओबामा ने राष्ट्रपति पद पर रहते हुए मंजूरी दी थी। इस कानून के तहत निजी कंपनियों को चांद की धरती पर खनन करने, संपत्ति का अधिकार, वहां पानी, खनिज एवं अन्य पदार्थों के उत्खनन का अधिकार सौंपा गया। ब्रिडेनस्टाइन के मुताबिक, नासा का हालिया कदम दुनिया के 110 देशों के बीच 1967 में हुए ‘आउटर स्पेस ट्रीटी आॅफ 1967’ समझौते के तहत ही है।

इस समझौते में कहा गया है, ‘चांद और अंतरिक्ष के अन्य ग्रह-उपग्रह इस्तेमाल या अन्य किसी भी तरह से किसी देश की राष्ट्रीय संपदा नहीं माने जाएंगे या उनके लिए संप्रभुता का दावा नहीं किया जाएगा।’ उनके मुताबिक, हमें चांद की सतह पर मौजूद बर्फ का इस्तेमाल करना होगा। उससे सांस लेने लायक हवा बनाने, पीने लायक पानी बनाने या रॉकेट ईंधन बनाने की योजना पर काम करना होगा। पिछले साल ट्रंप प्रशासन ने अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर भेजने के मिशन के चार साल पहले 2024 तक चांद की सतह पर रोबोट का समूह उतारने की योजना घोषित की है।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 आइसक्रीम बनाने वाली कंपनी क्वालिटी ने की 1400 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी? CBI ने कंपनी के निदेशकों से जुड़े 8 ठिकानों पर की छापेमारी
2 देशभर में विरोध प्रदर्शन के बीच मोदी सरकार ने बढ़ाया फसलों का समर्थन मूल्य, देखें कितने बढ़ा मूल्य
3 Agriculture Bill पर PM समर्थक अनुपम खेर ने VIDEO शेयर कर कहा- अब किसान अपना मालिक खुद बन चुका है, लोग आईना दिखा करने लगे ट्रोल
IPL 2020 LIVE
X