उत्तर प्रदेश के नोएडा में न्यूनतम वेतन को लेकर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हुआ है। तीन दिन के बवाल के बाद भी तनाव की स्थिति है। राज्य सरकार ने न्यूनतम वेतन बढ़ाने का ऐलान किया है, लेकिन जमीन पर नाराजगी कम नहीं हुई है। देश में इस समय न्यूनतम वेतन को लेकर बहस छिड़ चुकी है।

न्यूनतम वेतन को लेकर तो चर्चा हो रही है, लेकिन देश में स्किल संकट भी बड़ा है। वेतन बढ़ाने की चाह सभी की है, लेकिन कौन कितना योग्य है, उसके पास क्या कौशल है, इस पहलू को नजरअंदाज किया जा रहा है। विवाद जरूर मजदूरों के वेतन को लेकर है, लेकिन देश की पूरी वर्कफोर्स ही स्किल और सैलरी के बीच फंसी हुई है। भारत जैसे देश में आय और स्किल का सीधा ताल्लुक है, व्यक्ति जितना ज्यादा कुशल होगा, उसकी आमदनी भी उतनी होगी। जनसत्ता अपनी विशेष सीरीज ‘आंकड़े बोलते हैं’ के जरिए देश में जारी स्किल संकट को समझने की कोशिश कर रहा है। सिलसिलेवार तरीके से वर्तमान विवाद को समझते हैं और फिर दूसरे पहलुओं पर रोशनी डालते हैं-

न्यूनतम वेतन को लेकर विवाद

हरियाणा सरकार ने इस साल एक अप्रैल को न्यूनतम वेतन में करीब 35 फीसदी का इजाफा किया। वहां के मजदूरों की वेतन बढ़ने से नोएडा के श्रमिक असहज हो गए। तर्क दिया गया जब काम समान है, महंगाई समान है तो फिर सीमा बदलते ही वेतन में इतना अंतर कैसे हो सकता है। नोएडा के श्रमिकों ने मांग की कि उनका वेतन कम से कम 20,000 से 25,000 रुपये किया जाए। वहीं वे चाहते हैं कि रोजाना की वेतन 600 रुपये तय की जाए। नोएडा के मजदूर ओवरटाइम का भी डबल पैसा चाहते हैं।

भारत में कितना है न्यूनतम वेतन

भारत में न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 के तहत न्यूनतम मजदूरी तय की जाती है। सरकार रहने का खर्च, भोजन, कपड़ा और शिक्षा जैसे मानकों को आधार बनाती है। इसी के जरिए न्यूनतम मजदूरी तय होती है। कोड ऑन वेजेस (2019) के तहत लिंग को आधाकर बनाकर वेतन में भेदभाव भी नहीं किया जाता है।

