आर्यन समेत तीनों आरोपी 7 अक्टूबर तक एनसीबी की हिरासत में, मानशिंदे की दलीलें नहीं आईं काम, मांगी थी जमानत

उनके वकील ने कोर्ट से इस आधार पर जमानत मांगी थी कि आर्यन के पास से ड्रग्स नहीं मिलीं और वह हर तरह से जांच में सहयोग करने को तैयार है, लेकिन कोर्ट ने उनकी दलीलों को नहीं माना।

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शाहरुख के बेटे आर्यन समेत तीनों आरोपियों को 7 तक हिरासत में भेजा गया। (फोटोः ट्विटर@SanskarBarot)

शाहरुख खान के बेटे आर्यन को आज भी राहत नहीं मिली। हालांकि उनके वकील ने कोर्ट से इस आधार पर जमानत मांगी थी कि आर्यन के पास से ड्रग्स नहीं मिलीं और वह हर तरह से जांच में सहयोग करने को तैयार है, लेकिन कोर्ट ने उनकी दलीलों को नहीं माना। आर्यन समेत तीनों आरोपियों को सात अक्टूबर तक एनसीबी की हिरासत में भेज दिया गया है। सरकारी वकील ने तीनों को 11 तक एनसीबी की रिमांड में देने को कहा था।

आर्यन समेत तीनों आरोपियों को मुंबई के एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट आरएम नेरलिकर की कोर्ट में पेश किया गया। एनसीबी की तरफ से एडवोकेट अद्वैत सेठना ने दलील दी कि बेशक आरोपियों के पास से ड्रग्स की जो मात्रा मिली वो कमर्शियल नहीं कही जा सकती, लेकिन फिर भी इसके लिंक का पता लगाना होगा। उनका कहना था कि ड्रग्स कहां से ली गईं और मोड ऑफ पेमेंट क्या था, इसकी तह में जाने के लिए आरोपियों को हिरासत में रखना जरूरी है।

सेठना ने दलील दी कि एनसीबी ने कॉर्डेलिया क्रूज के मुंबई वापस पहुंचने पर उसकी तलाशी ली है। छह घंटे से ज्यादा समय तक चली तलाशी के दौरान कुछ दस्तावेज और कुछ पदार्थ जब्त किए। इनके मादक द्रव्य होने का संदेह है। उन्होंने विस्तार से जानकारी नहीं दी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि खुफिया जानकारी के आधार पर एनसीबी की एक टीम ने शनिवार को क्रूज पर छापा मारा था। उन्होंने बताया कि जहाज पर 1800 लोग थे लेकिन जांच के बाद आठ लोगों को छोड़कर सभी को जाने के लिए कहा गया।

इन आठ लोगों में आर्यन खान भी थे। उनके अलावा गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मुनमुन धमेचा, अरबाज मर्चेंट, नूपुर सारिका, इसमीत सिंह, मोहक जसवाल, विक्रांत छोकर और गोमित चोपड़ा शामिल थे। एनसीबी इन लोगों से लगातार पूछताछ करके ड्रग्स से जुड़े रैकेट का पता लगाने की कोशिश कर रही है। इसके लिए उन्होंने 11 तक रिमांड मांगा। इस दौरान उन्होंने रिया चक्रवर्ती समेत कुछ और मामलों का जिक्र कर आरोपियों को जमानत दिए जाने का विरोध किया। उनका कहना था कि आर्यन हाईप्रोफाइल शख्स है। ड्रग्स दूसरे के पास से मिली है पर सच का पता लगाता जाना जरूरी है।

आर्यन के वकील सतीश मानशिंदे की दलील थी कि उनके मुवक्किल के पास से ड्रग्स नहीं मिली हैं। वह हर तरह से जांच में सहयोग करने को तैयार है। लिहाजा उसे जमानत पर छोड़ा जाए। उनका कहना था कि आर्यन के फोन को एजेंसी खंगाल चुकी है। उसमें से जो मिलना था मिल चुका है। अब उसे हिरासत में रखने से कोई फायदा नहीं होने वाला है। जब भी एनसीबी तलब करेगी वह जांच के लिए पेश हो जाएगा।

मानशिंदे ने कोर्ट से कहा कि एजेंसी कह रही है कि अपने विदेशी प्रवास के दौरान आर्यन ड्रग डीलरों के संपर्क में था। उन्होंने इस दावे का विरोध करते हुए कहा कि मोबाइल चैट्स से ऐसा कुछ भी पता नहीं चलता। उनका कहना था कि क्रूज पर आर्यन एक इनवाइटी के तौर पर गया था। उसने वहां एक भी पैसे का भुगतान नहीं किया था। उसके साथी के पास से छह ग्राम चरस मिली है। मानशिंदे ने कोर्ट में रिया चक्रवर्ती मामले का फैसला भी पढ़कर सुनाया। उन्होंने कहा का आर्यन केवल 24 साल का है। दूसरे आरोपियों से क्या मिला इससे उसे क्या मतलब है। एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 उस पर लागू नहीं होती। उन्होंने दलील दी कि शिप पर हजार से ज्यादा लोग थे। एनसीबी सभी से पूछताछ क्यों नहीं कर रही है?

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि क्रूज से 13 ग्राम कोकीन, पांच ग्राम एमडी (मेफोड्रोन), 21 ग्राम चरस और एक्स्टेसी की 22 गोलियां एवं 1.33 लाख रुपये नकद जब्त किए थे। अभी भी एनसीबी अपनी जांच को आगे बढ़ा रहा है। एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज सारे मामले गैर जमानती हैं। इसलिए जमानती और गैर जमानती का सवाल ही नहीं खड़ा होता है। कोर्ट ने कहा कि आर्यन के पास से कुछ नहीं मिला पर उसके साथी के पास से ड्रग्स मिली है। मामले में जांच बेहद जरूरी है। लिहाजा आर्यन समेत तीनों आरोपियों को 7 अक्टूबर तक रिमांड पर भेजा जाता है।

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