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वीरप्‍पा मोइली पर रिपोर्ट जारी करने का आरोप, मनमोहन बोले- संसदीय समिति की पवित्रता रहे कायम

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, 'पिछली प्रेस कांफ्रेस में मुझसे कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट के बारे में सवाल पूछा गया था। लेकिन मैंने कुछ भी कहने से मना कर दिया।'

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (फोटो सोर्स : Shekhar Yadav/EPS)

करीब एक हफ्ते पहले आई नोटबंदी पर वित्त संबंधित मामलों से जुड़ी पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने टिप्पणी की है। वित्त संबंधित संसद की स्थाई समिति के अध्यक्ष वीरप्पा मोइली पर यह रिपोर्ट जारी करने का आरोप लगा है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने मोइली के खिलाफ एक विशेषाधिकार हनन नोटिस लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के पास भेजा था। इस मामले पर अब मनमोहन सिंह ने कहा कि, स्थायी समितियों की पवित्रता को बनाए रखा जाना चाहिए और नियमों का पालन किया जाना चाहिए।

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, पिछली प्रेस कांफ्रेस में मुझसे कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट के बारे में सवाल पूछा गया था। लेकिन मैंने कुछ भी कहने से मना कर दिया। मेरा मानना है कि स्थायी समितियों की पवित्रता को बनाए रखा जाना चाहिए और नियमों का पालन किया जाना चाहिए।

मनमोहन सिंह का यह बयान भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा दिए गए नोटिस के बाद आया है। उन्होंने दावा किया था कि मोइली ने स्थायी समिति की कार्यवाही की जानकारी कथित रूप से ट्वीट के जरिए दी और कांग्रेस नेता द्वारा दी गई जानकारी सही नहीं है। यह जानकारी सूत्रों ने शुक्रवार को दी। दुबे भी इस समिति के सदस्य हैं।

सांसद दुबे ने वीरप्पा मोइली के उस ट्वीट का जिक्र किया था, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि ‘कृषि मंत्रालय ने समिति को कृषि पर नोटबंदी के प्रभाव के बारे में जानकारी दी थी।’ दुबे के अनुसार, मोइली ने ट्वीट किया था कि ‘बिना विचार किए नोटबंदी करने के चलते हमारे किसानों पर जिस तरह का बोझ पड़ा, उसके बारे में सरकार ने पहली यह आधिकारी तौर पर स्वीकारा है।’ हालांकि दुबे ने जिस ट्विटर अकाउंट के मोइली के होने का दावा किया वह ट्विटर द्वारा सत्यापित (नीला चिह्न) नहीं था।

दुबे ने दावा किया था कि, वीरप्पा मोइली द्वारा ट्विटर पर किया गया पोस्ट लोकसभा के नियम 275 (सबूत, रिपोर्ट और कार्यवाही को गोपनीय माना जाता है) का उल्लंघन है। यह नियम ‘सबूत, कमेटी की रिपोर्ट या सदन में पेश किए जाने से पहले इसकी कार्यवाही के ब्योरे को सामने लाने पर रोक लगाता है।’

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