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एक साल पहले आया कोरोना फिर भी खड़ा नहीं कर पाए हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर, इलाहाबाद हाईकोर्ट की योगी सरकार को फटकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट का सुझाव- सरकार कोरोना के इलाज के लिए फील्ड हॉस्पिटल यानी खुले मैदान में अस्पताल शुरू कराए और वहां मरीजों के इलाज की व्यवस्था करे।

Allahabad Highcourt. UP Government
उत्तर प्रदेश में पिछले एक हफ्ते में दोगुने हो चुके हैं रोजाना मिलने वाले कोरोना के केस। (एक्सप्रेस फोटो- विशाल श्रीवास्तव)
कोरोना की दूसरी लहर के बीच उत्तर प्रदेश में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पिछले 24 घंटे में ही राज्य में 17 हजार से ज्यादा नए केस दर्ज हुए हैं। लखनऊ, कानपुर और प्रयागराज जैसे बड़े शहरों में तो हालात अब काबू के बाहर जा रहे हैं। इस बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को सलाह दी है कि वह अधिक प्रभावित शहरों में दो या तीन हफ्ते के लिए पूर्ण लॉकडाउन लगाने पर विचार करे। इतना ही नहीं कोर्ट ने सरकार को महामारी के एक साल बाद भी स्वास्थ्य व्यवस्थाएं दुरुस्त न कर पाने के लिए फटकार लगाई।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या कहा?: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य में खराब स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के मुद्दे पर योगी सरकार की जमकर खिंचाई की। कोर्ट ने कहा कि कोरोना की पहली लहर आए हुए एक साल से ज्यादा का समय हो चुका है। लेकिन राज्य में स्वास्थ्य ढांचा अब तक नहीं सुधर पाया है। जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अजित कुमार की बेंच ने कहा कि सरकार कोरोना के इलाज के लिए फील्ड हॉस्पिटल यानी खुले मैदान में अस्पताल शुरू कराए और वहां मरीजों के इलाज की व्यवस्था करे।

‘नाइट कर्फ्यू संक्रमण रोकने के छोटे कदम’: न्यायालय ने सरकार को अलर्ट रहने के लिए कहा है। साथ ही कहा कि ट्रैक्टिंग, टेस्टिंग, ट्रीटमेंट योजना में तेजी लाई जाए। खंडपीठ ने कहा कि नाइट कर्फ्यू या कोरोना कर्फ्यू संक्रमण का फैलाव रोकने के लिए छोटे कदम हैं। नदी में तूफान आता है तो बांध उसे रोक नहीं पाते। फिर भी हमें संक्रमण को रोकने का प्रयास करना चाहिए। दिन में भी गैर-जरूरी यातायात को नियंत्रित करना चाहिए। जीवन रहेगा तभी सब कुछ है।

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इतना ही नहीं कोर्ट ने निर्देश में कहा है कि धार्मिक आयोजनों में 50 से ज्यादा लोगों को इकट्ठा न होने दिया जाए। 11 अप्रैल तक सरकार से इन गाइडलाइन को सभी जिलों में लागू करने के लिए कहा है। इस पर सरकार से 19 अप्रैल तक जवाब मांगा गया है। इसके साथ ही सचिव स्तर के अधिकारी का हलफनामा भी मांगा गया है।

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