नीतीश के मंत्री से पूछा उनके भ्रष्टाचार पर सवाल तो बोले- ये सब छोड़िए, विकास की बात कीजिए

कुलपति पद से रिटायर होने के बाद वर्ष 2015 में मंत्री डॉ. मेवालाल चौधरी जदयू से टिकट लेकर तारापुर से चुनाव लड़े और जीत गए। हालांकि इसी दौरान उन पर विश्वविद्यालय के 161 सहायक प्राध्यापक-जूनियर साइंटिस्ट के पदों पर 2012 में हुई बहाली में बड़े पैमाने पर धांधली और पैसों के लेन-देन के आरोप लगे।

nitish kumar cabinetजेडीयू नेता मेवालाल चौधरी। (ANI)

बिहार में नीतीश कुमार की सुशासन की सरकार के पद ग्रहण करते ही उनके मंत्री के भ्रष्टाचार पर सवाल उठने लगे हैं। मुंगेर के तारापुर से जनता दल (यू) के निर्वाचित विधायक डॉ. मेवालाल चौधरी मंत्री बनाए गए है। डॉ. मेवालाल चौधरी 2015 में राजनीति में कदम रखने से पहले भागलपुर के सबौर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति थे। उन पर अपने कार्यकाल के दौरान विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति में अनियमितता और घोटाला करने का आरोप है। इस मामले में उन पर 2017 में स्थानीय थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। केस में उन्होंने कोर्ट से अंतरिम जमानत ले ली थी। बाद में पार्टी ने उन्हें निलंबित भी कर दिया था।

मंत्री डॉ. मेवालाल चौधरी से आजतक न्यूज चैनल के संवाददाता उत्कर्ष सिंह ने जब इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि ये सब छोड़िए, विकास की बात कीजिए। कहा कि यह सब पूछने का यहां कोई औचित्य नहीं है। बोले, “वह सब कुछ नहीं है। यह सब कोई बात नहीं है। जरा विकास के बारे में बातें कीजिए न। किस तरह का विकास हो राज्य में. डेवलपमेंट कैसे हो, चौतरफा डेवलपमेंट के बारे में पूछिए। कितनी अच्छी कनेक्टिविटी हो, कितनी अच्छी एरीगेशन हो, कितनी अच्छा एग्रीकल्चर हो, कितनी अच्छी शिक्षा हो? आज हम लोगों को एक विकसित राज्य बनाने की बात करना है, विकसित राज्य बनाने पर बाते करें, और उसी विकसित राज्य बनाना हमारे आदरणीय मुखिया का मूल उद्देश्य है और उसी की हम लोगों की प्रतिबद्धता है।”

डॉ. मेवालाल चौधरी तारापुर प्रखंड के कमरगांव गांव के रहने वाले है। कुलपति पद से रिटायर होने के बाद वर्ष 2015 में वह जदयू से टिकट लेकर तारापुर से चुनाव लड़े और जीत गए। हालांकि इसी दौरान उन पर विश्वविद्यालय के 161 सहायक प्राध्यापक-जूनियर साइंटिस्ट के पदों पर 2012 में हुई बहाली में बड़े पैमाने पर धांधली और पैसों के लेन-देन के आरोप लगे।

काफी दिन केस को दबाए रखा गया। बाद में राज्यपाल के निर्देश पर गठित जस्टिस महफूज आलम कमेटी ने इसकी जांच की। कृषि विश्वविद्यालय में नियुक्ति घोटाले का मामला सबौर थाने में वर्ष 2017 में दर्ज किया गया था। मामले में उन्होंने कोर्ट से अंतरिम जमानत ले ली थी।

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