आंकड़े बोलते हैं — विशेष सीरीज
भारत का स्किल संकट और न्यूनतम वेतन
राज्यवार मजदूरी · रोजगार-योग्यता ट्रेंड · वैश्विक तुलना · 2026
सर्वाधिक वेतन
दिल्ली
18,456 रु./माह
न्यूनतम वेतन
नागालैंड
5,280 रु./माह
रोजगार-योग्यता 2026
56.35%
2020 में 46.21% थी
IMD टैलेंट रैंक
63वां
स्कोर: 36.06
फ़िल्टर:
1
दिल्ली
अकुशल मजदूर
उच्च
18,456 रु.
2
अंडमान-निकोबार
अकुशल मजदूर
उच्च
16,952 रु.
3
कर्नाटक
अकुशल मजदूर
उच्च
16,137 रु.
4
हरियाणा
अकुशल मजदूर
उच्च
15,220 रु.
5
गोवा
अकुशल मजदूर
उच्च
14,274 रु.
6
मेघालय
अकुशल मजदूर
उच्च
14,690 रु.
7
चंडीगढ़
अकुशल मजदूर
उच्च
14,562 रु.
8
झारखंड
अकुशल मजदूर
मध्यम
13,050 रु.
9
गुजरात
अकुशल मजदूर
मध्यम
13,325 रु.
10
महाराष्ट्र
अकुशल मजदूर
मध्यम
13,921 रु.
11
तेलंगाना
अकुशल मजदूर
मध्यम
14,483 रु.
12
आंध्र प्रदेश
अकुशल मजदूर
मध्यम
13,248 रु.
13
मध्य प्रदेश
अकुशल मजदूर
मध्यम
12,425 रु.
14
उत्तर प्रदेश
अकुशल मजदूर
मध्यम
13,690 रु.
15
असम
अकुशल मजदूर
मध्यम
10,354 रु.
16
पश्चिम बंगाल
अकुशल मजदूर
कम
10,383 रु.
17
बिहार
अकुशल मजदूर
कम
11,336 रु.
18
त्रिपुरा
अकुशल मजदूर
कम
8,010 रु.
19
जम्मू-कश्मीर
अकुशल मजदूर
कम
8,036 रु.
20
राजस्थान
अकुशल मजदूर
कम
7,410 रु.
21
अरुणाचल प्रदेश
अकुशल मजदूर
कम
6,600 रु.
22
नागालैंड
अकुशल मजदूर
कम
5,280 रु.
# राज्य / केंद्र शासित प्रदेश अकुशल (रु.) कुशल (रु.) उच्च कुशल (रु.) श्रेणी
1 दिल्ली 18,456–20,371 22,411 24,356 उच्च
2 अंडमान-निकोबार 16,952 22,256 24,414 उच्च
3 कर्नाटक 14,559–16,137 16,661–18,570 17,872–19,972 उच्च
4 हरियाणा 15,220 18,500 19,425 उच्च
5 मेघालय 13,650–14,690 15,730 16,770 उच्च
6 चंडीगढ़ 14,562 15,012–15,237 15,637 उच्च
7 गोवा 14,144–14,274 17,160–17,290 उपलब्ध नहीं उच्च
8 तेलंगाना 13,483–14,483 13,983–16,483 14,483–16,983 मध्यम
9 गुजरात 13,039–13,325 13,585–13,897 उपलब्ध नहीं मध्यम
10 महाराष्ट्र 12,728–13,921 14,340–15,532 उपलब्ध नहीं मध्यम
11 झारखंड 13,050 18,042 20,802 मध्यम
12 उत्तर प्रदेश 13,690 16,868 उपलब्ध नहीं मध्यम
13 आंध्र प्रदेश 12,248–13,248 12,748–15,248 13,248–15,748 मध्यम
14 मध्य प्रदेश 12,425 15,144 16,769 मध्यम
15 छत्तीसगढ़ 10,656–11,176 12,086–12,606 12,866–13,386 मध्यम
16 असम 10,354 15,047 19,344 मध्यम
17 हिमाचल प्रदेश 11,820–12,750 13,620–14,790 14,250–15,390 मध्यम
18 पंजाब 11,726 13,403 14,435 मध्यम
19 दादरा-नगर हवेली 12,649 13,195 उपलब्ध नहीं मध्यम
20 दमन और दीव 12,649 13,195 उपलब्ध नहीं मध्यम
21 उत्तराखंड 12,391–12,539 13,838–14,023 उपलब्ध नहीं मध्यम
22 ओडिशा 462/दिन 562/दिन 612/दिन मध्यम
23 पश्चिम बंगाल 9,760–10,383 11,807–12,569 12,990–13,825 कम
24 बिहार 11,336 14,326 17,472 कम
25 त्रिपुरा 8,010 9,827 उपलब्ध नहीं कम
26 जम्मू-कश्मीर 8,036 12,558 14,352 कम
27 राजस्थान 7,410 8,034 9,334 कम
28 अरुणाचल प्रदेश 6,600 7,200 उपलब्ध नहीं कम
29 नागालैंड 5,280 7,050 उपलब्ध नहीं कम
47%
कर्मचारियों के पास जरूरी स्किल्स नहीं (ILO)
85%
इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स नौकरी लायक नहीं (Aspiring Minds)
3%
वर्कफोर्स को औपचारिक स्किल ट्रेनिंग मिलती है (NSDC)
रोजगार-योग्यता ट्रेंड — 2020 से 2026 (इंडियन स्किल्स रिपोर्ट)
46.21%
2020
45.90%
2021
46.20%
2022
50.30%
2023
51.25%
2024
54.81%
2025
56.35%
2026
औपचारिक स्किल ट्रेनिंग — भारत बनाम विश्व (NSDC / कौशल विकास मंत्रालय)
दक्षिण कोरिया
96%
जापान
80%
जर्मनी
75%
यूके
68%
अमेरिका
52%
भारत
3%
IMD वर्ल्ड टैलेंट रैंकिंग 2025 — शीर्ष 10 + भारत
1
स्विट्जरलैंड
स्कोर: 100
2
लक्जमबर्ग
स्कोर: 83.08
3
आइसलैंड
स्कोर: 82.19
4
हांगकांग
स्कोर: 80.10
5
नीदरलैंड्स
स्कोर: 80.09
6
स्वीडन
स्कोर: 79.46
7
सिंगापुर
स्कोर: 78.00
8
डेनमार्क
स्कोर: 77.94
9
यूएई
स्कोर: 77.86
10
ऑस्ट्रिया
स्कोर: 77.82
63
भारत
स्कोर: 36.06
स्रोत: Simpliance · इंडियन स्किल्स रिपोर्ट 2026 · ILO · NSDC · Aspiring Minds 2023 · IMD World Talent Rankings 2025 · ASSOCHAM · आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25

