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शोध: कितना खास है नासा-स्पेसएक्स का ड्रैगन क्रू मिशन

अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में पहली बार एक निजी कंपनी स्पेस-एक्स द्वारा तैयार किया गया यान प्रक्षेपित किया गया। अमेरिकी नासा-स्पेस एक्स के संयुक्त अभियान में 30 मई को अंतरिक्ष यान ड्रैगन क्रू कैप्सूल नासा के दो अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर रवाना किया गया। अगले दिन यह कैप्सूल इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के साथ जुड़ गया।

Author Published on: June 2, 2020 4:42 AM
अमेरिकी कंपनी ‘स्पेस एक्स’ के ‘ड्रैगन क्रू कैप्सूल’ अंतरिक्ष यान ने दो अंतरिक्ष यात्रियों को आइएसएस तक पहुंचाया।

अमेरिकी कंपनी ‘स्पेस एक्स’ के ‘ड्रैगन क्रू कैप्सूल’ (अंतरिक्ष यान) ने दो अंतरिक्ष यात्रियों को आइएसएस तक पहुंचाया है। इस कैप्सूल में कई बातें हैं, जो उसे दूसरे यानों से अलग बनाती हैं। पहली बार एक निजी प्रक्षेपण से अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में पहुंचाया गया। 30 मई को अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क की कंपनी स्पेस एक्स का ड्रैगन क्रू कैप्सूल नासा के दो अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर प्रक्षेपित किया गया। इसके अगले दिन यह कैप्सूल इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के साथ जुड़ गया।

स्पेस एक्स के इस खास यान ‘ड्रैगन क्रू’ को खास तौर पर डिजाइन किया गया है। इसे फाल्कन- 9 रॉकेट द्वारा अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया। इसमें एक बार में सात अंतरिक्ष यात्री भेजे जा सकते हैं। ड्रैगन-2 रीयूजेबल यानी कि बार-बार उपयोग में लाया जा सकने वाला अंतरिक्ष यान है। यह ड्रैगन 1 कार्गो स्पेसक्राफ्ट की अगली पीढ़ी का यान है।

इस यान में अन्य किसी भी अंतरिक्ष यान के मुकाबले काफी जगह है। पहली बार ऐसे कैप्सूल का उपयोग हुआ है, जिसमें सात अंतरिक्ष यात्री एक साथ जा सकते हैं। उसकी ऊंचाई भी अमेरिका के पिछले अपोलो कमांड मॉड्यूल से ज्यादा हैं। इस कैप्सूल में काफी कम नॉब और बटन हैं। इनकी जगह कैप्सूल में टच स्क्रीन को ज्यादा तरजीह दी गई है।

यह यान खुद को अपनेआप ही दूसरे अंतरिक्ष यान से जोड़ सकता है। अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद इस यान ने खुद को स्वत: ही आइएसएस से जोड़ लिया, जिससे कि अंतरिक्ष यात्री आइएसएस में आसानी से प्रवेश कर सकें। यह सुविधा अब तक केवल रूस के सुयोज और प्रोग्रेस यान में ही उपलब्ध थी। इस मिशन के लिए अंतरिक्ष यात्री बॉब बेनकेन और डग हर्ली भेजे गए हैं। दोनों ही नासा के यान से दो-दो बार अंतरिक्ष में जा चुके हैं।

नासा ने इस मिशन में स्पेस एक्स जैसी एक निजी कंपनी की मदद ली- इसकी कई वजहें बताई जा रही हैं। नासा 20 साल से अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन योजना पर काम कर रहा है। रूसी रॉकेट से लॉन्चिंग का खर्च लगातार बढ़ रहा था। इसलिए अमेरिका ने स्पेसएक्स को बड़ी आर्थिक मदद देकर अंतरिक्ष मिशन के लिए मंजूरी दी।

बेनकेन और हर्ले स्पेसएक्स मिशन कंट्रोल के साथ इस बात को सत्यापित करने के लिए काम करेंगे कि अंतरिक्षयान उम्मीद के मुताबिक पर्यावरण नियंत्रण प्रणाली, डिस्प्ले और नियंत्रण प्रणाली का परीक्षण करने, चहलकदमी करने तथा अन्य चीजें सही तरीके से करने में सक्षम है। नौ साल बाद अमेरिकी अंतरिक्ष एजंसी नासा ने अपने इस मिशन को अंजाम दिया है। इस मिशन की सफलता के बाद अमेरिका को अपने अंतरिक्ष मिशन के लिए रूस और यूरोपीय देशों के सहारा नहीं लेना पड़ेगा। करोड़ों-अरबों रुपए खर्च कर रूस और यूरोपीय देशों के रॉकेट से अपने अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस स्टेशन नहीं भेजना पड़ेगा।

इस मिशन में बेनकेन स्पेसक्राफ्ट की डॉकिंग यानी स्पेस स्टेशन से जुड़ाव, अनडॉकिंग यानी स्पेस स्टेशन से अलग होना और उसके रास्ते का निर्धारण करेंगे। बेनकेन इससे पहले दो बार स्पेस स्टेशन जा चुके हैं। एक 2008 में और दूसरा 2010 में। उन्होंने तीन बार स्पेसवॉक किया है।

हर्ले को ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट के कमांडर बनाया गया था। इन्हें लॉन्च, लैंडिंग और रिकवरी की जिम्मेदार दी गई है। डगलस 2009 और 2011 में स्पेस स्टेशन जा चुके हैं। वह पेशे से सिविल इंजीनियर थे। बाद में वर्ष 2000 में नासा से जुड़े। इसके पहले यूएस मरीन कॉर्प्स में लड़ाकू विमान चालक थे।

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