ताज़ा खबर
 

अफगानिस्तान में अमेरिका की जंग में शामिल होना चाहते थे जसवंत सिंह, अटल ने फैसले को किया था वीटो

अमेरिका के एक अन्य दल ने तत्कालीन यूएस डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट स्ट्रोब टैलबॉट के नेतृत्व में भारतीय विदेश मंत्री जसवंत सिंह और तत्कालीन एनएसए ब्रजेश मिश्रा से मुलाकात कर अफगानिस्तान लड़ाई में समर्थन मांगा था।

Author नई दिल्ली | Updated: July 30, 2019 8:36 AM
अटल बिहारी वाजपेयी एडमिरल (रिटायर्ड) सुशील कुमार के साथ(express archive photo )

अमेरिका में साल 2001 में हुए 9/11 के हमले पूरी दुनिया को प्रभावित किया था। खासकर, अमेरिका इस हमले से बुरी तरह से बौखला गया था। यही वजह थी अमेरिका ने इस घटना के तुरंत बाद ही अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया था। गौरतलब बात ये है कि अमेरिका इस जंग में भारत को भी शामिल करने का इच्छुक था। जिस पर तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह भी राजी थे, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इससे इंकार कर दिया था।

दिसंबर, 1998 से लेकर दिसंबर, 2001 तक भारतीय नौसेना के चीफ रहे एडमिरल (रिटायर्ड) सुशील कुमार ने अपनी किताब में इस घटना का उल्लेख किया है। एडमिरल (रिटायर्ड) सुशील कुमार की किताब A Prime Minister To Remembar: Memories of a Military Chief हाल ही में प्रकाशित होकर बाजार में आयी है।

किताब के अनुसार, 9/11 के हमले के बाद अमेरिकी नौसेना के एडमिरल डेनिस ब्लेयर एक बड़े दल, जिसमें कई शीर्ष सैन्य अधिकारी मौजूद थे, भारत दौरे पर आए थे, जहां उन्होंने भारतीय नौसेना के चीफ सुशील कुमार से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में अमेरिकी नौसेना अधिकारी ने बताया था कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति के कहने पर भारत आए हैं और भारत को अफगानिस्तान लड़ाई में शामिल करने के इच्छुक हैं।

वहीं अमेरिका के एक अन्य दल ने तत्कालीन यूएस डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट स्ट्रोब टैलबॉट के नेतृत्व में भारतीय विदेश मंत्री जसवंत सिंह और तत्कालीन एनएसए ब्रजेश मिश्रा से मुलाकात कर अफगानिस्तान लड़ाई में समर्थन मांगा था।

एडमिरल (रिटायर्ड) सुशील कुमार के अनुसार, अमेरिका ने प्रस्ताव दिया था कि लड़ाई के दौरान भारतीय नौसेना, अमेरिकी जहाजों को आपूर्ति और लड़ाई से संबंधी जरुरतों में सहायता देगी। वहीं भारतीय वायुसेना को अपने एयर बेस को अमेरिकी लड़ाकू विमानों के लिए खोलना था। भारतीय सेना को ग्राउंड ऑपरेशन के लिए जवानों को अफगानिस्तान भेजने की मांग की गई थी।

हालांकि तीनों ही सेना के तत्कालीन प्रमुख जनरल एस.पदमनाभन, एयर चीफ मार्शल एवाई टिपनिस और एडमिरल कुमार, इसके पक्ष में नहीं थे। लेकिन कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक में जसवंत सिंह अफगानिस्तान में अमेरिका की मदद करने के समर्थन में थे। उनका तर्क था कि एक तो इससे आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा सकेगी, दूसरा हम दुनिया की सुपरपावर अमेरिका के करीब आ जाएंगे।

एडमिरल (रिटायर्ड) सुशील कुमार के अनुसार, वाजपेयी जी ने बैठक के दौरान उनके इंकार के हावभाव को समझ लिया था और कहा कि ‘हमारे एडमिरल खुश नहीं हैं।’ इसके बाद पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से उनकी राय जाननी चाही तो जॉर्ज फर्नांडिस ने कहा कि ‘हमारी सेना के प्रमुख सब कुछ कह चुके हैं।’

पूर्व नौसेना चीफ याद करते हुए बताते हैं कि सभी की बाते सुनने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने बड़ी समझदारी से कहा कि ‘इसको थोड़ा और सोचना पड़ेगा।’ इसके साथ ही भारत ने अफगानिस्तान की लड़ाई में शामिल नहीं होने का फैसला किया। उल्लेखनीय है कि अमेरिका अभी तक अफगानिस्तान की लड़ाई से नहीं निकल पाया है और लड़ाई बदस्तूर जारी है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 IRCTC Indian Railways: अगले साल तक घटाए जाएंगे 3 लाख कर्मचारी! खराब परफॉर्मेंस वालों पर गिरेगी गाज
2 Weather Forecast Today: मध्य प्रदेश में हो सकती है मूसलाधार बारिश, जारी किया गया अलर्ट
3 J&K: अब पुलिस से मांगी गई मस्जिदों और उनको चलाने वालों की जानकारी! कई आदेशों से घाटी में मचा है हड़कंप
ये पढ़ा क्‍या!
X