एलएसी पर संकट: पांच साल और करोड़ों खर्च के बाद फेल हुआ लद्दाख का बड़ा प्रोजेक्ट, गृह और जल शक्ति मंत्रालय में छिड़ी रार

पूर्वी लद्दाख की वास्तविक नियंत्रण रेखा की रक्षा करने वाले अर्धसैनिक बल आईटीबीपी के लिए आल वेदर कंट्रोल बार्डर आउटपोस्ट बनाए जा रहे थे। लेकिन पांच साल और करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद अब लद्दाख का यह बड़ा प्रोजेक्ट फेल हो गया है।

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जवानों के लिए आल वेदर कंट्रोल बार्डर आउटपोस्ट बनाने वाला लद्दाख का बड़ा प्रोजेक्ट फेल हो गया है। (express file)

पूर्वी लद्दाख की वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अब भी भारत और चीनी की सेना आमने-सामने हैं।  ऐसे समय में इस क्षेत्र की रक्षा करने वाले अर्धसैनिक बल आईटीबीपी के लिए आल वेदर कंट्रोल बार्डर आउटपोस्ट बनाए जा रहे थे। लेकिन पांच साल और करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद अब लद्दाख का यह बड़ा प्रोजेक्ट फेल हो गया है।

इस प्रोजेक्ट के फेल होने के बाद सरकार के दो प्रमुख मंत्रालय गृह मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय में रार छिड़ गई है। इस परियोजना की घोषणा सरकार ने 2015 में की थी। इसके तहत बार्डर पर 40 एकीकृत सीमा चौकियों (BOPs) का निर्माण किया जाना था। इस क्षेत्र में ये अपने तरह के पहले बीपीओ थे जिसमें  फ्रीज-प्रूफ शौचालय था और इसमें बहते हुए पानी की भी व्यवस्था थी। इस बीपीओ का तापमान 22 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रखा जा सकता था। इससे फोर्स को अपनी ड्यूटी करने में भी आसानी होती और सीमा पार की गतिविधियों पर वह अपनी पैनी नजर रख सकती थी।

चीन के मुक़ाबले भारत के सीमा पर बुनियादी ढांचे की स्थिति काफी खराब है। इस मामले में चीन भारत से कई साल आगे है। ऐसे में इस प्रोजेक्ट को बुनियादी ढांचे के सुधार की ओर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था।

इस परियोजना का काम जल शक्ति मंत्रालय के तहत एक सार्वजनिक उपक्रम, राष्ट्रीय परियोजना निर्माण निगम (NPCC) को दिया गया था। पांच साल बाद और लगभग 20 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद, परियोजना पूरी तरह से फेल हो गई है। आईटीबीपी ने इसे विफल घोषित कर दिया गया है।

आईटीबीपी और एमएचए के सूत्रों ने कहा कि बीओपी 10-11 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान बनाए रखने में असमर्थ है और निर्माण की गुणवत्ता इतनी खराब है कि बीओपी में रहने वाले 40 जवानों ने पहले बनी चौकियों में ही रहने का फैसला किया।

सूत्रों ने कहा कि गृह मंत्रालय इतना नाखुश है कि उसने एनपीसीसी का आंशिक भुगतान रोक दिया है और वह परियोजना को पूरी तरह से डंप करने का विचार बना रहे हैं। दूसरी ओर, एनपीसीसी ने परियोजना की विफलता के लिए आईटीबीपी और एमएचए को दोषी ठहराया है।

उन्होंने दावा किया है कि भुगतान रोके जाने के चलते उप-ठेकेदार ने हीटिंग सिस्टम को बनाए नहीं रखा। सूत्रों ने बताया कि बीओपी के भीतर तापमान बनाए रखने में एनपीसीसी पूरी तरह फेल हो गया है। जिसके चलते आईटीबीपी ने उनका 4 करोड़ रुपये का भुगतान रोक दिया है।

आईटीबीपी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हमारे और एनपीसीसी के बीच अनुबंध हुआ था कि एक ऐसे बीओपी का निर्माण करना है जहां तापमान पूरे वर्ष 22 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहेगा, भले ही बाहर का तापमान शून्य से 44 डिग्री कम हो। एनपीसीसी सबसे बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहा है। हमारे लिए बीओपी अभी अधूरा है। तो, हम पूरा भुगतान क्यों करें?” 

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