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सीबीआई ने किया साफ- आलोक वर्मा रहेंगे डायरेक्‍टर, राकेश अस्‍थाना भी बने रहेंगे नंबर 2; नागेश्वर राव संभालेंगे अंतरिम निदेशक का पद

बकौल सीबीआई प्रवक्ता, "हमें मालूम है कि संगठन की साख और छवि में आने वाली गिरावट के कारण उसका प्रभाव उन महत्वपूर्ण मामलों पर भी पड़ सकता है, जो हम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लड़ रहे हैं।"

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केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) में मची उथल-पुथल के बीच गुरुवार (25 अक्टूबर) शाम संगठन की ओर से सफाई जारी हुई। सीबीआई प्रवक्ता ने कहा कि आलोक वर्मा ही सीबीआई डायरेक्टर रहेंगे, जबकि संगठन में नंबर 2 का ओहदा राकेश अस्थाना का रहेगा। वहीं, अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव उनकी गैर हाजिरी में जरूरी काम-काज संभालेंगे। हालांकि, प्रवक्ता ने यह भी बताया कि ऐसा तब तक ही रहेगा, जब तक केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) इस मामले की जांच नहीं कर लेता। सीबीआई प्रवक्ता का यह बयान तब आया है जब विपक्षी पार्टी केंद्र सरकार पर सीबीआई चीफ को असंवैधानिक तरीके से हटाने का आरोप लगा रहे हैं। इसके अलावा कल यानी शुक्रवार (26 अक्टूबर) को सुप्रीम कोर्ट में आलोक वर्मा की अर्जी पर सुनवाई होनी है।

बकौल सीबीआई प्रवक्ता, “हमें मालूम है कि संगठन की साख और छवि में आने वाली गिरावट के कारण उसका प्रभाव उन महत्वपूर्ण मामलों पर भी पड़ सकता है, जो हम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लड़ रहे हैं। हमारी ओर से जो भी कदम उठाए जा रहे हैं, उनका मकसद यह सुनिश्चित करना है किसी भी हालत में एजेंसी की साख को नुकसान न पहुंचे।”

आपको बता दें कि घूसखोरी के आरोप लगने के बाद सीबीआई के इन दोनों शीर्ष अधिकारियों को छुट्टी पर भेज दिया गया है। ऐसे में सीबीआई की साख और छवि को लेकर कई किस्म के सवालिया निशान खड़े हुए, जिस पर बुधवार (24 अक्टूबर) को पहली बार सरकार की ओर से बयान आया। कैबिनेट की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली और रवि शंकर प्रसाद ने सीबीआई विवाद को विचित्र और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति करार दिया।

वित्त मंत्री ने आगे कहा था कि डायरेक्टर और स्पेशल डायरेक्टर पर आरोप लगे हैं। पर इनकी जांच सरकार नहीं कर सकती। केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के पास जांच का अधिकार है। वित्त मंत्री ने आगे साफ किया कि दोनों अधिकारी फिलहाल छुट्टी पर हैं, जिन पर सीवीसी की सिफारिश से ही कार्रवाई की जा सकती है।

बकौल जेटली, “सीबीआई प्रतिष्ठित जांच एजेंसी है और इसकी गरिमा बरकरार रखने के लिए मामले की सही जांच होना जरूरी है। डायरेक्टर पर स्पेशल डायरेक्टर ने आरोप लगाए हैं, जबकि स्पेशल डायरेक्टर पर सीबीआई ने मामला दर्ज किया था। सीबीआई के शीर्ष अफसरों पर गंभीर आरोप लगे हैं। अब इसकी जांच कौन करेगा? और उस दौरान निष्पक्षता जरूरी होगी। पर सरकार इस मामले की जांच नहीं कर सकती है।”

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