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सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने गिरा दी मतभेद की दीवारें, तीन तलाक पर सभी दल आए एक मंच पर

मुसलिम समाज से जुड़े इस मुद्दे को संवेदनशील मानते हुए कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी पार्टियां अतीत में टिप्पणी करने से बच रही थीं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने वह दीवार गिरा दी।

Author नई दिल्ली | August 23, 2017 01:08 am
मुस्लिम महिलाएं।

विचारधारा की अपनी-अपनी दीवारें गिराकर तीन तलाक के मुद्दे पर सभी राजनीतिक दल एक मंच पर दिख रहे हैं। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सभी ने स्वागत किया है। मुसलिम समाज से जुड़े इस मुद्दे को संवेदनशील मानते हुए कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी पार्टियां अतीत में टिप्पणी करने से बच रही थीं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने वह दीवार गिरा दी। सत्ताधारी भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए इसे एक नए युग की शुरुआत बताया। दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कहा गया कि भारत में मुसलिम महिलाओं को समानता का हक देने के लिए यह सुप्रीम कोर्ट का प्रगतिशील और धर्मनिरपेक्ष फैसला है। और तो और मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील रहे कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने भी ‘यू टर्न’ लेते हुए पार्टी प्रवक्ता के नक्शे-कदम के मुताबिक टिप्पणी की है। बिहार में महागठबंधन टूटने के बाद एक-दूसरे को शिद्दत के साथ निशाने पर ले रही जद (एकी) और राजद जैसी पार्टियों ने भी इस मुद्दे पर एक राय जाहिर की है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद कांग्रेस ने अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया, हम तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। यह भारत में मुसलिम महिलाओं को समानता का हक देने के लिए प्रगतिशील और धर्मनिरपेक्ष फैसला है। कांग्रेस के इस ट्वीट से पहले उसके नेताओं ने इसी तरह की टिप्पणी की। कांग्रेस नेता व पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि यह सुलझा हुआ फैसला है। वास्तविकता पर आधारित दूरगामी कदम है। इससे इस्लाम का सही स्वरूप सामने आएगा। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, हम सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत करते हैं। तीन तलाक की प्रथा इस्लामिक शिक्षा के विरुद्ध है। यह प्रथा इस्लामिक न्यायशास्त्र के दो मूल स्रोत कुरान और हदीस के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से भेदभाव और शोषण दूर होगा और महिलाओं के अधिकार बहाल होंगे। उन्होंने कहा कि हमने पहले भी कहा था कि हम इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की प्रतीक्षा करेंगे और वह जो भी फैसला देगा, वह सभी को मान्य होगा।

भाजपा के इस मुद्दे पर शुरू से अपना रुख स्पष्ट रखने और कांग्रेस का अपना रुख स्पष्ट नहीं किए जाने के बारे में सुरजेवाला ने कहा कि हमने शुरू से ही फोन, वाट्स ऐप, ई-मेल आदि के जरिए फौरी तलाक का विरोध किया था और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से हमारा रुख सही साबित हुआ है। उन्होंने भाजपा की ओर संकेत करते हुए कहा, हम इस तरह के मामलों का इस्तेमाल वोट की राजनीति के लिए नहीं करते, जैसा कि आज की सत्तासीन पार्टी करती है। भाजपा आज तक कानून क्यों नहीं बनवा सकी। सुरजेवाला ने कहा, भाजपा को यह दोगली नीति बंद करनी चाहिए कि इधर भी चलेंगे और उधर भी चलेंगे। अगर उनका रुख था तो उनके पास संसद में बहुमत है। वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रतीक्षा किए बिना कानून लाते और इसे खारिज करवा देते। सुरजेवाला ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले में यह भी कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धर्म को मानने के अधिकार का संविधान के अध्याय तीन के आधार पर हर बार आकलन नहीं किया जा सकता।

उधर, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उत्साहित भाजपा ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा ने फैसले का स्वागत करते हुए केंद्र सरकार को विशेष सत्र बुलाकर इस पर कानून बनाने की मांग की है। सिन्हा ने कहा कि किसी भी देश में एक ही संविधान, एक ही नियम, एक ही प्रधान होता है। भारत में दो संविधान स्वीकार्य नहीं हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता इंद्रेश कुमार ने कहा कि यह सामाजिक मामला है। इस्लाम महिलाओं पर अत्याचार की इजाजत नहीं देता। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भी तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी इस फैसले को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि यह करोड़ों मुसलिम महिलाओं के हक में है। जनता दल (एकी) के महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि अब केंद्र सरकार को सभी धार्मिक संगठनों, सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर ऐसा कानून बनाना चाहिए, जो किसी को थोपा हुआ जैसा न लगे।

 

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