नीचे दी गई टेबल से जानते हैं भारत के किस राज्य में कितना न्यूनतम वेतन है-

राज्यअकुशल (Unskilled)कुशल (Skilled)उच्च कुशल (Highly Skilled)
अंडमान और निकोबार16,95222,25624,414
आंध्र प्रदेश12,248–13,248 (ज़ोन अनुसार)12,748–15,24813,248–15,748
अरुणाचल प्रदेश6,6007,200उपलब्ध नहीं
असम10,354.5315,04719,344.93
बिहार11,33614,32617,472
चंडीगढ़14,56215,012–15,23715,637
छत्तीसगढ़10,656–11,17612,086–12,60612,866–13,386
दादरा और नगर हवेली12,64913,195उपलब्ध नहीं
दमन और दीव12,64913,195उपलब्ध नहीं
दिल्ली18,456–20,37122,41124,356
गोवा14,144–14,27417,160–17,290उपलब्ध नहीं
गुजरात13,039–13,32513,585–13,897उपलब्ध नहीं
हरियाणा152201850019425
हिमाचल प्रदेश11,820–12,75013,620–14,79014,250–15,390
जम्मू-कश्मीर8,03612,55814,352
झारखंड13,05018,04220,802
कर्नाटक14,559–16,13716,661–18,57017,872–19,972
मध्य प्रदेश12,42515,14416,769
महाराष्ट्र12,728–13,92114,340–15,532उपलब्ध नहीं
मेघालय13,650–14,69015,73016,770
नागालैंड5,280.007,050.00उपलब्ध नहीं
ओडिशा462 (प्रतिदिन)562 (प्रतिदिन)612 (प्रतिदिन)
पंजाब11,726.4013,403.4014,435.40
राजस्थान7,410.008,0349,334
तेलंगाना13,483–14,48313,983–16,48314,483–16,983
त्रिपुरा8,010.349,827.65उपलब्ध नहीं
उत्तर प्रदेश13,690 16,868उपलब्ध नहीं
उत्तराखंड12,391–12,53913,838–14,023उपलब्ध नहीं
पश्चिम बंगाल9,760–10,38311,807–12,56912,990–13,825
सोर्स: Simpliance

ऊपर दी गई टेबल से पता चलता है कि भारत में इस समय सबसे ज्यादा न्यूनतम वेतन दिल्ली में दिया जा रहा है, यहां आंकड़ा 18456 रुपये है, अर्ध कुशल मजदूर के लिए मासिक वेतन 20,371 रुपये तक जा सकता है। दूसरे पायदान पर 16,952 रुपये के साथ अंडमान निकोबार आता है। तीसरे पायदान पर कर्नाटक आता है जहां जोन 1 के मजदूरों को 16137 रुपये मिलते हैं।

अगर बात सबसे कम न्यूनतम मजदूरी की करें तो नागालैंड शीर्ष पर आता है। यहां न्यूनतम वेतन मात्र 5280 रुपये है। दूसरे पायदान पर अरुणाचल प्रदेश आता है जहां 6600 रुपये मिलते हैं। तीसरे नंबर पर राजस्थान आता है जहां मजदूरों को 7410 रुपये मिल रहे हैं।

स्किल संकट से जूझ रहा भारत

भारत में बात चाहे मजदूरों की हो या फिर किसी आईटी कंपनी में काम करने वाले कर्मचारी की, बात जब स्किल्स की आती है, कई चुनौतियां पेश होती हैं। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की रिपोर्ट बताती है कि भारत में 47% कर्मचारियों के पास जरूरी स्किल्स ही नहीं हैं। देश में समय के साथ कई शैष्णिक संस्थान खुल चुके हैं, शिक्षा का विस्तार भी हुआ है, लेकिन स्किल्स के मामले में देश आज भी पीछे है।

पिछले साल हुए आर्थिक सर्वेक्षण ने भी चिंताजनक तस्वीर पेश की है। वर्तमान में सिर्फ 8.25% ग्रेजुएट्स ही ऐसी नौकरियों में काम कर रहे हैं, जो उनकी पढ़ाई और हासिल की गई डिग्री से मेल खाती हैं। Aspiring Minds, 2023 की रिपोर्ट बताती है कि भारत में 85 प्रतिशत इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स ऐसे हैं जिनके पास नौकरी के लायक स्किल्स ही नहीं हैं। इसी तरह भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल (एसोचैम) के मुताबिक 93 फीसदी एमबीए ग्रेजुएट्स को भी नौकरी नहीं मिल पा रही है।

नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NSDC) भी चिंताजनक ट्रेंड की ओर इशारा करती है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में 75 फीसदी कंपनियां स्किल कर्मचारी खोजने में कई चुनौतियों का सामना कर रही हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में अभी सिर्फ 3 फीसदी वर्कफोर्स को औपचारिक स्किल ट्रेनिंग मिल रही है। ये आंकड़ा अमेरिका में 52 फीसदी है और जर्मनी में 75 फीसदी। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय खुद बताता है कि भारत स्किल ट्रेनिंग के मामले में काफी पिछड़ा हुआ है। यूके में 68 फीसदी लोगों को स्किल ट्रेनिंग मिल रही है, जापान में 80 फीसदी और दक्षिण कोरिया में तो 96 फीसदी।

इंडियन स्किल्स रिपोर्ट 2026 भी कई ट्रेंड स्पष्ट करती है। पिछले 6 साल का डेटा बताता है कि भारत में कितने फीसदी लोग असल में नौकरी करने के लायक हैं। 2020 में देश में नौकरी हासिल करने लायक लोगों की संख्या 46.21 फीसदी थी, 2026 आते-आते आंकड़ा 56.35 फीसदी पहुंच गया। कह सकते हैं कि छह सालों में 10.35 फीसदी का उछाल देखने को मिला है।

वर्षरोजगार-योग्यता (%)
202046.21%
202145.90%
202246.20%
202350.30%
202451.25%
202554.81%
202656.35%
सोर्स: इंडियन स्किल्स रिपोर्ट 2026

इंडियन स्किल्स रिपोर्ट 2026 यह भी बताती है कि अलग-अलग कोर्स करने के बाद युवा कितने नौकरी के लायक बन पा रहे हैं। पिछले छह सालों का ट्रेंड काफी कुछ स्पष्ट करता है। इसे नीचे दी गई टेबल से समझिए-

कोर्स / क्षेत्र2020202120222023202420252026
MBA54%46.59%55.09%60.10%71.16%78%72.76%
बी.ई./बी.टेक49%46.82%55.15%57.44%64.67%71.50%70.15%
MCA25%22.42%29.30%30.64%64.63%71%68.25%
बी.कॉम47%40.30%42.62%60.62%48.12%55%62.81%
बी.एससी34%30.34%38.06%37.69%51.27%58%61%
बी.फार्मा45%37.24%44.63%57.51%54%56%58%
बी.आर्ट्स48%42.72%44.20%49.20%47.11%54%55.55%
आईटीआई (ITI)31.30%34.20%40%41%45.95%
पॉलिटेक्निक32%25%21.42%27.61%22.37%29%32.92%
सोर्स: इंडियन स्किल्स रिपोर्ट 2026

भारत को कास्ट नहीं स्किल सेंसस की जरूरत

देश में जातिगत जनगणना को लेकर बहस होती है, किस जाति के कितने लोग हैं, यह जानना है। नौकरियों में भी जाति आधारित आरक्षण को लेकर चर्चा चलती है। लेकिन जानकार मानते हैं कि भारत को इस समय कास्ट से ज्यादा स्किल सेंसस की जरूरत है। इसका बड़ा कारण यह है कि भारत सिर्फ स्किल्स के मामले में नहीं पिछड़ रहा है, वो टैलैंट के मामले में भी कई दूसरे देशों से काफी पीछे है।

IMD World Talent Rankings 2025 बताती है कि भारत टैलेंट के मामले में 63वें स्थान पर है, उसका स्कोर मात्र 36.06 दर्ज किया गया है। इस समय टैलेंट के मामले में नंबर एक पायदान पर स्विट्जरलैंड है, दूसरे पायदान पर लक्ज़मबर्ग है और तीसरे पायदान पर आईसलैंड है। नीचे दी गई टेबल से टॉप 10 देशों के बारे में जानते हैं जहां टैलेंट का बोलबाला है-

रैंक (2025)देशकुल स्कोर (2025)
1स्विट्ज़रलैंड100
2लक्ज़मबर्ग83.08
3आइसलैंड82.19
4हांगकांग (SAR)80.1
5नीदरलैंड्स80.09
6स्वीडन79.46
7सिंगापुर78
8डेनमार्क77.94
9यूएई (संयुक्त अरब अमीरात)77.86
10ऑस्ट्रिया77.82
सोर्स: IMD World Talent Rankings 2025

आंध्र प्रदेश की चंद्रबाबू नायडू की सरकार ने स्किल सेंसस की अहमियत को समझा है। जो आज तक देश में कभी नहीं हुआ, वो प्रैक्टिस इस राज्य में शुरू हुई है। इस प्रैक्टिस का नाम है- स्किल सेंसस, इसे कौशल जनगणना भी कहा जा सकता है। इस सेंसस के जरिए आंध्र प्रदेश की 3.5 करोड़ वर्किंग पॉपुलेशन को कवर किया जाएगा, उन सभी की उम्र 15 से 59 साल रहने वाली है।

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